देवेंद्र नाथ महतो ने IIIT छात्रों के आंदोलन में कर दिया खेल, बातचीत छोड़कर चले गए प्रबंधन के लोग!
IIIT रांची में छात्र आदित्य कुमार की मौत के बाद जारी आंदोलन में JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो के पहुंचने से विवाद बढ़ गया. छात्रों और प्रबंधन के बीच करीब 90% मांगों पर सहमति बनने की चर्चा के बीच बातचीत प्रभावित होने का आरोप लगा.

Ranchi: ट्रिपल आईटी रांची में छात्र आदित्य कुमार की मौत के बाद तीन दिनों से जारी आंदोलन में मंगलवार को नया मोड़ आ गया. छात्रों का आंदोलन संस्थान के निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव को हटाने और प्रबंधन की जवाबदेही तय करने की मांग पर केंद्रित था. इसी बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के पहुंचने से बातचीत का माहौल बिगड़ने का आरोप लगा है. आंदोलनकारी छात्रों और प्रबंधन के बीच करीब 90 प्रतिशत मांगों पर सहमति बनने की बात सामने आई थी. लेकिन देवेंद्र नाथ महतो के पहुंचने के बाद प्रबंधन के प्रतिनिधि बातचीत बीच में छोड़कर चले गए. इसके बाद पुलिस की मौजूदगी, थाना प्रभारी के साथ तीखी नोकझोंक और राजनीतिक बयानबाजी ने पूरे घटनाक्रम को नया रंग दे दिया. अब सवाल यह है कि छात्रों की मांगों पर चल रही बातचीत को इस घटनाक्रम से कितना नुकसान पहुंचा और क्या आंदोलन का मूल मुद्दा पीछे छूट जाएगा?
प्रबंधन से बातचीत के बीच पहुंचे देवेंद्र नाथ महतो
खेलगांव स्थित ट्रिपल आईटी परिसर में मंगलवार सुबह आंदोलनकारी छात्रों और संस्थान प्रबंधन के बीच बातचीत चल रही थी. छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रबंधन के सामने पक्ष रख रहे थे. इसी दौरान देवेंद्र नाथ महतो मौके पर पहुंच गए. आरोप है कि देवेंद्र नाथ महतो को देखकर प्रबंधन के प्रतिनिधि बातचीत अधूरी छोड़कर वहां से चले गए. इसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया. देवेंद्र नाथ महतो ने छात्रों के बीच खड़े होकर प्रबंधन पर सवाल उठाए और कहा कि आदिवासी बच्चों के साथ अन्याय हो रहा है. उन्होंने शैक्षणिक दबाव का मुद्दा उठाते हुए कहा कि छात्र को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा. हालांकि, छात्र आदित्य कुमार की मौत के पीछे शैक्षणिक दबाव ही कारण था या कोई अन्य परिस्थिति, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच से ही हो सकेगी.
90 प्रतिशत मांगें मानने की बात, फिर क्यों बिगड़ी बातचीत?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बातचीत का टूटना है. आंदोलनकारी छात्रों के बीच यह चर्चा थी कि प्रबंधन के साथ बातचीत में लगभग 90 प्रतिशत मांगों पर सहमति बन गई थी. ऐसे में छात्र चाहते थे कि बाकी मुद्दों का समाधान भी बातचीत से निकले. लेकिन देवेंद्र नाथ महतो के पहुंचने के बाद प्रबंधन के प्रतिनिधियों के चले जाने से बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी. कुछ आंदोलनकारी छात्र इससे नाराज बताए गए. उनका कहना था कि वे अपने स्तर पर प्रबंधन से बात कर रहे थे और समाधान के करीब पहुंचने की उम्मीद थी. छात्रों की नाराजगी का केंद्र यह था कि उनका आंदोलन संस्थान की व्यवस्था और निदेशक की जवाबदेही को लेकर है. वे इसे राजनीतिक विवाद में बदलना नहीं चाहते थे. ऐसे में बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप से बातचीत प्रभावित होने की आशंका ने आंदोलन के भीतर भी असहज स्थिति पैदा कर दी.
