बिहार JDU में कलह पर आनंद मोहन का बड़ा हमला, संजय झा के नेतृत्व पर उठाए सवाल, नीतीश कुमार और अनंत सिंह के समर्थन में खोला मोर्चा
बिहार JDU में एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद अंदरूनी कलह तेज हो गई है. पूर्व सांसद आनंद मोहन ने संजय झा के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए नीतीश कुमार का समर्थन किया. उन्होंने टिकट वितरण, सम्राट चौधरी और अनंत सिंह प्रकरण पर भी बड़ा बयान दिया.

Bihar Politics: बिहार में विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर शुरू हुई बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। पूर्व सांसद आनंद मोहन ने अब पार्टी की अंदरूनी खींचतान और मौजूदा नेतृत्व को लेकर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि नीतीश कुमार ने जिस पार्टी को अपनी मेहनत और राजनीतिक रणनीति से खड़ा किया, आज उसी पार्टी को कमजोर किया जा रहा है।
आनंद मोहन के बयानों से बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। खास बात यह है कि उन्होंने केवल एमएलसी चुनाव में जेडीयू के प्रदर्शन पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने, टिकट वितरण और अनंत सिंह प्रकरण को लेकर भी अपनी बात रखी।
एमएलसी चुनाव में हार के बाद JDU नेतृत्व पर सवाल
बिहार विधान परिषद चुनाव में एनडीए को आठ में से पांच सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। वहीं जेडीयू अपने हिस्से की चार सीटों में से केवल एक सीट जीत सकी। चुनावी नतीजों के बाद आनंद मोहन ने पार्टी की रणनीति और नेतृत्व पर सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने वर्षों की मेहनत से जेडीयू को मजबूत बनाया था। पार्टी की पहचान सामाजिक समीकरणों और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की राजनीति से बनी थी, लेकिन मौजूदा नेतृत्व उस राजनीतिक विरासत को संभालने में सफल नहीं दिख रहा है।
आनंद मोहन ने मौजूदा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए 'नकली लीडर' तक कह दिया। उनका आरोप है कि गलत राजनीतिक फैसलों और टिकट वितरण की रणनीति के कारण पार्टी को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी की तुलना पर क्या बोले आनंद मोहन?
आनंद मोहन ने नीतीश कुमार के राजनीतिक कद का जिक्र करते हुए सम्राट चौधरी से उनकी तुलना पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का राजनीतिक अनुभव और उनकी भूमिका अलग है। सम्राट चौधरी को अभी बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जिस चेहरे के नाम पर बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा गया और जनता से समर्थन मिला, उसे मुख्यमंत्री पद से हटाने का फैसला कितना उचित था?
आनंद मोहन के मुताबिक, नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद जनता के बीच नाराजगी है और इसका असर चुनावी नतीजों में भी दिखाई दे रहा है।
निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन क्यों किया?
एमएलसी चुनाव में तिरहुत स्नातक और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र को लेकर भी आनंद मोहन ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने इन दोनों सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन किया था। दोनों उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे।
जब उनसे सवाल किया गया कि क्या उनके समर्थन के कारण जेडीयू को इन सीटों पर नुकसान हुआ, तो उन्होंने पलटकर सवाल किया कि अगर पार्टी उनकी वजह से हारी है तो इसमें वह क्या कर सकते हैं?
उन्होंने यह भी नाराजगी जाहिर की कि पार्टी ने उन्हें चुनाव प्रचार के लिए बुलाना तक जरूरी नहीं समझा।
आनंद मोहन ने टिकट वितरण की रणनीति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि कुछ क्षेत्रों में जातीय समीकरणों को नजरअंदाज करते हुए उम्मीदवारों का चयन किया गया, जिसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा।
अनंत सिंह प्रकरण पर भी खुलकर बोले आनंद मोहन
जेडीयू के अंदरूनी विवाद के बीच आनंद मोहन ने मोकामा विधायक अनंत सिंह के मामले में भी उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अनंत सिंह के साथ जो कुछ हो रहा है, वह उचित नहीं है और इससे जेडीयू को राजनीतिक नुकसान हो सकता है।
उन्होंने 2024 में नीतीश कुमार के एनडीए में वापस आने के दौरान अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी और चेतन आनंद की भूमिका का भी जिक्र किया।
इस पूरे प्रकरण में आनंद मोहन ने एक और अहम सवाल उठाया। उन्होंने इस्तीफे को लेकर कहा, 'इस्तीफा किसने लिया... आप पत्रकार हैं, ढूंढ़कर निकालिए।'
उनका यह बयान भी जेडीयू के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान की ओर इशारा करता है।
क्या JDU की अंदरूनी कलह अब NDA के लिए भी चुनौती बन रही है?
आनंद मोहन के बयानों को केवल एक नेता की नाराजगी के तौर पर देखना पर्याप्त नहीं होगा। एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद जेडीयू की चुनावी रणनीति, नेतृत्व और सामाजिक समीकरणों को लेकर कई सवाल सामने आए हैं।
एक तरफ नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत और नेतृत्व को लेकर बहस है, तो दूसरी तरफ पार्टी के भीतर टिकट वितरण और नेताओं की भूमिका को लेकर असंतोष दिखाई दे रहा है।
आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद जेडीयू की सांसद हैं और उनके बेटे चेतन आनंद पार्टी के विधायक हैं। ऐसे में आनंद मोहन के लगातार सामने आ रहे बयान पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।
हालांकि उनके बयानों को पार्टी के आधिकारिक रुख के तौर पर नहीं देखा जा सकता। लेकिन जिस तरह एमएलसी चुनाव के बाद पार्टी के भीतर सवाल उठ रहे हैं, उससे जेडीयू के संगठनात्मक समीकरण और एनडीए के आपसी तालमेल पर नई बहस जरूर शुरू हो गई है।
अब देखना होगा कि जेडीयू नेतृत्व आनंद मोहन के इन सवालों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और चुनावी हार के बाद पार्टी अपने संगठन तथा रणनीति में क्या बदलाव करती है।

