BJP प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने CM हेमंत सोरेन से ट्रेजरी घोटाले की CBI जांच की मांग की
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर कथित ट्रेजरी घोटाले की CBI जांच कराने की मांग की है. भाजपा ने सरकार पर मामले में केवल औपचारिक जांच करने का आरोप लगाया है.

झारखंड की राजनीति में कथित ट्रेजरी घोटाले को लेकर सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष Aditya Sahu ने मुख्यमंत्री Hemant Soren को पत्र लिखकर मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई है. भाजपा का आरोप है कि राज्य में सामने आ रहे वित्तीय अनियमितताओं के मामले बेहद गंभीर हैं और सरकार निष्पक्ष जांच कराने के बजाय केवल औपचारिक कार्रवाई कर रही है. आदित्य साहू ने दावा किया कि ट्रेजरी से जुड़े इस कथित घोटाले की परतें जिस तरह खुल रही हैं, उससे यह मामला पुराने चर्चित पशुपालन घोटाले से भी बड़ा नजर आ रहा है. उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स के पैसों से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता बेहद जरूरी है. भाजपा ने राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब और स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके.
भाजपा ने सरकार की कार्रवाई पर उठाए सवाल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रही है. उनके मुताबिक जांच एजेंसियों की कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित नजर आ रही है. उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पारदर्शिता चाहती है तो उसे तुरंत केंद्रीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच की सिफारिश करनी चाहिए. भाजपा नेताओं का कहना है कि मामले में कई विभागों की भूमिका की भी जांच जरूरी है.
ट्रेजरी घोटाले को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल
कथित ट्रेजरी घोटाले को लेकर राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं. विपक्ष लगातार सरकार पर वित्तीय गड़बड़ी छिपाने का आरोप लगा रहा है, जबकि सत्तापक्ष इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बता रहा है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे जनहित और भ्रष्टाचार से जोड़कर उठा रहा है.
CBI जांच की मांग पर सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
भाजपा द्वारा सीबीआई जांच की मांग किए जाने के बाद अब सभी की नजर राज्य सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी है. अभी तक सरकार की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. हालांकि राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हैं. माना जा रहा है कि यदि मामले की जांच को लेकर दबाव बढ़ता है तो सरकार को विस्तृत जवाब देना पड़ सकता है.

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