आर्थिक सर्वेक्षण 2026: भारत की GDP 7% तक पहुंची, घरेलू मांग मजबूत
आर्थिक सर्वेक्षण 2026 संसद में पेश किया गया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने GDP ग्रोथ 7% और राजकोषीय घाटा 4.8% बताया. कृषि में MSP, DBT और फसल बीमा पर जोर, MSME क्रेडिट की सुलभता, और डिजिटल व भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को हाईलाइट किया गया.

New Delhi: आर्थिक सर्वेक्षण 2026 संसद में पेश किया गया और इस बार इसकी खास बातें देश की आर्थिक स्थिति, विकास दर, कृषि, डिजिटल और बुनियादी ढांचा से लेकर रोजगार तक फैली हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे लोकसभा में पेश करते हुए बताया कि भारत की आर्थिक वृद्धि अब 7% के स्तर पर है, जिसे “न्यू नॉर्मल” माना जा रहा है. इस सर्वे में पिछले साल की प्रमुख उपलब्धियों, फिस्कल सुधारों, निर्यात, वैश्विक व्यापार चुनौतियों और नई तकनीक जैसे AI पर विशेष ध्यान दिया गया है. MSME और कृषि क्षेत्र की मजबूती, डिजिटल इंडिया पहल, और बुनियादी ढांचे में निवेश से देश की आर्थिक गतिविधियों को गति मिली है. बजट सत्र से पहले पेश होने वाला यह सर्वे सांसदों और नीति निर्माताओं को आर्थिक निर्णय लेने में मार्गदर्शन देता है.
देश की आर्थिक वृद्धि और GDP प्रदर्शन
आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया कि FY26 में भारत की संभावित विकास दर 7% तक पहुंच गई है. पिछले वर्षों की तुलना में यह एक मजबूत और स्थिर वृद्धि को दर्शाता है. घरेलू मांग मजबूत बनी रही और बुनियादी ढांचे में निवेश से रोजगार और आय के अवसर बढ़े. राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए राजकोषीय घाटा GDP के 4.8% के भीतर रखा गया. बैंकिंग और कॉर्पोरेट सेक्टर की बैलेंस शीट मजबूत होने से निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं. वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिकी टैरिफ के बावजूद निर्यात और विनिर्माण में ग्रोथ बनी रही. आगामी वित्त वर्ष में घरेलू मांग और निवेश में मजबूती बनी रहने की उम्मीद जताई गई है.
कृषि और ग्रामीण विकास पर जोर
आर्थिक सर्वे में कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है. MSP, DBT और फसल बीमा योजनाओं से किसानों की आय बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और निवेश बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार किया गया. MSME सेक्टर के लिए क्रेडिट की उपलब्धता बढ़ाई गई, जिससे छोटे उद्योग उत्पादन बढ़ा सकें. FY27 में घरेलू मांग और निवेश में मजबूती की उम्मीद जताई गई है. सरकार ने राज्यों को सलाह दी कि वे कैश ट्रांसफर की बजाय पूंजीगत व्यय (Capex) को प्राथमिकता दें, ताकि निजी निवेश बढ़े और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आए.
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और नई तकनीक
सर्वेक्षण में डिजिटल इंडिया और AI पर विशेष ध्यान दिया गया. AI के प्रभाव और रोजगार पर इसके परिणामों का अध्ययन पहली बार शामिल किया गया. डिजिटल और फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ा है, जिससे आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई. सरकार ने स्वदेशी निर्माण पर जोर दिया और निर्माण लागत घटाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नीतियां बनाने का संकेत दिया. नियमों और अनुपालन को सरल बनाने से व्यापारिक प्रक्रियाओं में सुधार हुआ है. नई तकनीक और डिजिटल उपायों से निर्यात बढ़ाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की रणनीति बनाई गई.
व्यापार और अंतरराष्ट्रीय समझौते
सर्वेक्षण में भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (EU FTA) का जिक्र किया गया. इससे भारतीय उत्पादकों और MSME को नए बाजारों में अवसर मिलेंगे. अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते पर इस साल मोहर लगने की उम्मीद है. आर्थिक सर्वे में वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद निर्यात बढ़ाने और तकनीकी उत्पादों पर जोर देने की रणनीति पेश की गई है.
GST, वित्तीय सुधार और पूंजीगत निवेश
सर्वेक्षण में बताया गया कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद वित्तीय सुधार और GST rationalisation लागू किया गया. डिरेगुलेशन और नियमों का सरलीकरण व्यापार को आसान बना रहा है. पूंजीगत व्यय GDP के 4% तक पहुंचा है. सड़क, रेलवे और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति मिली. राजकोषीय अनुशासन बनाए रखा गया और FY27 में घरेलू मांग और निवेश में मजबूती बनी रहने की संभावना जताई गई है.
प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ का जिक्र किया और सरकार की पहचान सुधार, क्रियान्वयन और परिवर्तन बताई. उन्होंने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत ने आर्थिक विकास को बनाए रखा है. EU और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते अवसर पैदा करेंगे और युवा, MSME और निर्माता इसका लाभ उठाकर उत्पादन और रोजगार बढ़ा सकते हैं.

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