अनिल अंबानी से जुड़े ठिकानों पर ED की छापेमारी, रिलायंस पावर से जुड़े मामलों की जांच तेज
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार सुबह उद्योगपति अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड से जुड़े कई कारोबारियों के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए छापेमारी की.

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार सुबह उद्योगपति अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड से जुड़े कई कारोबारियों के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए छापेमारी की. सूत्रों के अनुसार ईडी की करीब 15 विशेष टीमों ने मुंबई में 10 से 12 स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया. यह कार्रवाई रिलायंस पावर से जुड़े लोगों के आवासीय और कार्यालय परिसरों पर की जा रही है. दिलचस्प बात यह है कि छापेमारी की खबर के बावजूद शेयर बाजार में रिलायंस पावर के शेयर करीब 2 प्रतिशत उछलकर लगभग 23 रुपये पर पहुंच गए, जबकि रिलायंस इंफ्रा के शेयर 4 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 94.20 रुपये तक पहुंच गए.
सूत्रों के मुताबिक यह अभियान मुख्य रूप से मुंबई और हैदराबाद के कुछ स्थानों पर केंद्रित है. हालांकि जांच को प्रभावित होने से बचाने के लिए अधिकारियों ने छापेमारी के सटीक पते सार्वजनिक नहीं किए हैं. यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब कुछ दिन पहले ही ईडी ने मुंबई के पाली हिल इलाके में स्थित अनिल अंबानी के आलीशान घर ‘अबोड’ को अस्थायी रूप से अटैच किया था.
बताया जा रहा है कि यह छापेमारी कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच के तहत की जा रही है. एजेंसी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जांच रिलायंस पावर से जुड़े संदिग्ध फंड ट्रांसफर और वित्तीय लेन-देन पर केंद्रित है. गौरतलब है कि इससे पहले फरवरी 2026 में ईडी ने लगभग 40,000 करोड़ रुपये के रिलायंस कम्युनिकेशंस (आर-कॉम) बैंक फ्रॉड मामले की जांच के दौरान अनिल अंबानी के मुंबई स्थित आवास ‘अबोड’ को कुर्क किया था. उस समय इस संपत्ति की कीमत करीब 3,500 करोड़ रुपये आंकी गई थी.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिसंबर 2025 में प्रवर्तन निदेशालय ने अनिल अंबानी समूह की कंपनियों और यस बैंक द्वारा दिए गए ऋण से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर से भी पूछताछ की थी. राणा कपूर, जो उस समय बैंक के सीईओ थे, को मार्च 2021 में ईडी ने गिरफ्तार किया था. यह गिरफ्तारी डीएचएफएल को दिए गए भारी ऋण से जुड़े मामले में हुई थी. जांच एजेंसियों के अनुसार राणा कपूर और अनिल अंबानी के बीच कथित तौर पर ‘नुकसान के बदले फायदे’ यानी क्विड-प्रो-क्वो का समझौता हुआ था. आरोप है कि जब राणा कपूर यस बैंक के प्रमुख थे, तब 31 मार्च 2017 तक रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप पर बैंक का करीब 6,000 करोड़ रुपये का जोखिम था, जो 31 मार्च 2018 तक बढ़कर लगभग 13,000 करोड़ रुपये हो गया.
इसी दौरान बैंक ने एडीएजी समूह की कंपनियों रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया था. बाद में इन निवेशों का बड़ा हिस्सा गैर-निष्पादित निवेश (एनपीए) में बदल गया, जिससे बैंक को करीब 3,300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
अधिकारियों का कहना है कि ये लेन-देन सामान्य कारोबारी सौदे नहीं थे, बल्कि कथित तौर पर एक ऐसे समझौते का हिस्सा थे जिसमें यस बैंक के निवेश के बदले एडीएजी समूह की कंपनियों ने राणा कपूर के परिवार से जुड़ी कंपनियों को ऋण दिए. आरोप है कि इन सौदों को तय करने के लिए निजी बैठकों में चर्चा हुई और बाद में बैंक अधिकारियों को इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए.

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