Jharkhand SIR: पुराने दस्तावेजों ने बढ़ाई टेंशन, रांची समाहरणालय में लोगों की भीड़
झारखंड में SIR प्रक्रिया के बीच दस्तावेजों और पहचान से जुड़ी परेशानियां बढ़ती जा रही हैं. रांची समाहरणालय में बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. किसी को पुराने शैक्षणिक प्रमाणपत्र तो किसी को आवासीय और पारिवारिक संबंधों से जुड़े दस्तावेज जुटाने में परेशानी हो रही है.

Ranchi: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया जारी है. इस दौरान दस्तावेज और पहचान से जुड़ी परेशानियों को लेकर बड़ी संख्या में लोग रांची स्थित समाहरणालय भवन पहुंच रहे हैं. लोगों की शिकायत है कि किसी के SIR फॉर्म में सुधार की जरूरत है, तो किसी को अपनी पहचान या पारिवारिक संबंध साबित करने के लिए पुराने दस्तावेज जुटाने में परेशानी हो रही है. कई लोगों का कहना है कि वे वर्षों से झारखंड में रह रहे हैं, लेकिन प्रक्रिया के दौरान मांगे जा रहे कुछ दस्तावेज उनके पास उपलब्ध नहीं हैं. वहीं, बीएलओ और अधिकारी स्तर पर अलग-अलग जानकारी मिलने की शिकायत से भी लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
दस्तावेज जुटाने में लोगों को हो रही परेशानी
समाहरणालय पहुंच रहे लोगों के मामलों से पता चलता है कि पुराने दस्तावेज जुटाना कई परिवारों के लिए आसान नहीं है. एक परिवार की महिला को आवासीय प्रमाण पत्र से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने की परेशानी है. परिवार के पास जमीन से जुड़ी कुछ रसीदें मौजूद हैं, लेकिन उन दस्तावेजों को हासिल करने में पारिवारिक स्तर पर दिक्कत आ रही है. इसी तरह एक अन्य महिला से उसके पिता का मैट्रिक सर्टिफिकेट मांगे जाने की बात सामने आई. परिवार के लिए यह पता लगाना ही मुश्किल है कि उनके पिता ने मैट्रिक की परीक्षा पास की थी या नहीं. ऐसे में दशकों पुराने रिकॉर्ड को कम समय में हासिल करना चुनौती बन गया है. कुछ मामलों में लोगों को अपने पारिवारिक संबंधों से जुड़े दस्तावेज भी प्रस्तुत करने की चिंता है.
पहचान और पारिवारिक संबंध साबित करने की चुनौती
SIR के दौरान कई लोगों के सामने केवल अपनी पहचान से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने की ही चुनौती नहीं है, बल्कि पारिवारिक संबंध साबित करने की समस्या भी सामने आ रही है. ऐसे मामलों में लोगों को यह साबित करने के लिए दस्तावेज तलाशने पड़ रहे हैं कि माता-पिता और बच्चों के बीच संबंध क्या है. समाहरणालय में पहुंचे एक मामले में एक पिता अपनी बेटियों के साथ पारिवारिक संबंध साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेजों को लेकर परेशान नजर आए. ऐसे उदाहरण बताते हैं कि जिन परिवारों ने वर्षों पुराने रिकॉर्ड संभालकर नहीं रखे हैं, उनके लिए प्रक्रिया अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है. लोगों का कहना है कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले परिवारों के पास पुराने शैक्षणिक रिकॉर्ड, जमीन के कागजात या अन्य जरूरी दस्तावेज आसानी से उपलब्ध नहीं होते. ऐसे में उन्हें संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं.
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की जांच और उसे अधिक सटीक एवं व्यवस्थित बनाना है. इस प्रक्रिया के तहत मतदाताओं से संबंधित जानकारी और आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है. हालांकि, प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज जुटाने में आ रही दिक्कतों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. लोगों का कहना है कि कई दस्तावेज ऐसे हैं जिन्हें बनवाने या पुराने रिकॉर्ड से निकालने में समय लग सकता है. खासकर आवासीय प्रमाण पत्र, पुराने शैक्षणिक प्रमाणपत्र और पारिवारिक संबंधों से जुड़े रिकॉर्ड जुटाना कुछ परिवारों के लिए कठिन हो रहा है. ऐसे में SIR की प्रक्रिया को लेकर लोगों का कहना है कि उन्हें स्पष्ट जानकारी के साथ पर्याप्त समय भी मिलना चाहिए, ताकि वे आवश्यक दस्तावेज व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध करा सकें.
