रांची के रातू रोड फ्लाईओवर के बैरियर टूटे, कहीं गायब; 400 करोड़ की परियोजना के रखरखाव पर सवाल
रांची के रातू रोड फ्लाईओवर पर लगे बैरियर की खराब हालत सामने आई है. कहीं बैरियर टूटे हुए हैं, तो कहीं गायब दिखाई दे रहे हैं. करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस फ्लाईओवर का उद्घाटन 3 जुलाई 2025 को हुआ था. अब बैरियर की स्थिति ने रखरखाव, नियमित निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Repot:-Suman kumari
रांची:- राजधानी रांची के रातू रोड फ्लाईओवर पर लगे बैरियर की खराब स्थिति अब चर्चा का विषय बन गई है.फ्लाईओवर के अलग-अलग हिस्सों में कहीं बैरियर टूटे हुए दिखाई दे रहे हैं, तो कहीं उनके गायब होने की तस्वीरें सामने आ रही हैं.करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस फ्लाईओवर का उद्घाटन 3 जुलाई 2025 को किया गया था.इसका मुख्य उद्देश्य कचहरी चौक से पिस्का मोड़ के बीच लगने वाले जाम से लोगों को राहत दिलाना और आवागमन को सुगम बनाना था.करीब 4.18 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन फ्लाईओवर के शुरू होने से शहर के इस व्यस्त मार्ग पर सफर का समय कम होने की उम्मीद जताई गई थी.लेकिन अब बैरियर की मौजूदा स्थिति ने इसके रखरखाव और नियमित निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि फ्लाईओवर जैसी महत्वपूर्ण सड़क संरचना पर सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की नियमित जांच होनी चाहिए.ऐसे में संबंधित विभाग की जिम्मेदारी और आगे की कार्रवाई पर लोगों की नजर है.
करीब 400 करोड़ की लागत से बना फ्लाईओवर
रातू रोड फ्लाईओवर राजधानी की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है.इसे कचहरी चौक से पिस्का मोड़ के बीच यातायात का दबाव कम करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था.लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से शहर के लोगों को जाम से राहत मिलने की उम्मीद थी.फ्लाईओवर के निर्माण में करीब 26 महीने लगे थे.
4.18 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर पर बैरियर की स्थिति खराब
करीब 4.18 किलोमीटर लंबे फोरलेन फ्लाईओवर पर लगे बैरियर कई जगहों पर खराब हालत में दिखाई दे रहे हैं.कहीं बैरियर टूटे हुए हैं, तो कहीं उनके गायब होने की तस्वीरें सामने आई हैं.इस स्थिति ने फ्लाईओवर के रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
जाम से राहत देने के लिए हुआ था उद्घाटन
रातू रोड फ्लाईओवर का उद्घाटन 3 जुलाई 2025 को हुआ था.इसके चालू होने के बाद कचहरी चौक से पिस्का मोड़ तक की यात्रा में लगने वाला समय करीब 30 मिनट से घटकर 10 मिनट होने की उम्मीद जताई गई थी.इसका उद्देश्य यातायात को सुचारु बनाना और लोगों के समय की बचत करना था.
बैरियर टूटने और गायब होने की वजह क्या?
फ्लाईओवर के बैरियर की मौजूदा स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ये टूटे कैसे और कुछ जगहों से गायब क्यों हैं.क्या नियमित निरीक्षण किया जा रहा है? क्या क्षतिग्रस्त बैरियर की समय पर मरम्मत हो रही है? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग की जांच और आधिकारिक जानकारी से ही स्पष्ट हो सकेगा.
रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी?
अब सबसे अहम सवाल फ्लाईओवर के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है.बैरियर की मरम्मत और निगरानी की जिम्मेदारी किस विभाग या एजेंसी के पास है, यह स्पष्ट होना जरूरी है.संबंधित विभाग इस स्थिति पर कब संज्ञान लेता है और क्षतिग्रस्त बैरियर को दुरुस्त करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर लोगों की नजर रहेगी.


