JPSC-JSSC Protest: छात्रों पर दर्ज FIR रद्द होगी, लेकिन पहले होगी पहचान, राजेश कच्छप का बड़ा बयान
झारखंड में JPSC-JSSC आंदोलन के दौरान करीब एक हजार छात्रों पर दर्ज FIR को लेकर सियासत तेज है. कांग्रेस विधायक राजेश कच्छप ने कहा कि वास्तविक छात्रों पर दर्ज FIR निश्चित तौर पर रद्द होगी, लेकिन पहले आंदोलन में शामिल लोगों की पहचान की जाएगी.

Ranchi: झारखंड में JPSC-JSSC आंदोलन के दौरान करीब एक हजार छात्रों पर दर्ज FIR को लेकर सियासत तेज हो गई है. छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग को लेकर भाजपा ने राज्य के छह जिलों में SP और DC कार्यालयों के घेराव का कार्यक्रम आयोजित किया. रांची में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया. इसी बीच कांग्रेस विधायक राजेश कच्छप ने FIR और भाजपा के आंदोलन को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि वास्तविक छात्रों पर दर्ज FIR निश्चित तौर पर रद्द की जाएगी, लेकिन इससे पहले आंदोलन में शामिल लोगों की पहचान की जाएगी. विधायक ने भाजपा पर CID जांच को प्रभावित करने और कथित कोचिंग माफियाओं को बचाने का आरोप भी लगाया. उनके बयान के बाद JPSC-JSSC विवाद को लेकर झारखंड की सियासत और गरमा गई है.
छह जिलों में भाजपा का SP और DC कार्यालय घेराव
JPSC-JSSC आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज FIR के विरोध में भाजपा ने झारखंड के छह जिलों में SP और DC कार्यालयों के घेराव का कार्यक्रम आयोजित किया. पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि आंदोलन से जुड़े छात्रों के खिलाफ बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज किए गए हैं और उन्हें परेशान किया जा रहा है. राजधानी रांची में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने घेराव कार्यक्रम का नेतृत्व किया. प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने छात्रों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने और परीक्षा से जुड़े मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग उठाई. भाजपा का कहना है कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी शिकायतों और आरोपों की जांच की जानी चाहिए. इस प्रदर्शन के बीच कांग्रेस विधायक राजेश कच्छप की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने भाजपा के आंदोलन पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूरे मामले की जांच चल रही है और जांच को किसी राजनीतिक दबाव में प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए.
BJP पर राजेश कच्छप का पलटवार, CID जांच को लेकर लगाए आरोप
कांग्रेस विधायक राजेश कच्छप ने भाजपा के प्रदर्शन और छात्रों पर दर्ज FIR के मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा CID की जांच से घबरा गई है और कुछ कथित कोचिंग माफियाओं को बचाने के लिए जांच को दूसरी दिशा में ले जाने की कोशिश कर रही है. राजेश कच्छप के मुताबिक, भाजपा चाहती है कि JPSC-JSSC मामले की CID जांच को CBI को सौंप दिया जाए. उन्होंने दावा किया कि ऐसा करने की मांग के पीछे कथित तौर पर कुछ लोगों को जांच के दायरे से बाहर रखने की कोशिश हो सकती है. हालांकि, ये आरोप राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं और इन पर भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है. विधायक ने कहा कि मामले में जांच एजेंसी को अपना काम करने देना चाहिए, ताकि परीक्षा से जुड़े आरोपों और आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सके.
‘छात्रों पर दर्ज FIR निश्चित तौर पर कैंसिल करेंगे’
छात्रों पर दर्ज FIR को लेकर राजेश कच्छप ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि वास्तविक छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को निश्चित तौर पर कैंसिल किया जाएगा. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि FIR रद्द करने से पहले आंदोलन में शामिल लोगों की पहचान की जाएगी. विधायक के अनुसार, जांच के दौरान यह फिल्टर किया जाएगा कि आंदोलन में वास्तव में कौन छात्र शामिल थे और कौन लोग बाहरी तौर पर प्रदर्शन का हिस्सा बने थे. जो लोग वास्तविक छात्र पाए जाएंगे, उनके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की बात उन्होंने कही है. वहीं, अगर जांच में कोई बाहरी व्यक्ति आंदोलन में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द नहीं किया जाएगा. इस तरह सरकार की ओर से FIR वापस लेने की प्रक्रिया में पहचान और जांच को आधार बनाए जाने की बात सामने आई है. विधायक के बयान से अब छात्रों पर दर्ज मुकदमों को लेकर आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है.
बाहरी लोगों पर FIR जारी रखने की बात
राजेश कच्छप ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि सभी FIR को एक साथ रद्द करने की प्रक्रिया नहीं होगी. पहले यह पता लगाया जाएगा कि आंदोलन के दौरान कौन लोग वास्तव में छात्र के तौर पर शामिल थे और किन लोगों की भूमिका बाहरी व्यक्ति के रूप में रही. उनके मुताबिक, वास्तविक छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को रद्द किया जाएगा, जबकि बाहरी लोगों के खिलाफ दर्ज FIR जारी रह सकती है. इस बयान के बाद छात्रों और आंदोलन से जुड़े लोगों के बीच भी इस प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो सकती है. JPSC-JSSC आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों की संख्या और उसमें शामिल लोगों की पहचान अब इस पूरे विवाद का अहम मुद्दा बन गई है. वहीं, भाजपा लगातार छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग कर रही है. दूसरी तरफ सत्तारूढ़ पक्ष जांच पूरी होने के बाद ही यह तय करने की बात कर रहा है कि किन लोगों पर दर्ज FIR वापस ली जाएगी और किन पर कार्रवाई जारी रहेगी.

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