पोटका में ब्रेन मलेरिया बेकाबू, पोटका में 4 बच्चों की मौत, 60 से ज्यादा मरीज
जमशेदपुर के पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया का प्रकोप गंभीर हो गया है, जहां 72 घंटे में चार बच्चों की मौत से दहशत फैल गई है। 60 से अधिक लोग संक्रमित पाए गए हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीम और जांच अभियान तेज कर दिया है।

Jamshedpur: पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है. पिछले 72 घंटे के भीतर चार बच्चों की मौत ने पूरे इलाके को दहला दिया है. सबसे दर्दनाक मामला हरिणा पंचायत के कंदर गांव से सामने आया है, जहां एक गरीब पिता ने चार दिनों के भीतर अपनी दो मासूम बेटियों को खो दिया, जबकि तीसरी बेटी भी तेज बुखार से जूझ रही है. जिले में 60 से अधिक लोग इस बीमारी की चपेट में बताए जा रहे हैं और सबसे अधिक संक्रमित मरीज पोटका प्रखंड से मिले हैं. हालात की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन अलर्ट मोड में है. प्रभावित गांवों में विशेष मेडिकल टीम तैनात कर स्क्रीनिंग, दवा वितरण और मच्छर नियंत्रण अभियान तेज कर दिया गया है.
72 घंटे में चार बच्चों की मौत से दहशत
पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया तेजी से फैल रहा है. बीते 72 घंटे के भीतर चार बच्चों की मौत ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है. मृतकों में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्रा लखी सरदार, आठ वर्षीय राहुल सरदार, आठ वर्षीय सुबोला सरदार और एक वर्षीय खुशबू सरदार शामिल हैं. इन मौतों के बाद ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल है. कई गांवों में लगातार बुखार के मरीज सामने आ रहे हैं और लोगों में संक्रमण को लेकर भय बना हुआ है.
चार दिनों में खोईं दो बेटियां
हरिणा पंचायत के कंदर गांव का महावीर सरदार का परिवार इस त्रासदी से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है. उनकी आठ वर्षीय बेटी सुबोला सरदार की ब्रेन मलेरिया से मौत हुई. इसके चार दिन बाद एक वर्षीय खुशबू सरदार ने भी जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. परिवार की तीसरी बेटी भी तेज बुखार से पीड़ित है और उसका इलाज चल रहा है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के सामने इलाज और दैनिक जरूरतों की व्यवस्था करना भी चुनौती बन गया है. गांव में इस घटना के बाद शोक का माहौल है.
60 से अधिक मरीज मिले, पोटका सबसे ज्यादा प्रभावित
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में अब तक 60 से अधिक लोग ब्रेन मलेरिया की चपेट में आ चुके हैं. इनमें सबसे अधिक 43 मरीज पोटका प्रखंड से हैं. कई मरीजों का इलाज स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में चल रहा है, जबकि गंभीर स्थिति वाले मरीजों को जमशेदपुर स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया है. अस्पताल में भर्ती कुछ बच्चों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है और चिकित्सकों की विशेष टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है.
600 से अधिक लोगों की हुई जांच
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में विशेष अभियान शुरू किया है. मेडिकल टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं और बुखार से पीड़ित मरीजों के रक्त के नमूने लिए जा रहे हैं. अब तक 600 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है. साथ ही ग्रामीणों को मच्छरदानी के उपयोग, घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देने और बुखार होने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की सलाह दी जा रही है. प्रभावित इलाकों में फॉगिंग और दवा के छिड़काव का काम भी तेज कर दिया गया है.
लापरवाही पर कार्रवाई, निजी क्लिनिक सील
जांच के दौरान एक छात्रा के इलाज में कथित लापरवाही सामने आने पर जिला प्रशासन ने एक निजी क्लिनिक को सील कर दिया है. मामले की जांच जारी है. दूसरी ओर जिला उपायुक्त ने एमजीएम अस्पताल पहुंचकर भर्ती मरीजों का हाल जाना और डॉक्टरों से इलाज की जानकारी ली. अस्पताल प्रबंधन को सभी मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही दवाओं की उपलब्धता, बेड, पेयजल और अन्य सुविधाओं की भी समीक्षा की गई.
ब्रेन मलेरिया क्या है और कैसे करें बचाव
ब्रेन मलेरिया मलेरिया का गंभीर रूप है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में सेरेब्रल मलेरिया कहा जाता है. यह संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है. समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है. इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, उल्टी, सिरदर्द, बेहोशी, दौरे पड़ना और अत्यधिक कमजोरी शामिल हैं. चिकित्सकों का कहना है कि बुखार होने पर तुरंत जांच करानी चाहिए. मच्छरदानी का नियमित उपयोग, घर के आसपास साफ-सफाई और जलजमाव रोकना इस बीमारी से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं. फिलहाल प्रशासन संक्रमण को रोकने और प्रभावित परिवारों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए लगातार निगरानी बनाए हुए है.

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