केंद्र का बड़ा फंड रिलीज, झारखंड की पंचायतों को मिला ₹412.68 करोड़ का टाइड ग्रांट
केंद्र सरकार ने झारखंड की पंचायतों को ग्रामीण विकास के लिए ₹412.68 करोड़ का टाइड ग्रांट जारी किया है. फंड का उपयोग स्वच्छता और पेयजल सेवाओं में किया जाएगा, जिससे ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को सीधे लाभ मिलेगा और ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की गुणवत्ता सुधरेगी.


Ranchi: केंद्र सरकार ने झारखंड को ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ₹412.68 करोड़ की वित्तीय सहायता मंजूर की है. यह राशि 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत वर्ष 2024-25 की दूसरी किस्त के रूप में जारी की जा रही है. यह “टाइड ग्रांट” है, यानी इसका उपयोग केवल निर्धारित क्षेत्रों—स्वच्छता और पेयजल सेवाओं—में ही किया जा सकेगा. इस फैसले से राज्य की ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को सीधे लाभ मिलेगा. सरकार का फोकस ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की गुणवत्ता सुधारने पर है, खासकर साफ-सफाई और सुरक्षित पेयजल उपलब्धता पर. तय मानकों के अनुसार यह राशि पात्र स्थानीय निकायों को दी जाएगी, जिससे जमीनी स्तर पर सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
किसे मिलेगा लाभ और कैसे होगा वितरण
इस फंड का लाभ राज्य के अधिकतर ग्रामीण निकायों तक पहुंचेगा. हजारों ग्राम पंचायतों, सैकड़ों प्रखंड स्तरीय पंचायतों और सभी जिला परिषदों को इस अनुदान के दायरे में शामिल किया गया है. पात्रता के आधार पर ही राशि जारी की जाएगी, ताकि संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके. राशि के बंटवारे के लिए स्पष्ट मानदंड तय किए गए हैं. इसमें जनसंख्या और भौगोलिक क्षेत्र दोनों को आधार बनाया जाएगा. जहां राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें उपलब्ध होंगी, वहां उसी के अनुरूप वितरण होगा. अन्य मामलों में 90:10 के अनुपात (जनसंख्या बनाम क्षेत्रफल) को लागू किया जाएगा.
फंड ट्रांसफर के सख्त नियम, देरी पर ब्याज का प्रावधान
केंद्र ने राज्यों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए हैं कि यह राशि बिना किसी कटौती के स्थानीय निकायों तक पहुंचनी चाहिए. इसके लिए समय सीमा भी निर्धारित की गई है—फंड जारी होने के 10 कार्य दिवसों के भीतर पैसा संबंधित संस्थाओं के खातों में ट्रांसफर करना अनिवार्य होगा. अगर इस प्रक्रिया में देरी होती है, तो राज्य सरकार को ब्याज सहित भुगतान करना पड़ेगा. यह प्रावधान इसलिए जोड़ा गया है ताकि धन का प्रवाह समय पर हो और विकास कार्यों में कोई बाधा न आए.
स्वच्छता और पेयजल पर होगा फोकस
चूंकि यह टाइड ग्रांट है, इसलिए इसका उपयोग सीमित क्षेत्रों में ही किया जा सकता है. सरकार ने साफ किया है कि इस राशि का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था और पेयजल आपूर्ति को बेहतर बनाना है. आम तौर पर फंड का आधा हिस्सा साफ-सफाई से जुड़े कार्यों—जैसे कचरा प्रबंधन, ड्रेनेज और स्वच्छता ढांचे—पर खर्च किया जाएगा, जबकि बाकी हिस्सा पेयजल योजनाओं पर लगाया जाएगा. हालांकि स्थानीय जरूरतों के हिसाब से इसमें लचीलापन भी रखा गया है. कुल मिलाकर, यह सहायता झारखंड के ग्रामीण इलाकों में जीवन स्तर सुधारने और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.

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