JPSC-JSSC विवाद: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, केंद्र और झारखंड सरकार को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र और झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया है. याचिका में CBI या स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की गई है.

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को JPSC की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की. कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार, झारखंड सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है. याचिका में परीक्षा प्रक्रिया की जांच CBI या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता ने परीक्षा रद्द करने की मांग नहीं की है. याचिका का मुख्य जोर कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच पर है. मामला JPSC की 2025 की प्रारंभिक परीक्षा से जुड़ा है. इस बीच JPSC-JSSC की अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी राज्य में विवाद चल रहा है. पिछले सप्ताह झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा और उससे हुई नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी थी. अब सुप्रीम कोर्ट में 2025 प्रारंभिक परीक्षा की जांच को लेकर सुनवाई हुई है.
JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच की मांग
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में JPSC Combined Civil Services Preliminary Competitive Examination-2025 की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता ने आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की है. इसके लिए CBI या किसी अन्य स्वतंत्र जांच एजेंसी को जिम्मेदारी देने का अनुरोध किया गया है. याचिका में परीक्षा से संबंधित रिकॉर्ड और जरूरी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अनियमितताएं हुई थीं या नहीं. फिलहाल कोर्ट ने इन आरोपों पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है.
केंद्र और झारखंड सरकार से मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और झारखंड सरकार समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया. अब सभी पक्षों को याचिका में लगाए गए आरोपों और स्वतंत्र जांच की मांग पर अपना पक्ष रखना होगा. नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच का आदेश दे दिया है. कोर्ट ने फिलहाल संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है. जवाब मिलने के बाद अदालत मामले में आगे की सुनवाई करेगी और यह तय हो सकता है कि जांच किस एजेंसी से कराई जानी चाहिए.
परीक्षा रद्द करने की मांग नहीं
इस मामले में याचिका का एक अहम बिंदु यह है कि इसमें JPSC प्रारंभिक परीक्षा-2025 को सीधे रद्द करने की मांग नहीं की गई है. याचिका में परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच पर जोर दिया गया है. इसका मतलब है कि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के सामने परीक्षा रद्द करने का सवाल प्राथमिक मांग के तौर पर नहीं है. अदालत के सामने मुख्य मुद्दा यह है कि लगाए गए आरोपों की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने की जरूरत है या नहीं.
11वीं से 13वीं JPSC पर हाईकोर्ट से मिल चुकी है राहत
JPSC को लेकर इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट में भी मामला पहुंच चुका है. राज्य सरकार ने 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा और उससे हुई नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया था. इसके खिलाफ प्रभावित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया. पिछले सप्ताह हाईकोर्ट ने सरकार के इस फैसले पर रोक लगा दी. इससे इन परीक्षाओं के जरिए नियुक्त किए गए अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है. इस मामले में राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है. यानी 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा और नियुक्तियों का मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित है.
JPSC-JSSC भर्ती विवाद में आगे क्या होगा
झारखंड में JPSC और JSSC की कई भर्ती परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों की ओर से लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं. परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन भी हुआ है. राज्य सरकार ने कुछ परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था, जिसके बाद चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों ने भी कानूनी रास्ता अपनाया. अब JPSC प्रारंभिक परीक्षा-2025 से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद केंद्र और राज्य सरकार का जवाब महत्वपूर्ण होगा. कोर्ट के सामने यह तय होना बाकी है कि कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की जरूरत है या नहीं. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने न तो परीक्षा रद्द करने का आदेश दिया है और न ही CBI जांच के निर्देश दिए हैं. अगली सुनवाई में संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर मामले की दिशा स्पष्ट होगी.



