परिमल नाथवानी को बड़ी राहत, नामांकन वैध; राज्यसभा चुनाव में अब त्रिकोणीय मुकाबला
झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर पिछले दो दिनों से जारी राजनीतिक सस्पेंस आखिरकार काफी हद तक साफ हो गया है. निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर उठी आपत्तियों और लंबी सुनवाई के बाद उनके नामांकन को वैध माना गया है.

Ranchi: झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर पिछले दो दिनों से जारी राजनीतिक सस्पेंस आखिरकार काफी हद तक साफ हो गया है. निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर उठी आपत्तियों और लंबी सुनवाई के बाद उनके नामांकन को वैध माना गया है. नामांकन पत्र की जांच के दौरान कुछ तकनीकी बिंदुओं पर सवाल उठाए गए थे, जिसके बाद मामला चर्चा का विषय बन गया था. कांग्रेस की ओर से भी नामांकन को लेकर कई आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं और पार्टी नेताओं ने इसे लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था. हालांकि सुनवाई पूरी होने के बाद नाथवानी की उम्मीदवारी बरकरार रहने से अब राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक समीकरण और रोचक हो गया है. खास तौर पर दूसरी सीट के लिए मुकाबले पर सबकी नजरें टिक गई हैं.
नामांकन पर उठी आपत्तियों के बाद बढ़ी थी राजनीतिक हलचल
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच के दौरान परिमल नाथवानी के दस्तावेजों से जुड़े कुछ मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं. इन आपत्तियों के बाद चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों ने मामले की विस्तृत सुनवाई करने का निर्णय लिया. राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं और यह अटकलें भी लगाई जा रही थीं कि नामांकन पर कोई बड़ा फैसला आ सकता है. इसी वजह से राज्यसभा चुनाव का माहौल अचानक काफी गर्म हो गया था.
कांग्रेस ने दर्ज कराई थी आपत्ति, विधानसभा परिसर में हुआ विरोध
नाथवानी के नामांकन को लेकर कांग्रेस ने खुलकर सवाल उठाए थे. पार्टी नेताओं का कहना था कि नामांकन से जुड़े कुछ बिंदुओं की गहन जांच होनी चाहिए. इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विधानसभा परिसर में विरोध प्रदर्शन भी किया. कांग्रेस की ओर से कानूनी और राजनीतिक स्तर पर अपनी बात रखने की कोशिश की गई. पार्टी नेताओं ने निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए. इस दौरान विधानसभा परिसर के भीतर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी तेज रही.
सुनवाई के बाद नाथवानी को मिली राहत
सभी पक्षों की दलीलें सुनने और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों ने नाथवानी की ओर से प्रस्तुत स्पष्टीकरण को स्वीकार कर लिया. इसके बाद उनकी उम्मीदवारी पर बना संशय समाप्त हो गया. राजनीतिक रूप से यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नामांकन को लेकर चल रही बहस ने चुनाव को पहले ही काफी चर्चित बना दिया था. नाथवानी की उम्मीदवारी बरकरार रहने से उनके समर्थकों में उत्साह देखा गया, जबकि विरोधी दलों ने फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया जारी रखी.
दूसरी सीट पर बढ़ी दिलचस्पी
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होना है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एक सीट पर गठबंधन उम्मीदवार की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत मानी जा रही है, जबकि दूसरी सीट को लेकर मुकाबला अधिक दिलचस्प हो सकता है. नाथवानी के चुनावी मैदान में बने रहने से राजनीतिक गणित और जटिल हो गया है. विभिन्न दलों के विधायकों की संख्या, संभावित समर्थन और रणनीति अब चुनाव परिणाम में अहम भूमिका निभा सकती है.
आगे की रणनीति पर टिकी नजरें
नामांकन विवाद समाप्त होने के बाद अब सभी राजनीतिक दल चुनावी रणनीति पर फोकस कर रहे हैं. राज्यसभा चुनाव में हर वोट महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इसी वजह से राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के समर्थन को लेकर चर्चाएं और बैठकों का दौर बढ़ सकता है. फिलहाल सबसे बड़ा संदेश यही है कि परिमल नाथवानी की उम्मीदवारी बरकरार रहने से राज्यसभा चुनाव का मुकाबला पहले की तुलना में अधिक रोचक और प्रतिस्पर्धी हो गया है. अब राजनीतिक दलों की नजरें मतदान और अंतिम परिणाम पर टिकी हुई हैं.


