CCTV फुटेज सामने लाने में देरी क्यों? जेएलकेएम की बेबी महतो ने पुलिस एसोसिएशन पर उठाए सवाल
जेएलकेएम नेत्री बेबी महतो ने जयराम महतो से जुड़े थाना प्रकरण में पुलिस एसोसिएशन पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने थाना परिसर का CCTV फुटेज सार्वजनिक करने की मांग करते हुए पूछा कि इसे सामने लाने में देरी क्यों हो रही है.

Ranchi: डुमरी विधायक जयराम महतो से जुड़े थाना प्रकरण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) की नेत्री बेबी महतो ने पुलिस प्रशासन और पुलिस एसोसिएशन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए हैं. उन्होंने मांग की कि थाना परिसर का सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किया जाए, ताकि घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके. बेबी महतो ने कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग और सीसीटीवी फुटेज को लेकर भी सवाल किए. उन्होंने कहा कि यदि घटना को लेकर पुलिस एसोसिएशन की ओर से कार्रवाई की मांग की जा रही है, तो पूरे मामले के सभी उपलब्ध साक्ष्य सामने आने चाहिए. हालांकि, उनके लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग
बेबी महतो ने कहा कि जयराम महतो के थाना पहुंचने के दौरान वास्तव में क्या हुआ, इसे स्पष्ट करने के लिए थाना परिसर का सीसीटीवी फुटेज सामने लाया जाना चाहिए. उनका कहना है कि केवल ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर पूरे घटनाक्रम का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि ऑडियो के बाद अब सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने में भी देरी की जा रही है. बेबी महतो ने आशंका जताई कि देरी के दौरान फुटेज के साथ छेड़छाड़ की कोशिश हो सकती है. हालांकि, इस आशंका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन के पास घटना से जुड़े वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं तो उन्हें सार्वजनिक करने से पूरे विवाद की स्थिति स्पष्ट हो सकती है. उनके मुताबिक, इससे यह भी पता चलेगा कि थाना परिसर में घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था.
‘ऑडियो सही है तो उसी समय क्यों नहीं किया सार्वजनिक?’
जेएलकेएम नेत्री ने कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग को लेकर भी पुलिस एसोसिएशन से सवाल किया. उन्होंने पूछा कि यदि ऑडियो क्लिप वास्तविक है और घटना उसी दिन की है तो उसे तत्काल सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया. बेबी महतो ने कहा कि किसी भी विवाद में एक पक्ष की रिकॉर्डिंग सामने आने के बाद पूरे घटनाक्रम को उसी आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने थाना परिसर की परिस्थितियों और वहां मौजूद लोगों की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की. बेबी महतो ने पुलिस व्यवस्था के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि आम लोगों के साथ थानों में किस तरह का व्यवहार होता है, यह झारखंड की जनता जानती है. हालांकि, पुलिस के व्यवहार को लेकर उनके द्वारा लगाए गए व्यापक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि पूरे मामले में पारदर्शी जांच और उपलब्ध साक्ष्यों को सामने लाना जरूरी है.
‘पिछले मामलों की रिकॉर्डिंग भी सार्वजनिक करें’
बेबी महतो ने पुलिस एसोसिएशन को चुनौती देते हुए कहा कि यदि जयराम महतो से जुड़े मामले में ऑडियो रिकॉर्डिंग को इतना महत्व दिया जा रहा है तो पिछले छह महीने से एक वर्ष के दौरान झारखंड के विभिन्न थानों में अधिकारियों और आम लोगों के बीच हुई बातचीत से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में लाए जाने चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों के साथ थानों में भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जाता है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि एफआईआर दर्ज कराने के लिए पैसे मांगने जैसी शिकायतें भी सामने आती रहती हैं. बेबी महतो ने कहा कि ऐसे मामलों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने इस बयान में कोई विशिष्ट दस्तावेज या आधिकारिक आंकड़े पेश नहीं किए. उनका कहना है कि पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सभी मामलों में समान रूप से लागू होनी चाहिए.
बोकारो के कथित मामले का भी किया जिक्र
बेबी महतो ने अपने बयान में बोकारो में कथित तौर पर एक युवक के साथ अभद्र भाषा के इस्तेमाल के मामले का भी उल्लेख किया. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी पुलिसकर्मी या अधिकारी के व्यवहार से आम लोगों की भावनाएं आहत होती हैं, तो पुलिस एसोसिएशन की ओर से उसी तरह प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं की जाती. उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ आरोप सही पाए जाने पर केवल निलंबन तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए. दोष साबित होने की स्थिति में कानून के तहत आगे की कार्रवाई होनी चाहिए. बेबी महतो ने कहा कि पुलिस और आम जनता के बीच व्यवहार को लेकर समान मानदंड होना चाहिए. उनका तर्क है कि यदि जनप्रतिनिधि से जुड़े मामले में पुलिस संगठन सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रख सकता है तो आम नागरिकों से जुड़े गंभीर मामलों पर भी समान रूप से जवाबदेही तय होनी चाहिए.
