भाजपा की राजनीति पर बंधु तिर्की का हमला, बोले—झारखंड की जनता को बांटने की कोशिश
झारखंड के पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के दौरे और पार्टी की राजनीतिक कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने भाजपा पर विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सद्भाव जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की अपील की.

रांची:- झारखंड के पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के झारखंड दौरे और भाजपा की राजनीतिक कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा झारखंड में रचनात्मक और सकारात्मक मुद्दों के बजाय विभाजनकारी एवं सांप्रदायिक एजेंडे को आगे बढ़ा रही है.
बंधु तिर्की ने कहा कि भाजपा को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताया जाता है, लेकिन उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष के झारखंड दौरे से जिस तरह के सकारात्मक संदेश की उम्मीद थी, उसके विपरीत पार्टी की कार्यसमिति में कथित तौर पर विभाजनकारी एजेंडा सामने आया है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति का उद्देश्य सत्ता हासिल करना और समाज को बांटना है. उनके अनुसार, आदिवासी, गैर-आदिवासी और विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश की जा रही है.
उन्होंने कहा कि भाजपा झारखंड की सामाजिक समरसता और आदिवासी परंपराओं को सही तरीके से नहीं समझ पाई है. बंधु तिर्की ने आरोप लगाया कि पार्टी आदिवासी समुदायों और विभिन्न संस्थाओं को केवल वोट बैंक के रूप में देखती है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वोट की राजनीति के जरिए सत्ता हासिल करना भाजपा का मुख्य उद्देश्य है.
विकास, रोजगार और शिक्षा पर ध्यान देने की जरूरत
बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड की जनता को विभाजन की राजनीति नहीं, बल्कि विकास, रोजगार, शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत है. राज्य के लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना और सभी समुदायों के बीच सामाजिक सद्भाव बनाए रखना प्राथमिकता होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को जनता के वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. झारखंड की सामाजिक विविधता, आदिवासी परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करते हुए राज्य के समग्र विकास के लिए काम करना जरूरी है.
जनता के मुद्दों को प्राथमिकता देने की अपील
पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड की एकता और सामाजिक समरसता को बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है. उन्होंने विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और संवैधानिक अधिकारों जैसे मुद्दों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रखने की जरूरत पर जोर दिया.