समयसीमा को लेकर सबसे ज्यादा चिंता
SIR प्रक्रिया के दौरान लोगों की सबसे बड़ी चिंता दस्तावेज जमा करने की समयसीमा को लेकर है. समाहरणालय पहुंच रहे कुछ लोगों का कहना है कि अलग-अलग दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए उन्हें सीमित समय मिल रहा है. कहीं प्रमाण पत्र तैयार कराने के लिए कुछ दिनों का समय बताया जा रहा है, तो कहीं दस्तावेज जमा करने की अवधि और कम होने की बात सामने आ रही है. यही वजह है कि पुराने रिकॉर्ड खोजने वाले परिवारों की परेशानी बढ़ रही है. लोगों का सवाल है कि यदि किसी दस्तावेज को संबंधित सरकारी कार्यालय से हासिल करने में ही कई दिन लगते हैं, तो उसे तय समयसीमा के भीतर जमा करना कैसे संभव होगा. लोग चाहते हैं कि दस्तावेजों की आवश्यकता और उन्हें जमा करने की अंतिम तारीख को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि भ्रम की स्थिति खत्म हो सके.
समय पर दस्तावेज नहीं देने पर क्या होगा?
SIR को लेकर लोगों के बीच एक अहम सवाल यह भी है कि यदि कोई व्यक्ति तय समयसीमा में मांगा गया दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाता है, तो उसके मतदाता रिकॉर्ड पर क्या असर पड़ेगा. इस मुद्दे को लेकर कई लोगों में आशंका दिखाई दे रही है. यह समझना जरूरी है कि मतदाता सूची में नाम का सत्यापन और भारतीय नागरिकता का कानूनी निर्धारण अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं. इसलिए SIR के दौरान किसी दस्तावेज को समय पर प्रस्तुत नहीं कर पाना अपने आप में किसी व्यक्ति को गैर-नागरिक घोषित करने के समान नहीं है. हालांकि, मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया में दस्तावेजों और दावों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है. इसलिए संबंधित अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जानकारी और प्रभावित लोगों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का उचित अवसर मिलना जरूरी है.
लोगों की मांग—प्रक्रिया और नियम स्पष्ट किए जाएं
समाहरणालय पहुंच रहे लोगों की एक प्रमुख मांग यह है कि SIR प्रक्रिया को लेकर सभी स्तरों पर एक जैसी और स्पष्ट जानकारी दी जाए. लोगों का कहना है कि बीएलओ और अधिकारी स्तर पर यदि अलग-अलग दस्तावेजों या नियमों की जानकारी मिलती है, तो इससे अनावश्यक भ्रम पैदा होता है. लोग चाहते हैं कि आवश्यक दस्तावेजों की स्पष्ट सूची, उन्हें जमा करने की प्रक्रिया और समयसीमा की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए. साथ ही पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में वैकल्पिक दस्तावेजों या निर्धारित प्रक्रिया के बारे में भी स्पष्ट जानकारी दी जाए. SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को व्यवस्थित और विश्वसनीय बनाना है, लेकिन इसकी प्रक्रिया में आम लोगों को पर्याप्त अवसर और स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलना भी उतना ही जरूरी है.
अब प्रशासन के स्पष्टीकरण पर नजर
रांची समाहरणालय में बढ़ती भीड़ और दस्तावेजों को लेकर लोगों की परेशानी के बीच अब प्रशासन की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश का इंतजार है. लोगों की मांग है कि SIR से जुड़े नियम, दस्तावेजों की जरूरत और समयसीमा को लेकर किसी तरह का भ्रम न रहे. सबसे बड़ा सवाल यही है कि वर्षों पुराने दस्तावेज जुटाने में असमर्थ लोगों को कितनी राहत या अतिरिक्त अवसर मिलेगा. साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि अलग-अलग स्तरों पर लोगों को एक समान जानकारी मिले. फिलहाल SIR की प्रक्रिया जारी है और दस्तावेजों से जुड़ी समस्याओं को लेकर लोगों की भीड़ समाहरणालय पहुंच रही है. आने वाले दिनों में प्रशासन की ओर से जारी होने वाले दिशा-निर्देश यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि लोगों की इन परेशानियों का समाधान किस तरह किया जाता है.

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