झारखंड में विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार: 25 प्रखंड विकास पदाधिकारियों को मिला विभागीय वाहन
झारखंड में ग्रामीण विकास को गति देने के लिए राज्य सरकार ने 25 प्रखंड विकास पदाधिकारियों को विभागीय वाहन उपलब्ध कराए. मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि इससे योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन में तेजी आएगी और ग्रामीण जनता को सीधा लाभ मिलेगा.

Ranchi: झारखंड सरकार ने ग्रामीण विकास और प्रशासनिक कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. राज्य के 25 प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) को विभागीय वाहन उपलब्ध कराए गए, जिन्हें ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. यह कार्यक्रम झारखंड मंत्रालय में आयोजित किया गया, जहां मंत्री ने अधिकारियों को जनहित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संवेदनशील और जवाबदेह बनने का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने में BDO की भूमिका अहम होती है और टालमटोल की नीति से बचना चाहिए. इस पहल से क्षेत्रीय निरीक्षण, योजनाओं की निगरानी और जनता की समस्याओं के समाधान में तेजी आने की उम्मीद है. सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाएं समय पर और पारदर्शी तरीके से लागू हों.
25 BDO को मिले विभागीय वाहन, योजनाओं की निगरानी होगी मजबूत
झारखंड सरकार ने ग्रामीण विकास योजनाओं को गति देने के उद्देश्य से 25 प्रखंड विकास पदाधिकारियों को नए विभागीय वाहन प्रदान किए हैं. झारखंड मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने इन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. उन्होंने कहा कि कई बार संसाधनों की कमी के कारण अधिकारियों को जमीनी स्तर पर योजनाओं की निगरानी में कठिनाई होती है, जिसे देखते हुए यह कदम उठाया गया है. सरकार की मंशा है कि अधिकारियों को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराकर विकास कार्यों को प्रभावी बनाया जाए. मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में शेष प्रखंडों में भी एक साथ विभागीय वाहन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की निगरानी और प्रशासनिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है.

मंत्री का निर्देश: अधिकारियों को संवेदनशीलता और जवाबदेही से करना होगा काम
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि प्रखंड विकास पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली से ही सरकार की छवि बनती और बिगड़ती है. उन्होंने कहा कि अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए और किसी भी तरह की टालमटोल की नीति से बचना चाहिए. मंत्री ने कहा कि ग्रामीण जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है. उन्होंने यह भी कहा कि प्रखंड स्तर पर योजनाओं के सही क्रियान्वयन से ही विकास का वास्तविक लाभ जनता तक पहुंचता है. इस अवसर पर उन्होंने अधिकारियों से पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करने की अपील की, ताकि सरकारी योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू हो सकें और जनता को उनका सीधा लाभ मिल सके.
पंचायत स्तर पर सेवाओं को मजबूत करने पर जोर
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने अपने संबोधन में पंचायत स्तर पर सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक कार्य पंचायत स्तर पर ही पूरे किए जाएं ताकि ग्रामीणों को प्रखंड कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें. उन्होंने बताया कि डिजिटल पंचायत के माध्यम से पंचायतों को आवश्यक संसाधनों से सुसज्जित किया जा रहा है, जिससे लोगों को दस्तावेज और सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें. मंत्री ने पंचायत सचिवों की कमी का भी उल्लेख किया और कहा कि इसे जल्द ही दूर किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि पंचायतों को अपने आय के स्रोत बढ़ाने की दिशा में काम करना होगा. इस पहल से ग्रामीण प्रशासन को अधिक मजबूत और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव आने की उम्मीद है.
अधिकारियों की मौजूदगी और भविष्य की योजनाएं
इस कार्यक्रम में सचिव मनोज कुमार, अपर सचिव प्रेरणा दीक्षित, अरुण कुमार सिंह, संयुक्त सचिव एस. अली खान सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. सरकार का मानना है कि विभागीय वाहन मिलने से प्रखंड स्तर पर योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन में तेजी आएगी. मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे SIR अभियान, अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून के क्रियान्वयन और विकास योजनाओं के प्रभावी संचालन में अपनी जिम्मेदारी निभाएं. उन्होंने कहा कि केंद्र से प्राप्त वित्तीय सहायता का उपयोग पंचायतों के विकास में पारदर्शिता के साथ किया जाना चाहिए. सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण विकास योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाकर अंतिम व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंचाया जाए.

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