जेल में महिला के गर्भवती होने के मामले पर भी सवाल
बेबी महतो ने जेल में एक महिला के गर्भवती होने के मामले का भी उल्लेख किया और प्रशासन से इस पर जवाब मांगा. उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की घटना सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. उन्होंने इस मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि केवल आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना जरूरी है. बेबी महतो ने प्रशासन से पूछा कि ऐसी घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है. हालांकि, इस बयान में उन्होंने मामले से जुड़े विस्तृत दस्तावेज या आधिकारिक जांच रिपोर्ट पेश नहीं की. उन्होंने कहा कि प्रशासन को ऐसे मामलों में पारदर्शिता बरतनी चाहिए और जनता के सामने तथ्य रखने चाहिए. उनका कहना है कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में जवाबदेही सभी के लिए समान होनी चाहिए.
महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध पर जांच की मांग
बेबी महतो ने झारखंड में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध के मामलों को लेकर भी चिंता जताई. इसके अलावा उन्होंने अवैध बालू और कोयला कारोबार तथा उसमें पुलिस-प्रशासन की कथित भूमिका की जांच की मांग की. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता के आरोप सामने आते हैं तो निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. बेबी महतो ने कथित ऑडियो और चैट में अधिकारियों की बातचीत का भी जिक्र करते हुए उनकी जांच की मांग की. उनका कहना है कि यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. उन्होंने सरकार और प्रशासन से कहा कि गंभीर आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रखने के बजाय दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर जांच की जाए.
गिरफ्तारी की मांग पर बेबी महतो का जवाब
जयराम महतो की गिरफ्तारी की मांग को लेकर दिए गए अल्टीमेटम पर भी बेबी महतो ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि पहले पिछले पांच दिनों के दौरान उठाए गए सभी सवालों और आरोपों की जांच की जानी चाहिए और तथ्यों को सामने लाया जाना चाहिए. इसके बाद ही गिरफ्तारी जैसे कदम पर बात होनी चाहिए. बेबी महतो का कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच जरूरी है. उन्होंने पुलिस और प्रशासन से अपने स्तर पर उठ रहे सवालों का जवाब देने की मांग की. उनका कहना है कि यदि किसी मामले में कानूनी कार्रवाई आवश्यक है तो वह उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर होनी चाहिए. दूसरी ओर, जयराम महतो से जुड़े मामले में पुलिस की ओर से दर्ज प्राथमिकी और जांच की प्रक्रिया अपनी जगह जारी है. आगे की कानूनी स्थिति जांच के परिणाम पर निर्भर करेगी.
‘झारखंड की जनता जयराम महतो के साथ’
बेबी महतो ने दावा किया कि जयराम महतो के समर्थन में झारखंड की जनता खड़ी है. उन्होंने कहा कि जयराम महतो एक जनप्रतिनिधि के तौर पर आम लोगों की समस्याओं को लेकर थाना पहुंचे थे. बेबी महतो के मुताबिक, पुलिस-प्रशासन को लेकर लोगों में लंबे समय से नाराजगी है और इस मामले के बाद यह समर्थन और मजबूत हुआ है. उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दों को उठाने वाले जनप्रतिनिधियों की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए. हालांकि, उनके द्वारा पूरे झारखंड की जनता के समर्थन को लेकर किया गया दावा एक राजनीतिक बयान है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. बेबी महतो ने कहा कि मौजूदा विवाद को केवल एक घटना के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि पुलिस और जनता के बीच भरोसे से जुड़े व्यापक सवालों पर भी चर्चा होनी चाहिए.
जयराम महतो की ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से तुलना
अपने बयान के अंत में बेबी महतो ने जयराम महतो की तुलना भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी और बिरसा मुंडा जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से की. उन्होंने कहा कि समय और परिस्थितियों के अनुसार जयराम महतो संघर्ष का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे. उनका यह बयान राजनीतिक संदर्भ में दिया गया है और इसे उनके संगठन के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है. बेबी महतो ने एक बार फिर पुलिस कार्रवाई और कथित ऑडियो को लेकर पारदर्शिता की मांग दोहराई. उन्होंने कहा कि विवाद को खत्म करने के लिए सभी उपलब्ध साक्ष्यों को सामने लाना जरूरी है. फिलहाल मामले में पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है. ऐसे में आने वाले दिनों में सीसीटीवी फुटेज, जांच की प्रगति और पुलिस-प्रशासन की ओर से सामने आने वाले आधिकारिक तथ्यों पर सबकी नजर रहेगी.

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