16 मंजिल की बिल्डिंग, सामने रिटायर्ड IAS का घर और बिल्डर की धमकी! पंचमुखी हाइट्स पर क्यों मचा बवाल?
रांची के चेशायर होम रोड स्थित पंचमुखी हाइट्स की 16 मंजिला इमारत को लेकर विवाद गहरा गया है. रिटायर्ड IAS अधिकारी मनोज जायसवाल ने निर्माण की वैधता, नक्शे, RERA मंजूरी और झारखंड बिल्डिंग बायलॉज के पालन पर सवाल उठाए हैं. मामला अदालत में है और निर्माण अंतिम फैसले के जोखिम पर जारी है.

Ranchi: चेशायर होम रोड पर बन रही पंचमुखी हाइट्स की 16 मंजिला इमारत को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. एक तरफ बहुमंजिली इमारत का निर्माण हो रहा है, तो दूसरी तरफ इसके ठीक बगल में रहने वाले रिटायर्ड IAS अधिकारी मनोज जायसवाल ने निर्माण की वैधता पर सवाल उठाए हैं. आरोप है कि इस प्रोजेक्ट में झारखंड बिल्डिंग बायलॉज के नियमों की अनदेखी की गई है. मामला अदालत तक पहुंच चुका है और निर्माण को लेकर अंतिम फैसले का इंतजार है. इस बीच मनोज जायसवाल ने अखबार में इश्तेहार देकर लोगों को पंचमुखी हाइट्स में निवेश करने को लेकर सावधान किया है. उनका घर निर्माणाधीन इमारत से सटा हुआ है और उन्हें आशंका है कि इससे उनके घर तक पहुंचने वाली धूप, ताजी हवा और पानी पर असर पड़ेगा. विवाद इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि मनोज जायसवाल उस प्रमंडल के कमिश्नर रह चुके हैं. अब एक रिटायर्ड IAS अधिकारी और बिल्डर के बीच टकराव ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
‘हम बिल्डर हैं, हमारी मर्जी चलेगी’… रिटायर्ड IAS को किस बात की चुनौती?
पंचमुखी हाइट्स विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा उस कथित धमकी की हो रही है, जिसमें बिल्डर की ताकत और रसूख का हवाला देकर अपनी मर्जी से निर्माण करने की बात कही गई. आरोप है कि विरोध करने वालों को यह संदेश दिया गया कि पैसा और मसल पावर मजबूत है, इसलिए बिल्डिंग भी बनेगी और वह भी 16 मंजिल की. नियम-कानून चाहे जो कहें, निर्माण अपनी शर्तों पर होगा. इतना ही नहीं, आरोपों के मुताबिक कागजात और नियमों को भी अपने हिसाब से मैनेज करने की बात कही गई. इस पूरे मामले में जिस व्यक्ति ने आवाज उठाई है, वे रिटायर्ड IAS अधिकारी मनोज जायसवाल हैं. वे इस प्रमंडल के कमिश्नर रह चुके हैं, लेकिन आज अपने घर और जमीन से जुड़े अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उनका मकान पंचमुखी हाइट्स के प्लॉट से बिल्कुल सटा हुआ है. उनका आरोप है कि 16 मंजिला इमारत बनने से उनके घर की धूप, हवा और पानी प्रभावित होंगे. ऐसे में यह विवाद अब सिर्फ दो पक्षों के बीच का टकराव नहीं, बल्कि निर्माण के अधिकार और आसपास रहने वाले लोगों की परेशानी का मामला बन गया है.
आसपास चार मंजिल के मकान, फिर यहां 16 मंजिला इमारत कैसे?
