RIMS से हटेंगे होमगार्ड के जवान, अब SAF के हाथ कमान, डायरेक्टर के एक्सटेंशन पर भी मुहर... GB की बैठक में 16 प्रस्तावों को मंजूरी
रांची के RIMS की 66वीं गवर्निंग बॉडी की बैठक में 16 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. संस्थान के विकास के लिए 466 करोड़ रुपये की पुनर्विकास योजना, MBBS और PG सीटें बढ़ाने, 10 नए सुपर स्पेशियलिटी विभाग खोलने और वेंटिलेटर की संख्या 25 करने की योजना है.

Ranchi: राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) की गवर्निंग बॉडी (GB) की 66वीं बैठक में संस्थान के विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई अहम फैसले लिए गए. बैठक में कुल 16 प्रस्तावों पर मुहर लगी. फैकल्टी और नॉन-टीचिंग पदों के पुनर्गठन, मेडिकल शिक्षा के विस्तार, नए रेगुलेशन-2026, अस्पताल की आधारभूत संरचना के विकास और मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया. वहीं, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कैंसर की दवाओं की महंगी कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि रिम्स की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना सरकार का मुख्य उद्देश्य है. उन्होंने निर्देश दिया कि गवर्निंग बॉडी की बैठक में लिए गए फैसलों को अगली बैठक तक लागू किया जाए, ताकि निर्णयों का लाभ मरीजों को मिल सके.
25 साल बाद रिम्स में फैकल्टी और पदों का व्यापक पुनर्गठन
स्वास्थ्य विभाग के सचिव ने बताया कि रिम्स में वर्ष 2002 में स्थापना के बाद से फैकल्टी और विभागों की संरचना में इस तरह का व्यापक पुनर्गठन नहीं हुआ था. अब संस्थान की जरूरतों को देखते हुए फैकल्टी के स्वीकृत 319 पदों का पुनर्गठन किया जाएगा. इसके अलावा 16 नए पद सृजित किए जाएंगे. इस तरह फैकल्टी के कुल पदों की संख्या 335 हो जाएगी. इस पुनर्गठन का उद्देश्य मेडिकल शिक्षा और अस्पताल की सेवाओं के विस्तार के लिए आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराना है. इसके तहत MBBS की सीटें बढ़ाकर 250 करने, PG की सीटों में 100 की वृद्धि करने और सुपर स्पेशियलिटी में सीटों का विस्तार करने की योजना है. सचिव के मुताबिक, सुपर स्पेशियलिटी के 10 नए विभाग खोलने की योजना है. इसके साथ ही सुपर स्पेशियलिटी की सीटों की संख्या मौजूदा 11 से बढ़ाकर 150 करने का प्रस्ताव है.
नॉन-टीचिंग पदों में भी बदलाव
रिम्स में नॉन-टीचिंग कर्मचारियों के पदों का भी पुनर्गठन किया जाएगा. इसके तहत ऐसे पदों को कम करने की योजना है, जिनकी वर्तमान में आवश्यकता सीमित है, जबकि अस्पताल की जरूरतों के अनुसार नए पदों को प्राथमिकता दी जाएगी. लैब टेक्नीशियन, आईटी से जुड़े कर्मचारी और हॉस्पिटल मैनेजर जैसे पदों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. उद्देश्य अस्पताल की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना और मरीजों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है.
रेगुलेशन-2014 की जगह आएगा नया रेगुलेशन-2026
रिम्स की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पुराने रेगुलेशन-2014 की जगह नया रेगुलेशन-2026 तैयार किया जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग के सचिव ने बताया कि पुराने नियमों में समय के साथ जरूरी बदलाव नहीं हो सके थे. इसलिए संस्थान की वर्तमान जरूरतों के अनुसार नए नियमों का प्रारूप तैयार किया गया है. नई व्यवस्था के तहत स्थायी समितियों की संख्या पांच से बढ़ाकर 10 करने का फैसला लिया गया है. अस्पताल के संचालन को बेहतर बनाने के लिए मेडिकल सुपरिटेंडेंट (MS) के अधीन डिप्टी सुपरिटेंडेंट के पदों की व्यवस्था भी की जाएगी.
डॉक्टरों के प्रमोशन में मरीजों के इलाज और पढ़ाई को भी मिलेगी प्राथमिकता
रिम्स में डॉक्टरों के प्रमोशन की प्रक्रिया में भी बदलाव प्रस्तावित है. अब तक प्रमोशन में रिसर्च पेपर को प्रमुख आधार माना जाता था, लेकिन नए रेगुलेशन में मेडिकल शिक्षा और मरीजों के इलाज में योगदान को भी महत्व दिया जाएगा. PG विद्यार्थियों को गाइड करने वाले शिक्षकों को प्रमोशन में अंक दिए जाएंगे. सुपर स्पेशियलिटी के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने वाले फैकल्टी सदस्यों को भी प्राथमिकता मिलेगी. इसके अलावा अस्पताल में मरीजों का इलाज करने, अधिक मेडिकल प्रक्रियाएं पूरी करने और क्लिनिकल सेवाओं में योगदान देने वाले डॉक्टरों के कार्यों को भी प्रमोशन के मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा. सचिव के अनुसार, इस बदलाव का उद्देश्य रिसर्च के साथ-साथ मरीजों के इलाज और मेडिकल विद्यार्थियों के प्रशिक्षण को भी प्रोत्साहित करना है.
