Rajya Sabha: चौथी बार सांसद बने परिमल नाथवानी ने ली शपथ, क्रॉस वोटिंग से मिली थी ऐतिहासिक जीत
झारखंड से राज्यसभा सांसद चुने गए Parimal Nathwani ने गुरुवार को संसद भवन में सदस्यता की शपथ लेकर अपने चौथे कार्यकाल की शुरुआत की। एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने वाले नाथवानी ने इसे सम्मान और जिम्मेदारी का क्षण बताते हुए झारखंड के विकास के लिए काम जारी रखने का संकल्प दोहराया।

New Delhi: झारखंड से राज्यसभा सांसद चुने गए परिमल नाथवानी ने गुरुवार को संसद भवन में सदस्यता की शपथ ली. इसके साथ ही उन्होंने राज्यसभा में अपने चौथे कार्यकाल की शुरुआत की. शपथ ग्रहण के बाद नाथवानी ने इसे अपने लिए सम्मान और जिम्मेदारी का क्षण बताते हुए झारखंड के विकास के लिए लगातार काम करने का संकल्प दोहराया. हाल ही में संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव में उनकी जीत ने झारखंड की राजनीति में बड़ा संदेश दिया था. एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे नाथवानी ने कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को हराकर जीत दर्ज की थी. यह चुनाव इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि परिणाम के बाद क्रॉस वोटिंग को लेकर सियासी गलियारों में तीखी बहस शुरू हो गई थी. अब शपथ लेने के साथ ही नाथवानी ने राज्यसभा में एक बार फिर झारखंड की आवाज उठाने की तैयारी शुरू कर दी है.
राज्यसभा सदस्य के रूप में ली शपथ
परिमल नाथवानी ने 25 जून को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली. शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने कहा कि झारखंड का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गौरव की बात है. उन्होंने अपने संदेश में ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल और युवाओं के कौशल विकास जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही. नाथवानी इससे पहले भी झारखंड का राज्यसभा में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और यह उनका चौथा कार्यकाल माना जा रहा है.
चुनाव से पहले नामांकन पर भी हुआ था विवाद
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया के दौरान परिमल नाथवानी का नामांकन भी चर्चा में रहा. उनके नामांकन पत्र पर कुछ आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं, जिसके कारण जांच की गई. हालांकि बाद में उनका नामांकन वैध माना गया और वे चुनाव मैदान में बने रहे. चुनाव के दौरान उनके सभी दलों के नेताओं और विधायकों से अच्छे संबंध भी चर्चा का विषय बने रहे.
क्रॉस वोटिंग ने बदल दिया पूरा समीकरण
18 जून को हुए चुनाव में झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए मुकाबला हुआ था. एक सीट पर झामुमो के बैद्यनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही थी, जबकि दूसरी सीट पर कांग्रेस के प्रणव झा और परिमल नाथवानी के बीच मुकाबला था. विधानसभा में संख्या बल एनडीए के पक्ष में नहीं होने के बावजूद नाथवानी ने जीत हासिल की. राजनीतिक दलों ने परिणाम के बाद क्रॉस वोटिंग की आशंका जताई. कई रिपोर्टों में कहा गया कि कुछ विधायकों के समर्थन ने चुनावी गणित बदल दिया और कांग्रेस उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा.
कैसे दर्ज की जीत और क्यों बना चर्चा का विषय
चुनाव परिणाम में बैद्यनाथ राम और परिमल नाथवानी दोनों विजयी रहे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा पीछे रह गए. नाथवानी को मिले समर्थन ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया. कांग्रेस ने सहयोगी दलों पर सवाल उठाए, जबकि भाजपा और एनडीए नेताओं ने इसे नाथवानी की स्वीकार्यता और बेहतर संबंधों का परिणाम बताया. चुनाव के बाद यह सवाल लगातार उठता रहा कि आखिर क्रॉस वोटिंग किसने की, लेकिन राज्यसभा चुनाव की गोपनीय मतदान प्रक्रिया के कारण इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ सकी. इसी वजह से यह चुनाव झारखंड की हालिया राजनीति की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल हो गया.

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