सिर्फ 400 मीटर पाइपलाइन के लिए सात साल का इंतजार! 1100 करोड़ की रांची जलापूर्ति योजना में एनओसी का ऐसा पेच कि अब 32 करोड़ देकर रास्ता निकालेगा विभाग
रांची की जलापूर्ति योजना सात साल से मुख्य पाइपलाइन की अड़चन के कारण अधूरी है. तिलता से पिस्का मोड़ तक करीब 10 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने के लिए NHAI से अनुमति नहीं मिलने के कारण काम रुका रहा. अब नगर विकास विभाग ने सड़क कटिंग और पुनर्निर्माण के लिए NHAI को 32 करोड़ रुपये देने का फैसला किया है.

Ranchi: सात साल से रांची की प्यास बुझाने वाली योजना का एक हिस्सा जमीन पर उतर ही नहीं पाया. करोड़ों रुपये खर्च हुए, शहर में पाइपलाइन बिछी, हजारों घरों को पानी का कनेक्शन भी मिल गया, लेकिन जिस मुख्य लाइन से जलमीनारों तक पानी पहुंचना है, वही अधूरी रह गई. वजह बनी रिंग रोड पर तिलता से पिस्का मोड़ तक करीब 10 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने की अनुमति. 2019 से जुडको और एनएचएआई के बीच चिट्ठियां चलती रहीं, बैठकें हुईं, अधिकारी मौके पर पहुंचे, वैकल्पिक रास्ते भी तलाशे गए, लेकिन नतीजा नहीं निकला. अब सात साल बाद नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने कहा है कि एनएचएआई को सड़क काटने और दोबारा बनाने के लिए 32 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. यानी अब जाकर विभाग ने इस अड़चन को दूर करने का रास्ता चुना है. लेकिन सवाल है कि जिस काम के लिए आज 32 करोड़ देने की बात हो रही है, उसका फैसला पहले क्यों नहीं हुआ? और इस देरी की कीमत आखिर रांची के लोग कब तक चुकाएंगे?
2019 में मांगी गई थी अनुमति, 2020 में एनएचएआई ने कर दिया इनकार
रुक्का यानी गेतलसूद डैम से साफ पानी रांची की जलमीनारों तक पहुंचाने के लिए मुख्य राइजिंग पाइपलाइन बिछाई जानी है. इसी पाइपलाइन का करीब 10 किलोमीटर हिस्सा रिंग रोड के तिलता से पिस्का मोड़ होते हुए रातू रोड तक प्रस्तावित है. इस रास्ते में राष्ट्रीय राजमार्ग की सड़क आती है, इसलिए सड़क काटने और पाइप बिछाने के लिए एनएचएआई की अनुमति जरूरी थी. जुडको ने 2019 में पहली बार एनओसी मांगी. 16 नवंबर 2019 को इसके लिए पत्र भेजा गया, लेकिन 6 फरवरी 2020 को एनएचएआई ने अनुमति देने से इनकार कर दिया. इसके बाद जुडको और विभाग की ओर से लगातार पत्राचार किया गया. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 2019 से 2025 के बीच 11 बार पत्र लिखे गए, लेकिन समाधान नहीं निकला.
बैठकें हुईं, स्थल निरीक्षण हुआ, वैकल्पिक रास्ते पर भी बनी बात
एनओसी का मामला केवल पत्र लिखने तक सीमित नहीं रहा. इस पर अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई और स्थल निरीक्षण भी किया गया. 12 अप्रैल 2024 को एनएचएआई, जुडको और संबंधित अधिकारियों ने संयुक्त रूप से प्रस्तावित पाइपलाइन मार्ग का निरीक्षण किया. इसके बाद 18 अप्रैल को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में वैकल्पिक अलाइनमेंट तलाशने का निर्देश दिया गया. 28 मई 2024 को भी एनएचएआई ने दूसरे रास्ते की संभावना देखने को कहा. यानी विभागों के सामने यह मामला लगातार मौजूद था और इसके समाधान के लिए अलग-अलग विकल्पों पर विचार भी हुआ. इसके बावजूद पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू नहीं हो सका. अब सात साल बाद 32 करोड़ रुपये देने का फैसला सामने आया है.
