Jharkhand High Court का बड़ा फैसला! चायपत्ती और बिस्किट ले जाने पर निकाले गए कर्मचारी की नौकरी बहाल!
झारखंड हाईकोर्ट ने चायपत्ती और बिस्किट घर ले जाने के आरोप में बर्खास्त किए गए DRDA बोकारो के संविदा कर्मचारी की नौकरी बहाल कर दी. कोर्ट ने कार्रवाई को असंवेदनशील बताते हुए 50% बकाया वेतन देने का भी आदेश दिया.

झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बोकारो जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (DRDA) में संविदा पर कार्यरत चपरासी रंजीत कुमार हिमांशुकी बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है. अदालत ने राज्य प्रशासन की कार्रवाई को असंवेदनशील और असमानुपातिक (Disproportionate) बताते हुए कर्मचारी को दोबारा सेवा में बहाल करने और 50 प्रतिशत बकाया वेतन देने का आदेश दिया है. अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि किसी मामूली गलती के लिए कर्मचारी को सबसे कठोर सजा देना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। फैसले को प्रशासनिक कार्रवाई और कर्मचारियों के अधिकारों के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
17 साल की नौकरी, चायपत्ती और बिस्किट का आरोप, फिर कैसे गई नौकरी?
रंजीत कुमार हिमांशु पिछले करीब 17 वर्षों से डीआरडीए बोकारो में संविदा पर चपरासी के पद पर कार्यरत थे. उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने कार्यालय से चायपत्ती और कुछ बिस्किट घर ले गए थे. इस मामले में 16 मार्च 2022 को तत्कालीन उप विकास आयुक्त (DDC) ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया. हालांकि नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन-कौन सी सामग्री गायब हुई थी. सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि रंजीत कुमार ने संबंधित सामग्री वापस कर दी थी. इसके बावजूद 2 मई 2022 को उनकी सेवा समाप्त कर दी गई.
High Court ने पूछा- इतनी छोटी गलती पर सबसे बड़ी सजा क्यों?
बर्खास्तगी के खिलाफ रंजीत कुमार हिमांशु ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की. उनके वकील ने अदालत को बताया कि कर्मचारी ने बची हुई चायपत्ती और बिस्किट घर ले जाने की बात स्वीकार की थी और नोटिस मिलने के बाद सामग्री लौटा भी दी थी. मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई में आरोप और सजा के बीच संतुलन (Doctrine of Proportionality) होना जरूरी है. अदालत ने टिप्पणी की कि यदि किसी गलती से सरकारी व्यवस्था को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, तो सीधे नौकरी से निकाल देना न्याय और निष्पक्षता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जा सकता.
बहाली के साथ 50% बकाया वेतन देने का आदेश
हाईकोर्ट ने डीआरडीए बोकारो को निर्देश दिया है कि 10 जुलाई तक रंजीत कुमार हिमांशु को सेवा में बहाल किया जाए. साथ ही 30 जुलाई तक उन्हें 50 प्रतिशत बकाया वेतन का भुगतान भी किया जाए. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल एक कर्मचारी की बहाली तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक निर्णयों में संवेदनशीलता, निष्पक्षता और समानुपातिक दंड के सिद्धांत को भी मजबूत करता है. आने वाले समय में सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े मामलों में यह निर्णय एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल के रूप में देखा जा सकता है.


