राज्यसभा में उठा CIP रांची के विस्तार का मुद्दा, सांसद प्रदीप वर्मा ने राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करने की मांग की
“राज्यसभा में झारखंड के रांची स्थित केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान (CIP) को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करने की मांग उठी. सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने कहा कि 1918 में स्थापित CIP मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है.”

Parliament Session: राज्यसभा में शुक्रवार को झारखंड के रांची स्थित केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान (CIP) के विस्तार और इसे राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करने की मांग उठी. भाजपा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने शून्यकाल के दौरान केंद्र सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा कि 1918 में स्थापित CIP देश के सबसे पुराने मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल है. उन्होंने संस्थान को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने, वैधानिक स्वायत्तता देने और संसद के पृथक अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रीय महत्व का दर्जा देने की मांग की. इसके अलावा सदन में अधिवक्ता सुरक्षा कानून और OBC आरक्षण जैसे मुद्दे भी उठाए गए.
CIP रांची को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान बनाने की मांग
राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने कहा कि रांची स्थित केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान (CIP) देश के प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में से एक है. वर्ष 1918 में स्थापित यह संस्थान मानसिक रोगों के उपचार के साथ-साथ मनोचिकित्सा, नैदानिक मनोविज्ञान, नर्सिंग, पुनर्वास और शोध के क्षेत्र में लंबे समय से महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. उन्होंने सदन में कहा कि संस्थान में देशभर से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं, जिनमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की संख्या अधिक है. डॉ. वर्मा ने मांग की कि CIP को संसद के अलग कानून के माध्यम से राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया जाए, जिससे इसे बेहतर प्रशासनिक, वित्तीय और शैक्षणिक स्वतंत्रता मिल सके. उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती जरूरत को देखते हुए संस्थान का विस्तार समय की मांग है.
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर दिया जोर
डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने देश में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मजबूत संस्थानों का विकास जरूरी है. उन्होंने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की आवश्यकता बताई. उन्होंने कहा कि आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याएं समाज के विभिन्न वर्गों को प्रभावित कर रही हैं, इसलिए सुलभ और विशेषज्ञ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जाना चाहिए. सांसद ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने भी CIP रांची को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करने की सिफारिश की है. उन्होंने केंद्र सरकार से इस दिशा में जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया.
CIP की जमीन और आधारभूत संरचना को लेकर भी उठे सवाल
राज्यसभा में डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने CIP रांची और इससे जुड़े भूमि रिकॉर्ड का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने बताया कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार CIP रांची के पास लगभग 229.29 एकड़ और रांची तंत्रिका मनोचिकित्सा एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान के पास करीब 322.94 एकड़ भूमि उपलब्ध है. उन्होंने कहा कि पुराने भूमि अभिलेखों और वर्तमान रिकॉर्ड में अंतर दिखाई देता है, जिसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है. सांसद ने केंद्र सरकार से भूमि की स्थिति, स्वामित्व और वास्तविक उपयोग की समीक्षा कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि संस्थान को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा मिलने से न केवल इसकी आधारभूत संरचना मजबूत होगी बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान को भी बढ़ावा मिलेगा.