1100 किलोमीटर पाइपलाइन बिछी, 55 हजार घरों को कनेक्शन; मुख्य लाइन अब भी अधूरी
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, रांची में अब तक करीब 1100 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है और 55 हजार आवासों को हाउस कनेक्शन दिया गया है. नगर विकास विभाग का दावा है कि पूरी जलापूर्ति योजना का 90 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है. लेकिन शहर में पाइपलाइन बिछाने और घरों को कनेक्शन देने के बावजूद मुख्य राइजिंग लाइन का अधूरा हिस्सा जलापूर्ति की राह में बाधा बना हुआ है. रुक्का डैम से पानी जलशोधन संयंत्र के जरिए जलमीनारों तक पहुंचेगा और फिर घरों में सप्लाई होगी. ऐसे में तिलता से पिस्का मोड़ तक पाइपलाइन बिछना जरूरी है. यह काम पूरा हुए बिना तैयार नेटवर्क का पूरा लाभ लोगों को नहीं मिल पाएगा.
अब NHAI को 32 करोड़, पाइपलाइन बिछाने में लगेंगे छह महीने
नगर एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक में रांची की जलापूर्ति योजना को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि सड़क कटिंग और पुनर्निर्माण की लागत के रूप में एनएचएआई को 32 करोड़ रुपये जल्द उपलब्ध करा दिए जाएंगे. अधिकारियों ने बैठक में बताया कि एनएचएआई से एनओसी मिलने के बाद सड़क काटकर पाइपलाइन बिछाने और फिर सड़क को पुराने स्वरूप में लाने में करीब छह महीने लगेंगे. इसका मतलब है कि 32 करोड़ रुपये देने के बाद भी काम पूरा होने में समय लगेगा. अब तक अनुमति हासिल करने में हुई देरी के बाद निर्माण की प्रक्रिया भी कम से कम छह महीने का समय लेगी. विभाग के सामने चुनौती है कि अब इस काम में और देरी न हो.
400 मीटर पाइपलाइन और इंटेक वेल का काम अप्रैल तक पूरा करने का निर्देश
समीक्षा बैठक में प्रधान सचिव ने रुक्का से तिलता चौक के बीच बची हुई 400 मीटर मुख्य पाइपलाइन का काम भी जल्द पूरा करने को कहा है. इसके लिए एजेंसी एनसीसी को निर्देश दिया गया है. रुक्का डैम में 360 एमएलडी क्षमता के इंटेक वेल का निर्माण अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. जलशोधन संयंत्र यानी डब्ल्यूटीपी बनकर तैयार है, लेकिन उसे चालू करने के लिए बिजली कनेक्शन की जरूरत है. बिजली विभाग से समन्वय कर कनेक्शन लेने और रास्ते में आ रहे पुराने बिजली के पोल शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. प्रधान सचिव के अनुसार, 400 मीटर पाइपलाइन और इंटेक वेल का काम पूरा होने पर नया सराय लाइन से करीब 15 हजार आवासों तक पानी पहुंचाया जा सकेगा. सरकार ने अगले साल मई तक इन घरों को जलापूर्ति से जोड़ने की तैयारी की है.
सात साल की देरी के बाद अब समयसीमा पर रहेगी नजर
रांची की जलापूर्ति योजना में अब तक 90 प्रतिशत से अधिक काम पूरा होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन तिलता से पिस्का मोड़ तक की मुख्य पाइपलाइन ने पूरे प्रोजेक्ट की रफ्तार रोक रखी है. 2019 में एनओसी की मांग से शुरू हुआ मामला 2026 तक पहुंच गया. इस दौरान पत्राचार, बैठक और निरीक्षण के बावजूद समाधान नहीं निकला. अब विभाग 32 करोड़ रुपये देने जा रहा है. ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि पाइपलाइन कब बिछेगी, बल्कि यह भी है कि अनुमति हासिल करने में इतने साल क्यों लगे और पहले इसका रास्ता क्यों नहीं निकाला गया. प्रधान सचिव ने एजेंसियों को काम में कोताही नहीं बरतने की चेतावनी दी है. अब रांची के लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि 32 करोड़ रुपये देने के बाद पाइपलाइन का काम कब शुरू होता है और तय समय में घरों तक पानी पहुंच पाता है या नहीं.

