ट्रेन में खाना क्यों नहीं ले रहे यात्री? IRCTC ने बताया कारण, 30% तक पहुंचा आंकड़ा
प्रीमियम ट्रेनों वंदे भारत, राजधानी, शताब्दी और दूरंतो में भोजन नहीं लेने वाले यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. IRCTC के मुताबिक करीब 25 से 30 फीसदी यात्री अब Meal Opt-Out का विकल्प चुन रहे हैं.

Indian Railways Catering News: भारतीय रेल की प्रीमियम ट्रेनों जैसे वंदे भारत एक्सप्रेस, राजधानी एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस और दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रा करने वाले यात्रियों के बीच अब भोजन नहीं लेने का विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. टिकट बुकिंग के दौरान यात्रियों को कैटरिंग सेवा चुनने या उसे ऑप्ट-आउट करने की सुविधा मिलती है. IRCTC के अनुसार, टिकट बुक कराने वाले यात्रियों में भोजन का विकल्प नहीं चुनने वालों की संख्या बढ़ रही है. कंपनी ने पहली तिमाही के नतीजों के बाद आयोजित अर्निंग कॉल में बताया कि प्रीमियम ट्रेनों में करीब 25 से 30 फीसदी यात्री भोजन का विकल्प नहीं चुन सकते हैं. इसके पीछे भोजन की गुणवत्ता के साथ-साथ यात्रियों को मिल रही अन्य खानपान विकल्पों की सुविधा को भी एक वजह माना जा रहा है.
प्रीमियम ट्रेनों में बढ़ रहा है Meal Opt-Out का चलन
वंदे भारत, राजधानी, शताब्दी और दूरंतो जैसी प्रीमियम ट्रेनों में टिकट बुकिंग के समय यात्रियों को भोजन और कैटरिंग सेवा का विकल्प दिया जाता है. पहले इन ट्रेनों में टिकट के साथ भोजन लेना अनिवार्य हुआ करता था और इसका शुल्क टिकट में ही शामिल रहता था. लेकिन यात्रियों की शिकायतों और बदलती मांग को देखते हुए रेलवे ने बाद में भोजन नहीं लेने यानी ऑप्ट-आउट करने की सुविधा शुरू की. अब इसका इस्तेमाल करने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ रही है. IRCTC के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल हिमालयन ने अर्निंग कॉल के दौरान बताया कि कंपनी के माध्यम से टिकट बुक कराने वाले यात्रियों में भोजन का विकल्प नहीं चुनने वालों की संख्या बढ़ी है. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यात्री किस खास वजह से भोजन का विकल्प छोड़ रहे हैं.
25 से 30 फीसदी यात्री नहीं चुन रहे भोजन
अर्निंग कॉल के दौरान भोजन के ऑप्ट-आउट से जुड़े सवाल पर IRCTC के सीएमडी राहुल हिमालयन ने बताया कि प्रीमियम ट्रेनों में करीब 15 से 30 फीसदी यात्री भोजन का विकल्प नहीं चुन रहे हैं. बाद में उन्होंने अपने अनुमान को संशोधित करते हुए कहा कि यह आंकड़ा 25 से 30 फीसदी के बीच हो सकता है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह एक आकस्मिक आंकड़ा है और इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है. यानी अंतिम और सत्यापित आंकड़ा अलग हो सकता है. इसके बावजूद IRCTC की ओर से दी गई जानकारी यह संकेत देती है कि प्रीमियम ट्रेनों में यात्रियों की खानपान संबंधी पसंद बदल रही है. अब कई यात्री टिकट बुक करते समय ट्रेन की कैटरिंग सेवा लेने के बजाय अपने हिसाब से भोजन की व्यवस्था करना पसंद कर रहे हैं.
