ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान क्यों हुआ बेबस? स्विस थिंक टैंक ने बताया
स्विस थिंक टैंक की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत की सैन्य कार्रवाई से पाकिस्तान की हालत इतनी खराब हो गई थी कि उसे सीजफायर की मांग करनी पड़ी.

भारत-पाकिस्तान के बीच हुए हालिया सैन्य तनाव और सीजफायर को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अहम रिपोर्ट सामने आई है. स्विट्जरलैंड के एक प्रतिष्ठित थिंक टैंक ने अपनी नई स्टडी में उन दावों की पुष्टि की है, जिन्हें भारत लंबे समय से दोहराता आ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सशस्त्र बलों की सटीक और सुनियोजित कार्रवाई ने पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया था. हालात ऐसे बन गए थे कि पाकिस्तान के पास टकराव जारी रखने का कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं बचा. इसी दबाव में उसने सीजफायर की पहल की. यह विश्लेषण उन बयानों के उलट है, जिनमें अमेरिकी नेतृत्व की ओर से मध्यस्थता का दावा किया जाता रहा है. स्विस थिंक टैंक की रिपोर्ट भारत की रणनीतिक बढ़त, आधुनिक सैन्य क्षमताओं और निर्णायक प्रतिक्रिया को रेखांकित करती है. साथ ही यह भी बताती है कि किस तरह वैश्विक मीडिया ने संघर्ष के कई अहम पहलुओं को नजरअंदाज कर दिया.
88 घंटे के सैन्य टकराव का विस्तृत आकलन
रिपोर्ट में भारत और पाकिस्तान के बीच करीब 88 घंटे तक चले सैन्य टकराव का विस्तार से विश्लेषण किया गया है. थिंक टैंक के मुताबिक, भारत ने बेहद व्यवस्थित रणनीति के तहत पाकिस्तान की हवाई सुरक्षा और हमलावर क्षमता को निशाना बनाया. इस दौरान अंतरराष्ट्रीय मीडिया का बड़ा हिस्सा वास्तविक सैन्य नुकसान के बजाय अलग-अलग दावों पर केंद्रित रहा. विश्लेषण में कहा गया है कि भारतीय सेना को ऑपरेशनल फैसलों में पूरी स्वतंत्रता दी गई थी, जिससे जवाबी कार्रवाई तेज और प्रभावी रही. पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने सीमापार आतंकी ढांचों को सटीक हमलों में नष्ट किया. इसके जवाब में पाकिस्तान ने अपने उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया, लेकिन वह भारतीय रणनीति को संतुलित नहीं कर सका.
भारतीय हथियार प्रणालियों ने बदला संघर्ष का रुख
स्विस रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष के दौरान भारत ने आधुनिक हथियार प्रणालियों का बेहद प्रभावी उपयोग किया. लंबी दूरी से मार करने वाली क्रूज मिसाइलों ने पाकिस्तान के रडार नेटवर्क और एयर डिफेंस सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचाया. इससे पाकिस्तान की निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता लगभग ठप हो गई. इसके साथ ही भारत की मल्टी-लेयर एयर डिफेंस व्यवस्था ने दुश्मन के हमलों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया. एकीकृत कमांड-कंट्रोल सिस्टम और स्वदेशी तकनीक ने मैदान में भारत को निर्णायक बढ़त दिलाई. रिपोर्ट का कहना है कि इस तकनीकी और रणनीतिक श्रेष्ठता के चलते पाकिस्तान के प्रमुख सैन्य ठिकाने असुरक्षित हो गए थे, जिससे उसकी स्थिति लगातार कमजोर होती चली गई.
सीजफायर की पहल और अंतरराष्ट्रीय दावों पर सवाल
रिपोर्ट का सबसे अहम निष्कर्ष यह है कि 10 मई के आसपास हालात पूरी तरह भारत के पक्ष में झुक चुके थे. पाकिस्तान न तो प्रभावी जवाब दे पा रहा था और न ही संघर्ष को आगे बढ़ाने की स्थिति में था. ऐसे में उसने सीधे संपर्क कर सीजफायर की मांग की. स्विस थिंक टैंक का आकलन उन दावों पर भी सवाल उठाता है, जिनमें तीसरे पक्ष की निर्णायक भूमिका बताई जाती रही है. रिपोर्ट के अनुसार, सीजफायर का फैसला सैन्य दबाव और जमीनी हकीकत का नतीजा था, न कि किसी बाहरी मध्यस्थता का. यह अध्ययन भारत की सैन्य क्षमता, रणनीतिक धैर्य और स्पष्ट नीति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से स्थापित करता है.

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