इजरायल का दावा: ईरानी खुफिया प्रमुख इस्माइल खतीब मारे गए, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव
“मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान के खुफिया प्रमुख इस्माइल खतीब को तेहरान में किए गए एक टारगेटेड हवाई हमले में मार गिराया है. ”

मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान के खुफिया प्रमुख इस्माइल खतीब को तेहरान में किए गए एक टारगेटेड हवाई हमले में मार गिराया है. यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब बीते कुछ दिनों में ईरान के कई शीर्ष अधिकारियों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आ चुकी हैं. इजरायल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने कहा कि यह ऑपरेशन प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के निर्देश पर किया गया. हालांकि, ईरान की ओर से अभी तक इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संभावित बड़े टकराव की आशंका भी गहरा गई है.
तेहरान में टारगेटेड एयरस्ट्राइक का दावा
इजरायल के मुताबिक, यह हमला तेहरान में रात भर चलाए गए विशेष सैन्य अभियान का हिस्सा था, जिसमें उच्च स्तर के खुफिया इनपुट के आधार पर इस्माइल खतीब को निशाना बनाया गया. रक्षा मंत्री ने दावा किया कि यह एक सटीक और सीमित ऑपरेशन था, जिसका उद्देश्य ईरान के सुरक्षा तंत्र को कमजोर करना था. हालांकि, स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से इस हमले की पुष्टि नहीं हो सकी है. ईरानी अधिकारियों की चुप्पी ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है. विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह ईरान की खुफिया संरचना के लिए बड़ा झटका होगा.
अली लारीजानी समेत अन्य बड़े चेहरों को भी बनाया गया निशाना
इससे पहले भी इजरायल ने ईरान के वरिष्ठ नेताओं पर कार्रवाई का दावा किया था. इनमें Ali Larijani का नाम प्रमुख है, जिनके मारे जाने की खबरें सामने आई थीं. इसके अलावा बसीज फोर्स के प्रमुख गोलामरेजा सुलेमानी को भी निशाना बनाए जाने का दावा किया गया. लगातार हो रहे इन हमलों के दावों ने संकेत दिया है कि इजरायल ईरान के शीर्ष नेतृत्व और सुरक्षा ढांचे को व्यवस्थित तरीके से कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहा है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक सीमित ही रही है.
कौन हैं इस्माइल खतीब?
Ismail Khatib ईरान के खुफिया मंत्रालय के प्रमुख थे और देश की आंतरिक सुरक्षा तथा जासूसी तंत्र के सबसे अहम चेहरों में गिने जाते थे. वे एक शिया धर्मगुरु भी हैं और 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े रहे थे. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनका नाम कई विवादों में सामने आया था. अमेरिका ने 2022 में उन पर साइबर जासूसी और रैनसमवेयर नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप लगाते हुए प्रतिबंध लगाए थे. ऐसे में उनका नाम वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों के लिए पहले से ही संवेदनशील माना जाता था.
युद्ध का विस्तार और बढ़ता भू-राजनीतिक संकट
यह घटनाक्रम 28 फरवरी से शुरू हुई उस सैन्य कार्रवाई की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें इजरायल और उसके सहयोगियों ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया. इस पूरे संघर्ष में ईरान के कई बड़े नेताओं को नुकसान पहुंचने के दावे किए गए हैं, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं. ईरान ने इन हमलों के खिलाफ सख्त प्रतिक्रिया देते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है. क्षेत्र के अन्य देशों ने भी इस बढ़ते तनाव पर चिंता जताई है.
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और बढ़ती चिंता
इस घटनाक्रम पर वैश्विक स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं. कई देशों ने संयम बरतने की अपील की है, वहीं कुछ नेताओं ने इजरायल की कार्रवाई पर सवाल भी उठाए हैं. तुर्की के विदेश मंत्री ने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ बताया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच यह टकराव इसी तरह बढ़ता रहा, तो यह पूरे मिडिल ईस्ट को एक बड़े युद्ध की ओर धकेल सकता है. फिलहाल दुनिया की नजरें ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.


