जामताड़ा में मां-बच्चे की मौत पर सियासी संग्राम तेज, BJP की जांच टीम आज पहुंचेगी; डॉक्टर हड़ताल पर, मंत्री ने विपक्ष को घेरा
जामताड़ा सदर अस्पताल में गर्भवती महिला और उसके नवजात की मौत के बाद मामला तूल पकड़ गया है. अस्पताल में हंगामे, बीजेपी नेताओं पर FIR, डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल और स्वास्थ्य मंत्री व बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब पूरे मामले की जांच पर सबकी नजर टिकी है.

Ranchi: जामताड़ा सदर अस्पताल में गर्भवती महिला रीना कुमारी और उसके नवजात की मौत अब केवल एक स्वास्थ्य हादसा नहीं रह गया है. घटना के बाद अस्पताल में हुए हंगामे, बीजेपी नेताओं पर दर्ज प्राथमिकी, डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के तीखे राजनीतिक आरोपों ने इस मामले को राज्य की सबसे बड़ी सियासी बहस बना दिया है. शुक्रवार को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच समिति शाम चार बजे जामताड़ा पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण करेगी. उधर, स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल में हुए प्रदर्शन के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है, जबकि बीजेपी सरकार पर स्वास्थ्य व्यवस्था, 108 एंबुलेंस सेवा और अस्पतालों की बदहाली को लेकर सवाल उठा रही है. ऐसे में अब सबकी नजर जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है.
अब स्वास्थ्य व्यवस्था भी सवालों के घेरे में
16 जुलाई को जामताड़ा के सरकारबांध निवासी परिवार की 22 वर्षीय गर्भवती रीना कुमारी की प्रसव के दौरान मौत हो गई. नवजात भी जीवित नहीं बच सका. परिजनों का आरोप है कि प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी गई, लेकिन समय पर वाहन नहीं पहुंचा. मजबूरी में गर्भवती को ई-रिक्शा से सदर अस्पताल लाया गया. परिवार का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी इलाज में देरी हुई और इसी वजह से मां और बच्चे दोनों की जान चली गई. घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और अस्पताल परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन व तोड़फोड़ हुई. यहीं से यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था से निकलकर प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद में बदल गया.
बीजेपी नेताओं पर FIR के बाद नया मोड़
अस्पताल प्रशासन ने तोड़फोड़ और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में बीजेपी जिला अध्यक्ष समेत आठ नामजद लोगों और कई अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है. इसके विरोध में नहीं, बल्कि सुरक्षा की मांग को लेकर डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और सिविल सर्जन कार्यालय के कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है. कर्मचारियों का कहना है कि अस्पताल में लगातार हिंसक घटनाएं हो रही हैं और पर्याप्त सुरक्षा के बिना काम करना संभव नहीं है. हड़ताल का असर अस्पताल की नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर साफ दिखाई दे रहा है. आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर अधिकांश चिकित्सा सुविधाएं प्रभावित हैं और दूर-दराज से पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
स्वास्थ्य मंत्री ने बीजेपी पर साधा निशाना, बीजेपी ने बनाई जांच समिति
मामले ने राजनीतिक रंग तब पकड़ लिया जब स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने अस्पताल में हुए हंगामे के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया. मंत्री का कहना है कि प्रदर्शन और अव्यवस्था के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं, जिसका नुकसान मरीजों को उठाना पड़ा. उन्होंने जिला प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की है. दूसरी ओर बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सरकार पर अपनी नाकामी छिपाने का आरोप लगाया है. प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के निर्देश पर प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील सोरेन, प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी और प्रदेश मंत्री कृष्णा महतो की तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है. समिति शुक्रवार शाम चार बजे जामताड़ा पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण करेगी और अपनी रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपेगी.
जांच के साथ जवाबदेही पर भी टिकी नजर
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है कि आखिर रीना कुमारी और उसके नवजात की मौत किन परिस्थितियों में हुई. क्या एंबुलेंस सेवा में देरी हुई? क्या अस्पताल में इलाज के दौरान कोई चूक हुई? या फिर मरीज की स्थिति पहले से ही अत्यंत गंभीर थी? इन सभी सवालों का जवाब अब प्रशासनिक जांच और चिकित्सकीय तथ्यों से ही सामने आएगा. फिलहाल एक ओर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं हड़ताल से प्रभावित हैं, दूसरी ओर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप लगातार तेज हो रहे हैं. ऐसे में जामताड़ा की यह घटना अब सिर्फ एक अस्पताल तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और राजनीतिक जवाबदेही—तीनों पर एक साथ बड़े सवाल खड़े कर रही है.

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