मलेरिया नियंत्रण अभियान का जायजा लेने देवघर पहुंचे क्षेत्रीय पदाधिकारी, स्वास्थ्यकर्मियों को दिए निर्देश
देवघर में क्षेत्रीय मलेरिया पदाधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण कर मलेरिया नियंत्रण कार्यों की समीक्षा की. मोहनपुर के तुंबाबेल में छिड़काव की गुणवत्ता पर संतोष जताया.

Deoghar: जिले में मलेरिया नियंत्रण और वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए संचालित स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा की गई. दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल, रांची के क्षेत्रीय मलेरिया पदाधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने 29 सितंबर को देवघर का क्षेत्र भ्रमण कर विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने मलेरिया किटनाशी छिड़काव की गुणवत्ता पर संतोष जताया और स्वास्थ्यकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए. उन्होंने मोहनपुर के तुंबाबेल गांव में छिड़काव के दूसरे चक्र का जायजा लिया. इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सारवां में ओपीडी, प्रयोगशाला और दवा भंडार का निरीक्षण किया. उन्होंने जिले में शेष 61 हाइड्रोसील मरीजों का जल्द ऑपरेशन कराने और फाइलेरिया मरीजों को समय पर एमएमडीपी किट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया.
तुंबाबेल गांव में मलेरिया छिड़काव की गुणवत्ता जांची
क्षेत्रीय मलेरिया पदाधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने मोहनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत तुंबाबेल गांव में चल रहे मलेरिया किटनाशी छिड़काव के दूसरे चक्र का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने छिड़काव पंजी, दीवार लेखन और किटनाशी घोल तैयार करने की प्रक्रिया का बारीकी से जायजा लिया. उन्होंने निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार किए जा रहे छिड़काव कार्य की गुणवत्ता पर संतोष व्यक्त किया. निरीक्षण के दौरान गांव में बुखार से पीड़ित लोगों और मलेरिया संक्रमित मरीजों की स्थिति की जानकारी भी ली गई. डॉ. अनिल कुमार ने संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिया कि बुखार से पीड़ित लोगों की समय पर जांच की जाए और मलेरिया की पुष्टि होने पर आवश्यक उपचार सुनिश्चित किया जाए. उन्होंने मरीजों की नियमित निगरानी पर भी जोर दिया, ताकि बीमारी के प्रसार को रोका जा सके. उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों से मलेरिया नियंत्रण अभियान को गंभीरता से संचालित करने और निर्धारित मानकों का पालन करने को कहा.
सीएचसी सारवां में ओपीडी, लैब और दवा भंडार का निरीक्षण
तुंबाबेल गांव के निरीक्षण के बाद क्षेत्रीय मलेरिया पदाधिकारी ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सारवां का जायजा लिया. यहां उन्होंने बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी), प्रयोगशाला और दवा भंडार कक्ष का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और व्यवस्था की समीक्षा की. उन्होंने संबंधित कर्मचारियों से मरीजों को दी जा रही सुविधाओं और वेक्टर जनित रोगों की जांच एवं उपचार से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी ली. इसके अलावा सारवां सीएचसी के अंतर्गत आने वाले विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में संचालित रोग नियंत्रण कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई. निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में सामने आने वाली कमियों और आवश्यकताओं पर चर्चा हुई. डॉ. अनिल कुमार ने अधिकारियों और कर्मियों को निर्देश दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं. उन्होंने वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम और नियंत्रण से संबंधित गतिविधियों को प्रभावी तरीके से संचालित करने पर जोर दिया, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को समय पर जांच, उपचार और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें.
एमटीएस की बहाली जल्द कराने का निर्देश
निरीक्षण के दौरान क्षेत्रीय मलेरिया पदाधिकारी ने वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन के लिए पर्याप्त मानव संसाधन की उपलब्धता पर जोर दिया. उन्होंने संबंधित अधिकारियों को एमटीएस की बहाली की प्रक्रिया जल्द पूरी कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया. उनके अनुसार, कार्यक्रमों के बेहतर संचालन के लिए कर्मचारियों की उपलब्धता और जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन जरूरी है. स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों की कमी का असर रोग नियंत्रण से जुड़ी गतिविधियों पर नहीं पड़ना चाहिए. उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मलेरिया और अन्य वेक्टर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए निर्धारित कार्यक्रमों की नियमित निगरानी करने को कहा. साथ ही स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया. इस दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को मरीजों की जांच, उपचार और निगरानी से जुड़ी प्रक्रियाओं में सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया. निरीक्षण का उद्देश्य जिले में संचालित स्वास्थ्य कार्यक्रमों की स्थिति का आकलन करना और आवश्यक सुधार के जरिए लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना था.
फाइलेरिया मरीजों को समय पर एमएमडीपी किट, 61 हाइड्रोसील मरीजों के ऑपरेशन पर जोर
क्षेत्रीय मलेरिया पदाधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने जिले में फाइलेरिया मरीजों की देखभाल को लेकर भी आवश्यक निर्देश दिए. उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि रुग्णता प्रबंधन एवं दिव्यांगता निवारण (एमएमडीपी) किट का वितरण समय पर सुनिश्चित किया जाए, ताकि मरीजों को जरूरी देखभाल और प्रबंधन संबंधी सुविधाएं मिल सकें. इसके साथ ही उन्होंने जिले में शेष बचे 61 हाइड्रोसील मरीजों का जल्द से जल्द ऑपरेशन कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया. उन्होंने मरीजों की पहचान, संबंधित विभागों के बीच समन्वय और उपचार की प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दिया, ताकि मरीजों को समय पर राहत मिल सके. क्षेत्र भ्रमण के दौरान जिला वेक्टर जनित रोग पदाधिकारी डॉ. अभय कुमार यादव, जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार डॉ. गणेश कुमार यादव, जिला मूल्यांकन पदाधिकारी कांग्रेस मंडल सहित संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों के एमटीएस अखिलेश कुमार तिवारी, एसआई मनोज कुमार पाण्डेय, एमपीडब्ल्यू सर्वेश्वर सिंह, पीओसीडी शिवसागर दास और ग्रामीण सहिया उपस्थित थीं.

