VIDEO VIRAL: मधेपुरा के सिंहेश्वर मंदिर में मची अफरा-तफरी, एक-दूसरे के ऊपर गिरे श्रद्धालु
सावन की आखिरी सोमवारी पर मधेपुरा के प्रसिद्ध सिंहेश्वर मंदिर में जलाभिषेक के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी. भीड़ का दबाव बढ़ने से धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी की स्थिति बन गई. कई श्रद्धालु गिरकर घायल हुए, जबकि भीड़ को संभालने की कोशिश में एक पुलिसकर्मी को भी चोट लगी.

Madhepura: बिहार के मधेपुरा स्थित प्रसिद्ध सिंहेश्वरनाथ मंदिर में सावन की अंतिम सोमवारी पर भारी भीड़ के कारण सोमवार सुबह अफरा-तफरी की स्थिति बन गई. जलाभिषेक के लिए उमड़ी भीड़ के बीच धक्का-मुक्की होने लगी और कुछ श्रद्धालु गिर पड़े. कई रिपोर्टों में बैरिकेडिंग टूटने की बात कही गई है, हालांकि मधेपुरा के जिलाधिकारी अभिषेक रंजन ने बाद में कहा कि मंदिर परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति नहीं बनी और मजबूत लोहे की बैरिकेडिंग नहीं टूटी थी.
सुबह बढ़ा भीड़ का दबाव, बिगड़ी व्यवस्था
सावन की आखिरी सोमवारी होने के कारण सिंहेश्वर मंदिर में रात से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी. रिपोर्टों के मुताबिक, रविवार रात करीब एक बजे सरकारी पूजा के बाद मंदिर के पट खोले गए, जिसके बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचने लगे. सोमवार सुबह करीब 6 से 8 बजे के बीच भीड़ का दबाव और बढ़ गया. कतार में खड़े श्रद्धालुओं के बीच धक्का-मुक्की शुरू होने के बाद कुछ लोग नीचे गिर गए. कई मीडिया रिपोर्टों में बताया गया कि पीछे से भीड़ का दबाव बढ़ने के कारण लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरते चले गए. इस दौरान कुछ श्रद्धालुओं को चोटें आईं.
कई श्रद्धालु घायल, पुलिसकर्मी को भी लगी चोट
भीड़ के बीच हुई अफरा-तफरी में कई श्रद्धालुओं के घायल होने की सूचना है. अलग-अलग रिपोर्टों में घायलों की संख्या अलग-अलग बताई गई है, जबकि कुछ रिपोर्टों में करीब आधा दर्जन श्रद्धालुओं के घायल होने की जानकारी दी गई है. भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश में ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी भी चोटिल हो गया. रिपोर्ट के मुताबिक, धक्का-मुक्की के दौरान उसकी वर्दी तक फट गई. घायलों को तत्काल जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, मधेपुरा ले जाया गया, जहां उनका इलाज कराया गया. घटना के बाद मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई और अतिरिक्त पुलिस बल की मदद से श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से कतार में लगाया गया.
डीएम-एसपी समेत अधिकारी मौके पर पहुंचे
घटना की सूचना मिलते ही मधेपुरा के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम और एसडीपीओ समेत वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे. प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित किया. कुछ रिपोर्टों में बैरिकेडिंग टूटने के बाद भगदड़ जैसी स्थिति बनने की बात कही गई है. वहीं, जिलाधिकारी अभिषेक रंजन ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि मंदिर परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति नहीं बनी थी. उनके अनुसार, सुबह करीब 6 से 7 बजे के बीच भीड़ बढ़ने पर निर्धारित एसओपी के तहत मुख्य गेट को बीच-बीच में बंद कर श्रद्धालुओं को व्यवस्थित किया गया और मंदिर के बाहर उपलब्ध जगह का इस्तेमाल भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किया गया.
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से की शांति बनाए रखने की अपील
स्थिति संभालने के बाद प्रशासन और मंदिर न्यास समिति की ओर से श्रद्धालुओं से धैर्य बनाए रखने और धक्का-मुक्की से बचने की अपील की गई. श्रद्धालुओं को निर्धारित कतार में रहकर जलाभिषेक करने के लिए कहा गया. सावन की अंतिम सोमवारी के कारण सिंहेश्वर मंदिर में सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक भीड़ पहुंची थी. प्रशासन ने पहले से भीड़ प्रबंधन की तैयारी की थी और श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से मंदिर में प्रवेश कराने की योजना बनाई थी.
भारी भीड़ के बीच सुरक्षा व्यवस्था बनी बड़ी चुनौती
सिंहेश्वर मंदिर में हुई घटना ने बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की चुनौती को एक बार फिर सामने ला दिया है. अंतिम सोमवारी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने पहले से इंतजाम किए थे, लेकिन सुबह अचानक बढ़े भीड़ के दबाव से व्यवस्था पर असर पड़ा. घटना के बाद अतिरिक्त सुरक्षा बल की तैनाती और कतार व्यवस्था को मजबूत किया गया. फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही और मंदिर में व्यवस्थित तरीके से जलाभिषेक कराना है. घटना को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में स्थिति और घायलों की संख्या को लेकर अंतर है, इसलिए आधिकारिक जानकारी को अंतिम आधार माना जाना चाहिए.



