साउथ पार्स हमले के बाद US-इजरायल रिश्तों में खटास? ट्रंप के बयान से हलचल
ईरान के South Pars गैस फील्ड पर हमले के बाद अमेरिका और इजरायल के रिश्तों में दरार की चर्चा तेज हो गई है. Donald Trump के बयान ने दोनों देशों के बीच मतभेदों और मिडिल ईस्ट तनाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है.


मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और इजरायल के रिश्तों में भी दरार की चर्चा तेज हो गई है. ईरान के रणनीतिक साउथ पार्स गैस फील्ड पर इजरायली हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ संकेत दिया कि इस कार्रवाई को उनकी मंजूरी नहीं थी. उनके बयान से यह संदेश गया कि वॉशिंगटन और तेल अवीव के बीच इस मुद्दे पर पूर्ण सहमति नहीं है. वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने मतभेदों को कमतर बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच समन्वय बना हुआ है. इस घटनाक्रम ने न सिर्फ क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और कूटनीतिक समीकरणों पर भी असर डालना शुरू कर दिया है.
साउथ पार्स हमले के बाद बढ़ा तनाव
ईरान का साउथ पार्स गैस फील्ड दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडारों में से एक माना जाता है. इस क्षेत्र पर हुए हमले को ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले के बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में सैन्य और आर्थिक तनाव बढ़ गया है. ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टकराव लंबा खिंचता है, तो इसका असर तेल और गैस की वैश्विक कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे भारत, चीन और यूरोप जैसे बड़े आयातक देशों की चिंता बढ़ना तय है.
ट्रंप का बयान: ‘मैंने ऐसा करने को नहीं कहा’
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस हमले को लेकर साफ कहा कि उन्होंने इजरायल को इस तरह की कार्रवाई से बचने की सलाह दी थी. उन्होंने संकेत दिया कि ईरान की प्रमुख ऊर्जा संपत्तियों को निशाना बनाना क्षेत्रीय संघर्ष को और भड़का सकता है. ओवल ऑफिस में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के बीच समन्वय तो है, लेकिन हर फैसले पर दोनों की सोच एक जैसी नहीं होती. उनका यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं का संकेत मिलता है.
नेतन्याहू ने मतभेदों को किया कमतर
वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इन मतभेदों की खबरों को खारिज करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि इजरायल ने अमेरिका की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई में संयम बरतने का फैसला किया है. नेतन्याहू ने यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग मजबूत है और किसी एक मुद्दे पर मतभेद को बड़े संकट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि सार्वजनिक रूप से इस तरह के बयान आना अपने आप में एक बड़ा संकेत है.
खाड़ी देशों और वैश्विक बाजार पर असर
इस घटनाक्रम के बाद खाड़ी देशों ने भी चिंता जताई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई देशों ने अमेरिका से अपील की है कि वह क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए इजरायल पर प्रभाव डाले. ऊर्जा बाजार में भी इसका असर दिखने लगा है, जहां तेल और गैस की कीमतों में अस्थिरता देखी जा रही है. अगर ईरान की जवाबी कार्रवाई तेज होती है, तो यह संकट और गहरा सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा.

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