Rajya Sabha Election 2026: बिहार में वोटिंग के बीच ‘गायब’ 4 विधायक बने सस्पेंस, पांचवीं सीट पर NDA-महागठबंधन की असली लड़ाई
बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 में वोटिंग के दौरान महागठबंधन के चार विधायक गायब रहने से सियासी हलचल तेज हो गई है. पांचवीं सीट पर एनडीए और महागठबंधन के बीच मुकाबला बेहद दिलचस्प बन गया है.

देश में 37 सीटों के लिए चल रही राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है. इनमें से 26 उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुन लिए गए हैं, जबकि बिहार, हरियाणा और ओडिशा की 11 सीटों पर 16 मार्च को मतदान हो रहा है. Rajya Sabha के इन चुनावों में सबसे ज्यादा नजरें बिहार की पांच सीटों पर टिकी हैं, जहां मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है. चार सीटों पर सत्तारूढ़ गठबंधन एनडीए के उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन पांचवीं सीट को लेकर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. इसी बीच मतदान के दौरान महागठबंधन के चार विधायक लंबे समय तक वोटिंग से गायब बताए गए, जिससे सियासी हलकों में क्रॉस वोटिंग और ‘खेला’ की चर्चाएं तेज हो गईं. सत्ता पक्ष जहां पांचों सीटें जीतने का दावा कर रहा है, वहीं विपक्षी खेमे का कहना है कि उनके पास जरूरी संख्या जुट चुकी है. ऐसे में बिहार की पांचवीं सीट इस चुनाव की सबसे बड़ी राजनीतिक पहेली बन गई है.
बिहार में पांचवीं सीट पर असली मुकाबला
बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए कुल छह उम्मीदवार मैदान में हैं. एनडीए की ओर से Nitish Kumar और Ram Nath Thakur (जदयू) के साथ भाजपा के नितिन नवीन और शिवेश कुमार उम्मीदवार हैं. इन चारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है. असल मुकाबला पांचवीं सीट के लिए एनडीए समर्थित Upendra Kushwaha और महागठबंधन समर्थित आरजेडी उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह के बीच है. इस सीट के लिए विधायकों के समर्थन का गणित बेहद अहम हो गया है, क्योंकि जीत के लिए 41 वोट की जरूरत बताई जा रही है.
वोटिंग के बीच चार विधायक गायब, बढ़ी सियासी हलचल
मतदान के दौरान एनडीए के सभी 202 विधायकों के वोट डालने की खबर सामने आई. इसके विपरीत महागठबंधन के चार विधायक काफी देर तक वोटिंग के लिए विधानसभा नहीं पहुंचे. इनमें कांग्रेस के तीन विधायक—मनोहर प्रसाद, सुरेंद्र कुशवाहा और मनोज विश्वास—और राजद के विधायक फैसल रहमान शामिल बताए गए. इन विधायकों के मोबाइल फोन बंद होने की खबरों ने सियासी अटकलों को और तेज कर दिया. विपक्षी खेमे में आशंका जताई गई कि अगर ये विधायक समय पर मतदान नहीं करते हैं या क्रॉस वोटिंग करते हैं, तो महागठबंधन की पांचवीं सीट की उम्मीद कमजोर पड़ सकती है.
‘क्रॉस वोटिंग’ की चर्चा और सत्ता-विपक्ष के आरोप
मतदान के दौरान दोनों खेमों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया. सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने दावा किया कि महागठबंधन के कुछ विधायक उनके पक्ष में वोट कर सकते हैं. वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया कि विधायकों पर दबाव बनाने और उन्हें तोड़ने की कोशिश की जा रही है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग की संभावना अक्सर रहती है, क्योंकि मतदान गुप्त मतपत्र से होता है और व्हिप का उल्लंघन भी कई बार सामने आता है.
पांचवीं सीट का गणित क्यों बना सस्पेंस
बिहार विधानसभा की मौजूदा स्थिति इस मुकाबले को और रोचक बनाती है. 243 सदस्यीय सदन में एनडीए के पास भारी बहुमत है और वह चार सीटें आसानी से जीत सकता है. दूसरी ओर महागठबंधन के पास सीमित संख्या बल है, इसलिए उसे सहयोगी दलों के समर्थन और संभावित क्रॉस वोटिंग पर भरोसा करना पड़ रहा है. इसी वजह से एआईएमआईएम और बसपा के विधायकों के समर्थन की चर्चा भी सामने आई, जिससे विपक्षी उम्मीदवार की उम्मीदें कुछ बढ़ती दिखीं.
शाम तक साफ होगी तस्वीर
मतदान के दौरान विपक्ष के नेता Tejashwi Yadav ने दावा किया कि उनके उम्मीदवार को जरूरी समर्थन मिल चुका है और जीत सुनिश्चित है. वहीं एनडीए नेताओं ने भरोसा जताया कि सभी पांच सीटें उनके खाते में जाएंगी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार की पांचवीं सीट का परिणाम केवल संख्या बल ही नहीं बल्कि रणनीति, सहयोगी दलों के रुख और संभावित क्रॉस वोटिंग पर भी निर्भर करेगा. वोटों की गिनती के बाद देर शाम तक यह साफ हो जाएगा कि यह सीट एनडीए के खाते में जाती है या महागठबंधन कोई बड़ा उलटफेर करने में सफल होता है.

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