JPSC 11वीं से 13वीं और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति रद्द, हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर लगाई रोक
JPSC 11वीं से 13वीं सिविल सेवा और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति रद्द करने के सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट ने अगले आदेश तक रोक लगा दी है.

Ranchi: झारखंड में JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए गुरुवार को बड़ी खबर सामने आई. झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है. न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग से जवाब मांगा है. सरकार ने 18 अगस्त की रात कई प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था. इसके बाद चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया था. प्रभावित अभ्यर्थियों ने अलग-अलग याचिकाओं के जरिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. अदालत के अंतरिम आदेश से फिलहाल 11वीं-13वीं JPSC और फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्ति से जुड़े अभ्यर्थियों को राहत मिली है. मामले में अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी.
नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर अदालत की रोक
झारखंड सरकार ने 18 अगस्त को जारी अधिसूचना में कई प्रतियोगी परीक्षाओं और उनसे जुड़ी चयन प्रक्रियाओं पर बड़ा फैसला लिया था. इसी फैसले के तहत 11वीं से 13वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती की नियुक्तियां भी रद्द की गई थीं. इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गईं. गुरुवार को इन मामलों पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने नियुक्ति रद्द करने के सरकारी आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी. अदालत ने राज्य सरकार और JPSC को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और पीएएस पति ने पक्ष रखा. दो याचिकाओं में दीपमाला समेत अन्य और सोनम कुमारी ने 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ी नियुक्ति रद्द करने के आदेश को चुनौती दी थी. वहीं सौरव सिंह और अन्य की ओर से फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती के नियुक्ति रद्द करने के फैसले को चुनौती दी गई थी.
दूसरे की नौकरी छोड़कर ज्वाइन किया, फिर आया रद्दीकरण का आदेश
मामले में याचिकाकर्ता सोनम कुमारी ने अदालत को बताया कि उन्होंने JPSC से चयन के बाद दूसरी नौकरी छोड़कर झारखंड में योगदान दिया था. उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला था और उन्होंने प्रशिक्षण भी पूरा किया. इसके बाद 18 अगस्त को सरकार की ओर से नियुक्ति रद्द करने का आदेश जारी कर दिया गया. याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क है कि भर्ती प्रक्रिया में अगर किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन उसका असर उन अभ्यर्थियों पर नहीं पड़ना चाहिए जिन्होंने निर्धारित प्रक्रिया से परीक्षा पास की और नियुक्ति के बाद सेवा में योगदान दिया. हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाओं के जरिए सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए नियुक्ति रद्द करने वाले आदेश को निरस्त करने की मांग की गई है. फिलहाल अदालत के अंतरिम आदेश से इन नियुक्तियों को लेकर आगे की कार्रवाई पर रोक लग गई है.
22 परीक्षाएं रद्द, कई भर्तियां जांच के दायरे में
सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के आधार पर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया था. सरकार के आदेश के अनुसार 22 परीक्षाओं को रद्द किया गया, जबकि छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित की गई और कई अन्य परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया. इस फैसले से पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों के सामने भी नौकरी बचाने का संकट खड़ा हो गया. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार रद्द की गई परीक्षाओं में JPSC की 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती भी शामिल हैं. JPSC 11वीं-13वीं परीक्षा से 342 अधिकारियों की नियुक्ति हुई थी, जबकि फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती में 54 पदों पर नियुक्ति का उल्लेख सरकारी भर्ती विवरण में है. सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और भविष्य में अनियमितताओं को रोकने के लिए परीक्षा सुधार से जुड़े कदम उठाने की भी बात कही है. इस बीच नियुक्त अभ्यर्थियों की ओर से अदालत का रुख किए जाने के बाद पूरा मामला अब न्यायिक प्रक्रिया में पहुंच गया है.
अगली सुनवाई पर टिकी नजर
हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब राज्य सरकार और JPSC को अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा. अगली सुनवाई 15 सितंबर को प्रस्तावित है. ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार की ओर से दाखिल जवाब और अदालत की आगे की कार्यवाही इस मामले की दिशा तय करेगी. फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि नियुक्तियां रद्द करने के सरकारी आदेश पर अगले आदेश तक रोक लग चुकी है. इससे उन अभ्यर्थियों को तत्काल राहत मिली है, जिनकी नौकरी सरकार के 18 अगस्त के फैसले के बाद संकट में आ गई थी. मामले की अगली सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि नियुक्तियां रद्द करने के सरकार के फैसले को लेकर उठाई गई आपत्तियों और सरकार के पक्ष में क्या कानूनी आधार हैं. इसलिए 15 सितंबर की सुनवाई को इस पूरे विवाद के अगले महत्वपूर्ण पड़ाव के तौर पर देखा जा रहा है.