भोजन की गुणवत्ता के साथ बढ़े हैं दूसरे विकल्प
प्रीमियम ट्रेनों में भोजन का विकल्प नहीं चुनने के पीछे भोजन की गुणवत्ता को एक संभावित वजह माना जा रहा है. शुरुआत में जब इन ट्रेनों में कैटरिंग सेवा अनिवार्य थी, तब यात्रियों को टिकट के साथ भोजन उपलब्ध कराया जाता था. समय के साथ खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आईं और इसके बाद यात्रियों को भोजन नहीं लेने का विकल्प दिया गया. हालांकि IRCTC का कहना है कि केवल भोजन की गुणवत्ता ही इसके लिए जिम्मेदार नहीं है. यात्रियों के पास अब पहले की तुलना में ज्यादा विकल्प मौजूद हैं. कई यात्री ऑनलाइन कैटरिंग सेवाओं के माध्यम से अपनी पसंद का खाना ट्रेन में मंगवा लेते हैं. ऐसे में यात्रियों को ट्रेन की निर्धारित कैटरिंग पर निर्भर रहने की जरूरत कम हुई है. यही वजह है कि Meal Opt-Out का ट्रेंड लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है.
हर साल करीब 58 करोड़ मील सर्व करता है IRCTC
IRCTC के सीएमडी के मुताबिक कंपनी हर साल करीब 58 करोड़ मील यात्रियों को सर्व करती है. यानी प्रतिदिन औसतन करीब 18 लाख मील परोसे जाते हैं. इतने बड़े स्तर पर कैटरिंग संचालन के बावजूद भोजन से संबंधित शिकायतों की संख्या अपेक्षाकृत कम बताई गई है. कंपनी के अनुसार रोजाना परोसे जाने वाले भोजन की तुलना में करीब 300 से 500 मामलों में शिकायतें सामने आती हैं. IRCTC ने इसे लगभग 0.0008 फीसदी की शिकायत दर बताया है. कंपनी का कहना है कि सभी शिकायतें भोजन की गुणवत्ता से संबंधित नहीं होतीं. कुछ शिकायतें अतिरिक्त पानी, बेबी फूड जैसी जरूरतों या ट्रेन स्टाफ के व्यवहार से जुड़ी होती हैं. IRCTC के अनुसार यात्रियों के फीडबैक के आधार पर कैटरिंग सेवा को लगातार बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है.
ओवरचार्जिंग रोकने के लिए ई-पैंट्री मॉडल
यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने और खानपान सेवा में पारदर्शिता लाने के लिए IRCTC ने ई-पैंट्री मॉडल भी शुरू किया है. यह व्यवस्था फिलहाल 50 से अधिक ट्रेनों में लागू की जा चुकी है और इसे जल्द करीब 100 ट्रेनों तक विस्तार देने की योजना है. ई-पैंट्री के तहत यात्री ट्रेन में मौजूद पेंट्री कॉन्ट्रैक्टर से मोबाइल ऐप या QR कोड के जरिए भोजन ऑर्डर कर सकते हैं. इस व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों को सुविधाजनक तरीके से भोजन उपलब्ध कराने के साथ ओवरचार्जिंग की समस्या को नियंत्रित करना भी है. डिजिटल ऑर्डरिंग सिस्टम के जरिए यात्रियों को भोजन की कीमत और ऑर्डर की जानकारी पहले से मिल सकती है. इससे ट्रेन में खानपान सेवा को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
यात्रियों की बदलती पसंद बनी IRCTC के लिए चुनौती
प्रीमियम ट्रेनों में भोजन नहीं लेने वाले यात्रियों की बढ़ती संख्या IRCTC के लिए बदलती यात्री पसंद का संकेत है. एक तरफ कंपनी बड़े पैमाने पर कैटरिंग सेवा उपलब्ध करा रही है, वहीं दूसरी तरफ यात्री अपनी पसंद के अनुसार बाहर से या ऑनलाइन भोजन मंगाने को प्राथमिकता दे रहे हैं. इसका मतलब है कि भविष्य में रेलवे कैटरिंग सेवा में गुणवत्ता, कीमत, विविधता और सुविधा पर और अधिक ध्यान देना पड़ सकता है. IRCTC का कहना है कि भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायतों की दर काफी कम है, लेकिन यात्रियों के पास अब खानपान के ज्यादा विकल्प मौजूद हैं. ऐसे में यात्रियों को बेहतर और भरोसेमंद भोजन उपलब्ध कराने के साथ उनकी पसंद के अनुरूप विकल्प देना भी महत्वपूर्ण होगा. ई-पैंट्री जैसी डिजिटल व्यवस्था इसी दिशा में एक कदम मानी जा रही है.


