क्या खत्म होगा NTA का दौर? NEET पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG एक बार फिर विवादों के घेरे में है. पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों के आरोपों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को नोटिस जारी किया है.

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG एक बार फिर विवादों के घेरे में है. पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों के आरोपों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को नोटिस जारी किया है. अदालत में दायर जनहित याचिका में मांग की गई है कि NTA को भंग कर एक स्वतंत्र और पारदर्शी परीक्षा संस्था बनाई जाए. सुप्रीम Court ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सॉलिसिटर जनरल को तुरंत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने यह भी पूछा है कि आखिर क्यों न एक स्वतंत्र कमेटी को परीक्षा कराने की जिम्मेदारी सौंपी जाए. लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले में अब पूरे देश की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं. सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद NEET परीक्षा प्रणाली और NTA की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने NTA और केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस
NEET पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अदालत ने कहा कि यह मामला पहले भी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है और तब परीक्षा सुधारों के लिए एक कमेटी बनाई गई थी. इसके बावजूद हालात में सुधार नहीं दिख रहा. कोर्ट ने NTA से पूछा है कि आखिर 2024 में दिए गए निर्देशों और मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशों पर क्या कार्रवाई की गई. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार तक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है. इस मामले की अगली सुनवाई 29 मई को होगी, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं.
NTA को भंग करने की मांग क्यों उठी?
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) और फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि NTA बार-बार पेपर लीक रोकने में विफल रही है और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने में पूरी तरह असफल साबित हुई है. उनका तर्क है कि देशभर के 22 लाख से अधिक छात्रों के मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं. इसलिए परीक्षा कराने के लिए एक नई स्वतंत्र और स्वायत्त संस्था बनाई जानी चाहिए. याचिका में यह भी मांग की गई है कि नई संस्था बनने तक एक हाई-पावर मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाए, जिसकी निगरानी में परीक्षा आयोजित हो. इसमें रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट और फॉरेंसिक वैज्ञानिकों को शामिल करने की मांग की गई है, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके.
अदालत में भाग्यश्री सुसाइड केस और गिरफ्तारी पर बहस
कर्नाटक के कलबुर्गी में NEET अभ्यर्थी भाग्यश्री की आत्महत्या के बाद यह मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया है. सुनवाई के दौरान इस केस से जुड़ी गिरफ्तारी को लेकर अदालत में तीखी बहस देखने को मिली. बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में दावा किया कि आरोपी को 22 मई को ही गिरफ्तार कर लिया गया था और तब से वह जांच में पूरा सहयोग कर रही है. वकील ने यह भी कहा कि आरोपी के पास से अब ऐसा कुछ बरामद होना बाकी नहीं है, जिसके लिए उसे हिरासत में रखना जरूरी हो. हालांकि सोशल मीडिया और छात्रों के बीच इस दलील को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिल रही है. अभ्यर्थियों का कहना है कि जब एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली, तब जाकर कार्रवाई शुरू हुई. छात्रों का आरोप है कि अब मामले को कमजोर करने और जांच को भटकाने की कोशिश की जा रही है. इस घटना ने पूरे देश में परीक्षा प्रणाली को लेकर गुस्सा और अविश्वास बढ़ा दिया है.
क्या NEET परीक्षा प्रणाली में होगा बड़ा बदलाव?
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या देश की मेडिकल प्रवेश परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना जरूरी है. कोर्ट ने परीक्षा सुधारों के लिए गठित के राधाकृष्णन कमेटी की स्टेटस रिपोर्ट भी तलब की है. अदालत यह जानना चाहती है कि कमेटी ने अब तक क्या सुधार किए और उन्हें जमीन पर कैसे लागू किया गया. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ, तो NTA की संरचना में बड़े बदलाव या नई संस्था के गठन का रास्ता खुल सकता है. लगातार पेपर लीक और परीक्षा घोटालों ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर किया है. अब आने वाली सुनवाई यह तय कर सकती है कि NEET जैसी बड़ी परीक्षाओं की जिम्मेदारी भविष्य में किस संस्था के हाथों में होगी और क्या परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह नया स्वरूप दिया जाएगा.

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