बेटी की शादी के बाद जेल जाएंगे अनंत सिंह! सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बोले- 'हां, सरेंडर कर देंगे'
मोकामा विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में 1 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है. बेटी शिवांगी की शादी के लिए मिली मोहलत के बाद अनंत सिंह ने कहा, 'हां, सरेंडर कर देंगे.' कोर्ट ने बिहार सरकार को चार महीने में जांच पूरी करने का निर्देश भी दिया है.

Patna:- मोकामा की सियासत में एक बार फिर अनंत सिंह चर्चा के केंद्र में हैं. एक तरफ घर में बेटी की शादी की तैयारियां हैं, तो दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने उनकी जेल वापसी का रास्ता तय कर दिया है. दुलारचंद यादव हत्याकांड में जमानत पर बाहर चल रहे जेडीयू विधायक अनंत सिंह को अब 1 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करना होगा. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब उनसे प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने दो टूक कहा- 'हां, सरेंडर कर देंगे.' यानी फिलहाल उनकी प्राथमिकता बेटी की शादी है, लेकिन इसके बाद जेल लौटना पड़ेगा. इस पूरे घटनाक्रम ने मोकामा की राजनीति के साथ-साथ बिहार के सियासी गलियारों में भी हलचल बढ़ा दी है.
घर में शादी की तैयारी, सामने जेल जाने की तारीख
अनंत सिंह की बेटी शिवांगी सिंह की शादी 25 नवंबर को होनी है. इसी पारिवारिक कार्यक्रम का हवाला देकर उनके वकील ने सुप्रीम कोर्ट से कुछ समय देने की मांग की थी. अदालत ने इस पहलू को ध्यान में रखते हुए उन्हें 1 दिसंबर तक का वक्त दिया है. लेकिन यह राहत अनिश्चितकाल के लिए नहीं है. कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि तय समय-सीमा के भीतर उन्हें आत्मसमर्पण करना होगा. ऐसे में नवंबर का आखिरी सप्ताह अनंत सिंह के लिए बेहद अहम रहने वाला है. पहले बेटी की शादी और फिर जेल वापसी. फिलहाल अनंत सिंह के सामने यही दो बड़ी तारीखें हैं.
हाईकोर्ट से मिली जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से 19 मार्च 2026 को जमानत मिली थी. जेल से बाहर आने के बाद इस जमानत को दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. याचिका में सवाल उठाया गया कि हाईकोर्ट ने अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास और मामले की गंभीरता को पर्याप्त महत्व दिए बिना जमानत दे दी. शुक्रवार, 30 अक्टूबर को जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर रोक लगाते हुए अनंत सिंह को सरेंडर करने का निर्देश दिया. इस फैसले के साथ ही उनकी जेल वापसी का मामला फिर सुर्खियों में आ गया है.
62 मुकदमों का रिकॉर्ड अदालत में, सरकार ने रखा अपना पक्ष
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बिहार सरकार की ओर से दाखिल हलफनामा भी चर्चा में रहा. 24 अक्टूबर को जमा किए गए इस हलफनामे में अनंत सिंह के खिलाफ कुल 62 मुकदमों का उल्लेख किया गया है. इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और आर्म्स एक्ट जैसी गंभीर धाराओं के मामले शामिल बताए गए हैं. याचिकाकर्ता की ओर से भी इसी आपराधिक इतिहास को जमानत रद्द करने की मांग का आधार बनाया गया. हालांकि, किसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना दोषी साबित होने के बराबर नहीं है. प्रत्येक मामले का फैसला उसकी अलग न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा.
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच टकराव भी आया सामने
इस कानूनी लड़ाई के पीछे मोकामा की सियासत का टकराव भी चर्चा में है. अनंत सिंह ने जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार पर आरोप लगाया है कि दुलारचंद यादव की हत्या के वक्त वह घटनास्थल से करीब तीन किलोमीटर दूर थे, इसके बावजूद उनका नाम हत्याकांड में शामिल करा दिया गया. अनंत सिंह का दावा है कि हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद नीरज कुमार ने दिल्ली में उनकी जमानत को चुनौती दी. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एमएलसी चुनाव के दौरान उन्होंने नीरज कुमार का विरोध किया था. हालांकि, उनका कहना है कि यह विरोध पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यक्तिगत तौर पर नीरज कुमार के खिलाफ था. इस बयान ने दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक खींचतान को फिर चर्चा में ला दिया है.
चार महीने में जांच पूरी करने का आदेश, आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को दुलारचंद यादव हत्याकांड की जांच चार महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश भी दिया है. जांच पूरी होने के बाद अदालत इस मामले में आगे सुनवाई करेगी. गौर करने वाली बात यह है कि दुलारचंद यादव की हत्या 30 अक्टूबर 2025 को हुई थी और ठीक एक साल बाद 30 अक्टूबर 2026 को अनंत सिंह की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट का यह अहम आदेश आया. अब सवाल सिर्फ अनंत सिंह की जेल वापसी का नहीं, बल्कि इस हत्याकांड की जांच और आगे होने वाली न्यायिक कार्रवाई का भी है. फिलहाल अनंत सिंह ने सरेंडर करने की बात कह दी है. अब देखना होगा कि बेटी की शादी के बाद वह तय तारीख से पहले या 1 दिसंबर तक कब आत्मसमर्पण करते हैं.