466 करोड़ रुपये से बदलेगी रिम्स कैंपस की सूरत
बैठक में रिम्स के पूरे कैंपस के पुनर्विकास के लिए 466 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट को मंजूरी दी गई. इस योजना के तहत अस्पताल की इमारतों, शैक्षणिक भवनों और आवासीय परिसरों का नवीनीकरण किया जाएगा. इसके अलावा नए शैक्षणिक भवन के निर्माण की योजना भी शामिल है. स्वास्थ्य विभाग के सचिव ने बताया कि परियोजना को केंद्र प्रायोजित योजना के माध्यम से आगे बढ़ाने की तैयारी है. मेडिकल सीटों में वृद्धि के आधार पर केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि मेडिकल सीटें बढ़ने के साथ संस्थान में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार भी जरूरी है. इसी को ध्यान में रखते हुए पूरे कैंपस के कायाकल्प की योजना बनाई गई है.
नए हॉस्टल बनाए जाएंगे, PPP मॉडल पर होगा काम
मेडिकल सीटों में वृद्धि के बाद विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल की जरूरत भी बढ़ेगी. इसे देखते हुए नए हॉस्टल बनाने की योजना बनाई गई है. इसके लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल अपनाने पर विचार किया गया है. सचिव के मुताबिक, निजी भागीदार हॉस्टल का निर्माण और संचालन कर सकते हैं. विद्यार्थियों को निर्धारित शुल्क के बदले बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है. पुराने डीआईजी ग्राउंड में स्टेडियम के साथ नए हॉस्टल बनाने की योजना भी बताई गई. इन सुविधाओं से PG विद्यार्थियों, सीनियर रेजिडेंट और सुपर स्पेशियलिटी के विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है.
वेंटिलेटर, बर्न वार्ड और जांच सुविधाओं का होगा विस्तार
रिम्स में मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए कई अन्य फैसले भी लिए गए हैं. बर्न वार्ड को बेहतर ढंग से स्थापित करने पर जोर दिया गया है. इसके अलावा वेंटिलेटर की संख्या बढ़ाकर 25 करने और अल्ट्रासाउंड मशीनों की संख्या बढ़ाने की योजना है. अस्पताल में नर्सों और हॉस्पिटल मैनेजर की बहाली की जाएगी. वहीं, आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों की सहायता के लिए 100 आयुष्मान मित्रों की नियुक्ति की योजना है. बैठक में वित्तीय प्रबंधन का मुद्दा भी उठा. जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 के लगभग 240 करोड़ रुपये अब तक खर्च नहीं हो सके हैं. ऐसे में उपलब्ध राशि का बेहतर उपयोग कर स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना भी संस्थान के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती है.
रिम्स की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव, SAF संभालेगी जिम्मेदारी
रिम्स की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने सख्त रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि सुरक्षा की जिम्मेदारी SAF को सौंपी जाएगी और होमगार्ड जवानों को धीरे-धीरे हटाया जाएगा. इस बदलाव का उद्देश्य अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है. हालांकि, नई व्यवस्था लागू करने की समयसीमा और इसके संचालन से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है.
स्थायी निदेशक की नियुक्ति तक DK सिंह संभालेंगे जिम्मेदारी
रिम्स के निदेशक के कार्यकाल विस्तार को लेकर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जब तक स्थायी निदेशक की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक DK सिंह जिम्मेदारी संभालेंगे. उनके कार्यकाल विस्तार से संबंधित प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा जाएगा.
कैंसर की महंगी दवाओं पर इरफान अंसारी ने केंद्र सरकार को घेरा
रिम्स की बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कैंसर की दवाओं की कीमतों को लेकर भी अपनी बात रखी. उन्होंने स्वीकार किया कि कैंसर की दवाएं महंगी मिल रही हैं. मंत्री ने कहा कि दवाओं की कीमतें तय करने में केंद्र सरकार की भूमिका है और इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को जिम्मेदारी लेनी चाहिए. कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में मरीजों और उनके परिजनों को पहले से ही आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. महंगी दवाओं के कारण इलाज का खर्च और बढ़ जाता है. ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री के बयान ने कैंसर की दवाओं की कीमतों और उनकी उपलब्धता को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है. हालांकि, दवाओं की कीमतों का निर्धारण उनकी श्रेणी और लागू नियामकीय प्रावधानों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है.
रिम्स के लिए अहम साबित हो सकते हैं फैसले
रिम्स की 66वीं गवर्निंग बॉडी की बैठक में लिए गए फैसलों का उद्देश्य संस्थान की शैक्षणिक क्षमता बढ़ाने, अस्पताल प्रबंधन को मजबूत करने और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का है. फैकल्टी के पदों का पुनर्गठन, नए रेगुलेशन-2026, सुपर स्पेशियलिटी के विस्तार और 466 करोड़ रुपये की पुनर्विकास योजना से रिम्स में बड़े बदलाव की रूपरेखा तैयार की गई है. हालांकि, इन योजनाओं का वास्तविक लाभ मरीजों और विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए समयबद्ध क्रियान्वयन, नियुक्तियों और निर्माण कार्यों को पूरा करना जरूरी होगा.


