असुंता लकड़ा के समर्थन में पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी प्रमोद बटलाव, खेल मंत्री को लिखा पत्र, भोलानाथ सिंह को हटाने की मांग
पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी प्रमोद बटलाव ने खेल मंत्री और SAI महानिदेशक को पत्र लिखकर हॉकी इंडिया की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने महासचिव भोलानाथ सिंह को हटाने, नए चुनाव कराने और हॉकी प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है.

नई दिल्ली. भारतीय हॉकी में चल रहे विवाद के बीच अब पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी और 1978 एशियाई खेलों के रजत पदक विजेता प्रमोद बटलाव खुलकर मैदान में उतर आए हैं. उन्होंने केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के महानिदेशक हरि रंजन राव को पत्र लिखकर हॉकी इंडिया की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. साथ ही हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह को तत्काल पद से हटाने या उनका इस्तीफा लेने की मांग की है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पूर्व भारतीय महिला हॉकी कप्तान असुंता लकड़ा और भोलानाथ सिंह के बीच विवाद पहले से ही सुर्खियों में है.
पत्र में क्या लिखा?
पत्र में प्रमोद बटलाव ने लिखा है कि भारतीय हॉकी "गलत हाथों में" चली गई है और खेल का लगातार नुकसान हो रहा है.
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य हॉकी संघों और हॉकी इंडिया में कई महत्वपूर्ण पदों पर ऐसे लोग बैठे हैं जो स्वयं हॉकी खिलाड़ी नहीं रहे हैं और खेल की बुनियादी समझ तक नहीं रखते.
पत्र में कहा गया है कि:
* अधिकांश राज्य सचिव चुनाव से नहीं बल्कि नामांकन के जरिए बने हैं.
* वर्तमान व्यवस्था भारतीय हॉकी को कमजोर कर रही है.
* विश्व हॉकी में भारत की छवि प्रभावित हो रही है.
* मौजूदा विश्व रैंकिंग भी प्रशासनिक विफलता का परिणाम है.
* राज्यों और हॉकी इंडिया में नए सिरे से चुनाव कराए जाने चाहिए.
* केवल पूर्व हॉकी खिलाड़ियों को ही चुनाव लड़ने की अनुमति मिलनी चाहिए. उनके अनुसार उम्मीदवार कम से कम राष्ट्रीय खेलों की शीर्ष चार टीमों का हिस्सा रहा हो या ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी स्तर पर खेल चुका हो.

भोलानाथ सिंह पर लगाए गंभीर आरोप
अपने दूसरे पत्र में प्रमोद बटलाव ने सीधे तौर पर हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह पर निशाना साधा है.
उन्होंने लिखा कि पूर्व भारतीय महिला कप्तान असुंता लकड़ा के साथ कथित दुर्व्यवहार केवल एक खिलाड़ी का अपमान नहीं बल्कि पूरे हॉकी समुदाय का अपमान है.
पत्र में मांग की गई है कि:
* भोलानाथ सिंह से तत्काल इस्तीफा लिया जाए या उन्हें पद से हटाया जाए.
* यदि ऐसा नहीं होता है तो भारतीय हॉकी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होंगे.
* भारत जब ओलंपिक मेजबानी की दावेदारी कर रहा है तब ऐसे विवाद देश की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं.
प्रमोद बटलाव ने यह भी लिखा कि किसी गैर-हॉकी खिलाड़ी को इतने महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पर बैठाना खेल के हित में नहीं है.

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश का भी किया जिक्र
पत्र में प्रमोद बटलाव ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस मामले का भी उल्लेख किया है जिसमें भोलानाथ सिंह के खिलाफ न्यायालय की अवमानना का मुद्दा उठा था. उन्होंने दावा किया कि यह पहली बार नहीं है जब उनके कामकाज पर सवाल उठे हैं और इसे दोहराव वाली प्रवृत्ति बताया है.
असुंता लकड़ा विवाद क्या है?
हाल के दिनों में पूर्व भारतीय महिला हॉकी कप्तान और हॉकी इंडिया की कार्यकारी बोर्ड सदस्य असुंता लकड़ा ने महासचिव भोलानाथ सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे. शिकायत में कथित धमकी, उत्पीड़न और प्रताड़ना जैसे आरोप शामिल किए गए थे. इसके बाद खेल मंत्रालय ने हॉकी इंडिया को मामले की स्वतंत्र जांच कराने और इसे आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के समक्ष रखने का निर्देश दिया था. दूसरी ओर हॉकी इंडिया की एथिक्स कमेटी ने भी असुंता लकड़ा से जुड़े मामलों में अलग जांच प्रक्रिया शुरू की है.
खिलाड़ियों से एकजुट होने की अपील
पत्र साझा करते हुए प्रमोद बटलाव ने देशभर के वर्तमान और पूर्व हॉकी खिलाड़ियों से अपील की है कि वे हॉकी के हित में आवाज उठाएं.
उन्होंने कहा कि यदि किसी शहर, राज्य या हॉकी संगठन में खेल के साथ गलत हो रहा है तो खिलाड़ियों को चुप नहीं रहना चाहिए. उन्होंने खिलाड़ियों से एक समूह के माध्यम से जुड़कर हॉकी प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करने का आह्वान किया है.
विवाद क्यों बढ़ रहा है?
भारतीय हॉकी में पिछले कुछ सप्ताह से प्रशासनिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है. एक ओर असुंता लकड़ा की शिकायत पर खेल मंत्रालय ने जांच के निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर भोलानाथ सिंह हॉकी झारखंड के अध्यक्ष पद पर लगातार चौथे कार्यकाल के लिए चुने जाने को लेकर भी चर्चा में रहे हैं. ऐसे में अब पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का खुलकर सामने आना इस विवाद को नया राजनीतिक और खेल प्रशासनिक आयाम दे सकता है.

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