भारत की पहली एंटी-टेरर पॉलिसी ‘प्रहार’ लागू, ड्रोन-डार्क वेब से आतंक पर सीधा वार, ये है सरकार का पूरा गेमप्लान
“भारत सरकार ने ‘प्रहार’ नाम से पहली राष्ट्रीय एंटी टेरर पॉलिसी जारी की है, जिसमें बदलते आतंकवादी खतरों—ड्रोन, डार्क वेब, क्रिप्टो फंडिंग और स्लीपर सेल—से निपटने के लिए व्यापक रणनीति बनाई गई है.”

भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति को औपचारिक और व्यापक रूप देते हुए गृह मंत्रालय के माध्यम से पहली राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति ‘प्रहार’ (PRAHAAR) जारी की है. यह नीति ऐसे समय लाई गई है जब आतंकवाद का स्वरूप तेजी से बदल रहा है—सीमा पार घुसपैठ से आगे बढ़कर अब खतरे ड्रोन, डार्क वेब, क्रिप्टोकरेंसी, एन्क्रिप्शन और सोशल मीडिया के जरिए फैल रहे हैं. 8 पन्नों की इस नीति में आतंकी हमलों की रोकथाम, खुफिया जानकारी पर आधारित कार्रवाई, एजेंसियों के बीच समन्वय और समाज की भागीदारी को मुख्य आधार बनाया गया है. इसमें स्पष्ट किया गया है कि आतंकवाद को किसी भी धर्म, जाति या विचारधारा के नाम पर जायज नहीं ठहराया जा सकता और भारत ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर कायम रहेगा. ‘प्रहार’ का लक्ष्य सिर्फ हमलों के बाद जवाब देना नहीं, बल्कि आतंकी नेटवर्क, फंडिंग और कट्टरपंथ के पूरे इकोसिस्टम को तोड़ना है.
क्यों जरूरी हुई ‘प्रहार’ पॉलिसी
भारत लंबे समय से सीमा पार प्रायोजित आतंकवाद का सामना करता रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में खतरे की प्रकृति बदली है. अब आतंकी संगठनों की रणनीति पारंपरिक हथियारों से आगे बढ़कर डिजिटल और तकनीकी साधनों पर केंद्रित हो गई है. ड्रोन के जरिए हथियार और विस्फोटक भेजना, सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलना और क्रिप्टो के जरिए फंडिंग जैसे तरीके सामने आए हैं. ऐसे में सरकार ने एक केंद्रीकृत, बहु-एजेंसी और इंटेलिजेंस-आधारित ढांचे की जरूरत महसूस की. ‘प्रहार’ इसी बदलते खतरे के जवाब में तैयार किया गया राष्ट्रीय फ्रेमवर्क है, जिसका उद्देश्य आतंकवाद की रोकथाम, त्वरित प्रतिक्रिया और दीर्घकालिक नियंत्रण है.
इंटरनेट, डार्क वेब और क्रिप्टो: आतंक का नया नेटवर्क
नीति में साफ कहा गया है कि आतंकी अब इंटरनेट को अपना सबसे बड़ा हथियार बना चुके हैं. भर्ती, प्रशिक्षण, प्रचार और फंडिंग—सभी काम अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए हो रहे हैं. इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर आतंकी नेटवर्क युवाओं तक पहुंच बना रहे हैं. वहीं डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड चैनल्स पर उनकी गतिविधियां छिपी रहती हैं, जिससे ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. क्रिप्टोकरेंसी के जरिए धन जुटाने और ट्रांसफर करने की प्रवृत्ति भी तेजी से बढ़ी है. ‘प्रहार’ के तहत इन डिजिटल माध्यमों की निगरानी, साइबर इंटेलिजेंस और तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है.
मल्टी-एजेंसी समन्वय और इंटेलिजेंस सिस्टम
नीति में बताया गया है कि आतंकवाद से निपटने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी है. इसके लिए मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) और जॉइंट टास्क फोर्स ऑन इंटेलिजेंस (JTFI) जैसे प्लेटफॉर्म्स की भूमिका को मजबूत किया जाएगा. ये संस्थाएं देशभर में रियल टाइम खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त ऑपरेशन चलाने में मदद करती हैं. ‘प्रहार’ इस बात पर जोर देता है कि आतंकी हमलों को रोकने के लिए समय पर सूचना, विश्लेषण और कार्रवाई का एकीकृत सिस्टम जरूरी है. इसमें केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच तालमेल को और अधिक मजबूत करने की दिशा तय की गई है.
CBRNED, ड्रोन और स्लीपर सेल: नए युग के खतरे
‘प्रहार’ में CBRNED—यानी केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, एक्सप्लोसिव और डिजिटल—खतरों का विशेष उल्लेख किया गया है. सरकार का मानना है कि आतंकी संगठन अब बड़े पैमाने पर तबाही मचाने वाले साधनों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इसके अलावा ड्रोन के जरिए हथियार, ड्रग्स और विस्फोटक की तस्करी को भी गंभीर खतरे के रूप में चिन्हित किया गया है. नीति में कहा गया है कि वैश्विक आतंकी संगठन जैसे अल-कायदा और ISIS भारत में स्लीपर सेल और स्थानीय नेटवर्क के जरिए अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए खुफिया, तकनीकी और जमीनी स्तर पर संयुक्त कार्रवाई की रणनीति अपनाई जाएगी.
कट्टरपंथ और फंडिंग नेटवर्क पर डबल स्ट्राइक
आतंकवाद की जड़ों में कट्टरपंथ और वित्तीय नेटवर्क को सबसे बड़ा कारक माना गया है. ‘प्रहार’ में साफ कहा गया है कि केवल हथियारों से लड़ाई जीतना संभव नहीं है, बल्कि विचारधारा के स्तर पर भी मुकाबला करना होगा. इसके लिए समाज, एनजीओ और उदारवादी समूहों की भागीदारी से युवाओं को भटकने से रोकने की योजना है. साथ ही ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) नेटवर्क और आतंकी फंडिंग चैनलों को खत्म करने के लिए सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. बैंकिंग, हवाला और क्रिप्टो जैसे माध्यमों की निगरानी बढ़ाई जाएगी ताकि आतंक के आर्थिक स्रोतों को पूरी तरह खत्म किया जा सके.
सुरक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव
‘प्रहार’ नीति भारत की सुरक्षा रणनीति में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है. यह केवल सुरक्षा बलों की कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे समाज, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को साथ लेकर चलने वाली व्यापक योजना है. बदलते समय के साथ आतंकवाद के नए चेहरों को पहचानते हुए यह नीति रोकथाम, प्रतिक्रिया और पुनर्वास—तीनों स्तरों पर काम करने की दिशा तय करती है. भारत का संदेश स्पष्ट है—आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और हर मोर्चे पर निर्णायक जवाब.



