राज्यसभा चुनाव : कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा ने तेजस्वी यादव से मिलकर मांगा समर्थन
झारखंड में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. महागठबंधन की ओर से कांग्रेस उम्मीदवार बनाए गए प्रणव झा अपने समर्थन में अधिक से अधिक वोट सुनिश्चित करने के लिए लगातार सहयोगी दलों के नेताओं से संपर्क साध रहे हैं.

Rajyasabha Election: झारखंड में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. महागठबंधन की ओर से कांग्रेस उम्मीदवार बनाए गए प्रणव झा अपने समर्थन में अधिक से अधिक वोट सुनिश्चित करने के लिए लगातार सहयोगी दलों के नेताओं से संपर्क साध रहे हैं. इसी कड़ी में सोमवार को उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने राज्यसभा चुनाव में अपने पक्ष में समर्थन की अपील की. झारखंड में राजद महागठबंधन का अहम सहयोगी दल है और विधानसभा में उसके चार विधायक हैं. ऐसे में चुनावी गणित के लिहाज से राजद का समर्थन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. राज्यसभा चुनाव से पहले महागठबंधन अपने सभी घटक दलों को एकजुट रखने और रणनीतिक रूप से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटा हुआ है. प्रणव झा की यह मुलाकात भी इसी राजनीतिक कवायद का हिस्सा मानी जा रही है.
तेजस्वी यादव से मुलाकात के क्या हैं राजनीतिक मायने?
राज्यसभा चुनाव में हर एक वोट की अहमियत होती है और इसी वजह से कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा सहयोगी दलों का समर्थन सुनिश्चित करने में जुटे हैं. तेजस्वी यादव से मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. झारखंड विधानसभा में राजद के चार विधायक हैं, जिनका समर्थन चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है. महागठबंधन के भीतर बेहतर समन्वय और एकजुटता बनाए रखने के लिए भी यह मुलाकात अहम मानी जा रही है. सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान राज्यसभा चुनाव की रणनीति और महागठबंधन की मजबूती पर भी चर्चा हुई. कांग्रेस चाहती है कि गठबंधन के सभी दल एकजुट होकर उसके उम्मीदवार का समर्थन करें, ताकि चुनाव में किसी प्रकार की चुनौती का सामना न करना पड़े. ऐसे में तेजस्वी यादव के साथ हुई यह बैठक चुनावी समीकरणों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
भाकपा (माले) ने भी दिया कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन
राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को महागठबंधन के अन्य सहयोगी दलों का भी समर्थन मिलना शुरू हो गया है. इससे पहले उन्होंने भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य से मुलाकात की थी. इस मुलाकात के बाद भाकपा (माले) ने सार्वजनिक रूप से प्रणव झा के समर्थन का ऐलान कर दिया. दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि उनकी पार्टी भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता को मजबूत करने के पक्ष में है और झारखंड में भाजपा की किसी भी राजनीतिक रणनीति को सफल नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्यसभा चुनाव में उनकी पार्टी कांग्रेस उम्मीदवार के समर्थन में मतदान करेगी. भाकपा (माले) के इस ऐलान को महागठबंधन के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. इससे कांग्रेस उम्मीदवार की स्थिति और मजबूत हुई है तथा गठबंधन की एकजुटता का संदेश भी राजनीतिक गलियारों में गया है.
18 जून को होगा मतदान, बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना है. चुनाव की तारीख नजदीक आते ही राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई है. सभी राजनीतिक दल अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं. महागठबंधन की ओर से कांग्रेस ने प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि विपक्षी दल भी अपने राजनीतिक समीकरण साधने में लगे हैं. राज्यसभा चुनाव भले ही प्रत्यक्ष चुनाव न हो, लेकिन इसके परिणाम राजनीतिक दलों की ताकत और गठबंधन की मजबूती का संकेत देते हैं. यही कारण है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनाव को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहते. चुनाव से पहले लगातार बैठकों और नेताओं के बीच संपर्क अभियान चलाया जा रहा है ताकि मतदान के दिन सभी विधायक एकजुट होकर गठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करें.
मुख्यमंत्री आवास में होगी महागठबंधन की अहम बैठक
राज्यसभा चुनाव से ठीक एक दिन पहले यानी 17 जून को मुख्यमंत्री आवास में महागठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है. इस बैठक में कांग्रेस, झामुमो, राजद, भाकपा (माले) समेत गठबंधन के सभी प्रमुख दलों के नेता शामिल होंगे. बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्यसभा चुनाव को लेकर अंतिम रणनीति तैयार करना और सहयोगी दलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है. सूत्रों के मुताबिक, बैठक में मतदान की प्रक्रिया, विधायकों की उपस्थिति और चुनावी गणित पर विस्तार से चर्चा होगी. साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गठबंधन के सभी विधायक एकजुट होकर निर्धारित रणनीति के अनुसार मतदान करें. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक राज्यसभा चुनाव से पहले महागठबंधन की शक्ति प्रदर्शन का भी अवसर होगी. ऐसे में इस बैठक पर राजनीतिक दलों और चुनावी पर्यवेक्षकों की नजरें टिकी हुई हैं.

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