Davos: मुख्यमंत्री Hemant Soren के नेतृत्व में झारखंड ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी रणनीतिक क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया है. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के इंडिया पवेलियन में आयोजित एक उच्चस्तरीय वैश्विक राउंड टेबल बैठक के माध्यम से राज्य ने खुद को ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ के क्षेत्र में एक जिम्मेदार, दूरदर्शी और भविष्य के लिए तैयार केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया. यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब दुनिया ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और आपूर्ति श्रृंखलाओं की अस्थिरता जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है. झारखंड ने स्पष्ट संदेश दिया कि वह केवल खनिज संसाधनों का स्रोत नहीं, बल्कि मूल्य-सृजन, तकनीक और टिकाऊ औद्योगिक विकास का मजबूत केंद्र बनना चाहता है.
क्रिटिकल मिनरल्स पर झारखंड की दीर्घकालिक रणनीति
“Jharkhand’s Critical Minerals Opportunity: From Geology to Value Creation” विषय पर हुई इस बैठक में नीति-निर्माता, वैश्विक उद्योग जगत, निवेशक और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए. चर्चा का फोकस इस बात पर रहा कि खनिज-संपन्न क्षेत्र केवल उत्खनन तक सीमित न रहकर प्रसंस्करण, विनिर्माण और तकनीक आधारित उद्योगों का आधार कैसे बन सकते हैं. झारखंड के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में क्रिटिकल मिनरल्स अब सिर्फ औद्योगिक कच्चा माल नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक और आर्थिक सुरक्षा के अहम घटक बन चुके हैं. भारत सरकार द्वारा चिन्हित 24 में से 20 क्रिटिकल मिनरल्स की उपलब्धता झारखंड को ऊर्जा संक्रमण और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों के केंद्र में खड़ा करती है.
निवेश, मूल्य संवर्धन और विजन-2050
पूर्व केंद्रीय मंत्री और एवरसोर्स कैपिटल के चेयरमैन Jayant Sinha ने जोर देते हुए कहा कि खनिज-समृद्ध राज्यों को कच्चे संसाधनों के निर्यात से आगे बढ़कर स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन और औद्योगिक उपयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए. जियाडा के प्रबंध निदेशक वरुण रंजन ने मुख्यमंत्री के विजन-2050 के तहत झारखंड की औद्योगिक दिशा को रेखांकित किया. उन्होंने बताया कि राज्य अब उत्खनन आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर ईवी कंपोनेंट्स, बैटरी टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मटीरियल्स और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े उद्योगों का पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहा है, जिससे रोजगार और निवेश दोनों को बढ़ावा मिलेगा.
वैश्विक सहयोग और नीति स्पष्टता पर जोर
खनन निदेशक राहुल सिन्हा ने निवेशकों को झारखंड के साथ साझेदारी का आमंत्रण देते हुए पारदर्शी और निवेश-अनुकूल वातावरण की बात कही. वहीं University of Cambridge के विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए संसाधनों के साथ-साथ कौशल विकास, अनुसंधान सहयोग और संस्थागत मजबूती जरूरी है. बैठक में यूरोपीय प्रतिनिधियों और उद्योग समूहों ने ESG मानकों, आपूर्ति जोखिम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर विचार साझा किए. समापन सत्र में वित्त सचिव प्रशांत कुमार ने स्पष्ट और समयबद्ध नीतिगत ढांचे की आवश्यकता बताते हुए ब्राउनफील्ड खनन परियोजनाओं को झारखंड के लिए रणनीतिक अवसर करार दिया.