थाना प्रभारी से भिड़े देवेंद्र नाथ महतो, पुलिस बल बुलाया गया
देवेंद्र नाथ महतो के पहुंचने की सूचना मिलने के बाद मौके पर पुलिस बल भी बुलाया गया. खेलगांव थाना की पुलिस वहां पहुंची. इस दौरान देवेंद्र नाथ महतो और थाना प्रभारी के बीच तीखी नोकझोंक हुई. देवेंद्र नाथ महतो ने थाना प्रभारी पर नाराजगी जताते हुए उन्हें ट्रिपल आईटी प्रबंधन का दलाल तक कह दिया. इस बयान के बाद घटनास्थल पर तनाव और बढ़ गया. इसके बाद देवेंद्र नाथ महतो ने छात्रों को संबोधित किया. उन्होंने संस्थान में पढ़ने वाले आदिवासी विद्यार्थियों के साथ कथित अन्याय का मुद्दा उठाते हुए मामले को जोरदार तरीके से उठाने की बात कही. हालांकि, उनका संबोधन संक्षिप्त रहा और वे कुछ देर बाद वहां से निकल गए.
छात्रों ने अलग ले जाकर की बातचीत
देवेंद्र नाथ महतो के पहुंचने के बाद आंदोलनकारी छात्रों ने उनसे अलग जाकर बातचीत भी की. छात्रों की कोशिश थी कि आंदोलन का मूल मुद्दा पीछे नहीं छूटे और प्रबंधन के साथ समाधान की संभावना बनी रहे. छात्रों के लिए सबसे अहम सवाल निदेशक को हटाने और संस्थान की व्यवस्थाओं में सुधार का है. ऐसे में उनकी नाराजगी केवल किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं है. वे चाहते हैं कि उनकी मांगों पर लिखित और ठोस निर्णय हो. इस घटनाक्रम ने आंदोलन के भीतर एक नई बहस भी खड़ी कर दी है. क्या राजनीतिक नेताओं की मौजूदगी से छात्रों की आवाज मजबूत होगी या प्रबंधन के साथ चल रही बातचीत और मुश्किल हो जाएगी?
आदित्य कुमार की मौत के बाद शुरू हुआ आंदोलन
ट्रिपल आईटी रांची के प्रथम वर्ष के बीटेक छात्र आदित्य कुमार की मौत 10 अक्टूबर 2026 की रात हुई थी. वह बिहार के नवगछिया-भागलपुर क्षेत्र का निवासी बताया गया है. छात्रावास के कमरे में गंभीर हालत में मिलने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. घटना के बाद विद्यार्थियों ने संस्थान की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठाए. उनका आरोप है कि जरूरत के समय हॉस्टल की लिफ्ट काम नहीं कर रही थी और एंबुलेंस में ड्राइवर तथा ऑक्सीजन जैसी जरूरी सुविधाओं को लेकर भी समस्या थी. संस्थान के निदेशक ने पहले कहा था कि छात्र को करीब 10 मिनट के भीतर अस्पताल ले जाया गया. पुलिस मामले की जांच कर रही है और मौत के कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा.
निदेशक को हटाने की मांग पर अड़े छात्र
छात्रों ने निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग उठाई है. उनकी शिकायतें केवल छात्र की मौत तक सीमित नहीं हैं. छात्रावास की सुविधाओं, भोजन की गुणवत्ता, पेयजल, बिजली, सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी और चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी असंतोष जताया गया है. निदेशक पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप भी लगाए गए हैं. ये आरोप अभी जांच और संस्थागत जवाबदेही के विषय हैं, इन्हें सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता. बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरपर्सन लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) ए.के. भट्ट ने छात्रों की शिकायतों पर जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निदेशक को हटाने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार ही पूरी की जा सकती है.
अब आंदोलन की दिशा पर नजर
ट्रिपल आईटी रांची में छात्रों का आंदोलन अब तीसरे दिन में पहुंच चुका है. एक ओर छात्र निदेशक को हटाने और बुनियादी सुविधाएं सुधारने की मांग पर अड़े हैं, दूसरी ओर देवेंद्र नाथ महतो के पहुंचने के बाद बातचीत प्रभावित होने का विवाद सामने आया है. आने वाले समय में सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि प्रबंधन छात्रों की मांगों पर क्या लिखित निर्णय लेता है और जांच में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों पर क्या सामने आता है. छात्रों की लड़ाई का मूल सवाल संस्थान में जवाबदेही और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल का है. राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मुद्दा पीछे नहीं छूटना चाहिए.

