भरत तिवारी एनकाउंटर: CM सम्राट चौधरी ने न्यायिक जांच के दिए आदेश, रिटायर्ड जज करेंगे पूरे मामले की पड़ताल
आरा के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले की न्यायिक जांच कराने का ऐलान किया है. पटना हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज पूरे मामले की जांच करेंगे. इधर पुलिस और परिजनों के दावों के बीच मामले ने नया मोड़ ले लिया है.

आरा के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए न्यायिक जांच कराने का ऐलान किया है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि पूरे मामले की जांच पटना हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराई जाएगी, ताकि घटना के हर पहलू की निष्पक्ष जांच हो सके. इस बीच मुठभेड़ को लेकर कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं. जहां पुलिस इसे आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बता रही है, वहीं मृतक के परिजन इसे फर्जी एनकाउंटर करार दे रहे हैं. मामले में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं और अब न्यायिक जांच के फैसले के बाद इस पूरे प्रकरण पर लोगों की नजरें टिक गई हैं.
सरकार ने कही निष्पक्षता की बात
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर बढ़ते विवाद के बीच बिहार सरकार ने मामले की न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार चाहती है कि घटना की सच्चाई सामने आए और इसी वजह से हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को जांच की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी. सरकार का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होगी तथा सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर रिपोर्ट तैयार की जाएगी.
मुठभेड़ के बाद दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज
इस मामले में पुलिस ने दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं. पहली एफआईआर में अवैध हथियार रखने, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने और पुलिस पर फायरिंग करने जैसे आरोप शामिल किए गए हैं. वहीं दूसरी एफआईआर सीधे मुठभेड़ की घटना से जुड़ी हुई है. पुलिस का दावा है कि कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी लगातार गोलीबारी कर रहा था और कई बार चेतावनी देने के बाद भी उसने आत्मसमर्पण नहीं किया. इसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई.
परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
दूसरी ओर भरत तिवारी के परिवार ने पुलिस की कहानी पर सवाल उठाए हैं. मृतक की मां ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे ने आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उसे गोली मारी गई. परिवार ने संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज है और कई लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं.
वकीलों और सामाजिक संगठनों ने भी उठाए सवाल
मामले ने कानूनी और सामाजिक स्तर पर भी बहस छेड़ दी है. कुछ अधिवक्ताओं और सामाजिक संगठनों ने इस मुठभेड़ की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि न्यायिक जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और क्या पुलिस की कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप थी. अब सभी की निगाहें न्यायिक जांच की प्रक्रिया और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं.

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