पंचमुखी हाइट्स का निर्माण रांची के चेशायर होम रोड स्थित खाता नंबर 157 के प्लॉट नंबर 714 में हो रहा है. शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि इस बहुमंजिली इमारत के निर्माण में झारखंड बिल्डिंग बायलॉज के नियमों की अनदेखी की गई है और इसका नक्शा भी वैध नहीं है. निर्माण की ऊंचाई को लेकर सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है. मनोज जायसवाल का कहना है कि आसपास के इलाके में जहां चार मंजिल तक के मकान और अपार्टमेंट दिखाई देते हैं, वहां 16 मंजिला इमारत कैसे बनाई जा रही है? आखिर इस निर्माण को किस आधार पर मंजूरी मिली? सड़क की चौड़ाई से लेकर भवन की ऊंचाई तक, क्या सभी निर्धारित शर्तों का पालन किया गया है? सवाल यह भी है कि अगर निर्माण नियमों के मुताबिक नहीं है, तो नक्शा पास कैसे हुआ? किसी व्यक्ति ने अपनी जमीन पर घर बनाया और वर्षों तक वहां रहा. अब उसी के ठीक बगल में 16 मंजिला इमारत खड़ी होने लगे, तो उसकी परेशानी को नजरअंदाज कैसे किया जा सकता है? यही सवाल इस पूरे विवाद के केंद्र में है. हालांकि, निर्माण की वैधता और नियमों के उल्लंघन से जुड़े आरोपों की पुष्टि संबंधित स्वीकृतियों और आधिकारिक रिकॉर्ड से होनी बाकी है.
मामला कोर्ट में, निर्माण जारी… अंतिम फैसला आने पर क्या होगा?
पंचमुखी हाइट्स का मामला अदालत में पहुंच चुका है. इस मामले में अदालत ने निर्माण पर पूर्ण रोक नहीं लगाई है, लेकिन निर्माण को अंतिम फैसले के जोखिम पर किए जाने की बात कही है. इसका मतलब है कि फिलहाल निर्माण जारी रहने का रास्ता खुला है, लेकिन अंतिम निर्णय आने के बाद परिस्थितियां बदल सकती हैं. अगर अदालत का फैसला निर्माण के खिलाफ जाता है, तो उसके कानूनी परिणाम हो सकते हैं. यही वजह है कि इस प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले संभावित खरीदारों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. मनोज जायसवाल ने अखबार में इश्तेहार प्रकाशित कर लोगों को पंचमुखी हाइट्स में निवेश करने से पहले सावधान रहने की अपील की है. उनका कहना है कि निर्माण की वैधता को लेकर विवाद चल रहा है, ऐसे में खरीदारों को पूरी जानकारी के साथ फैसला लेना चाहिए. सवाल यह भी है कि क्या फ्लैट खरीदने वालों को अदालत में चल रहे मामले और निर्माण से जुड़ी आपत्तियों की जानकारी दी जा रही है? किसी प्रोजेक्ट में पैसा लगाने से पहले उसकी मंजूरी, कानूनी स्थिति और संबंधित दस्तावेजों की जांच जरूरी होती है. पंचमुखी हाइट्स के मामले में भी यही पहलू अब चर्चा में है.
RERA की मंजूरी, वीकर सेक्शन के फ्लैट और 20 फीट सड़क का क्या है मामला?
पंचमुखी हाइट्स को लेकर सवाल सिर्फ इमारत की ऊंचाई तक सीमित नहीं हैं. प्रोजेक्ट में RERA से कितने फ्लैटों की मंजूरी ली गई है और अलग-अलग श्रेणियों के लिए स्वीकृत फ्लैटों की वास्तविक स्थिति क्या है, इसे लेकर भी जानकारी सामने आनी बाकी है. खास तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी वीकर सेक्शन के नाम पर स्वीकृत फ्लैटों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. क्या ये फ्लैट वास्तव में उसी श्रेणी के लोगों के लिए उपलब्ध हैं, जिसके आधार पर मंजूरी ली गई? क्या स्वीकृत नक्शे और वास्तविक निर्माण में समानता है? इन सवालों का जवाब RERA में दर्ज दस्तावेजों, स्वीकृत नक्शे और मौके पर बनी इमारत की स्थिति के मिलान से ही सामने आ सकता है. इसके अलावा 20 फीट सड़क का मुद्दा भी इस विवाद का अहम हिस्सा है. भवन की ऊंचाई, सड़क की चौड़ाई, सेटबैक और दूसरी तकनीकी शर्तों को लेकर बिल्डिंग बायलॉज क्या कहता है और इस प्रोजेक्ट में उनका पालन हुआ या नहीं, इसकी पड़ताल जरूरी है. फिलहाल इन बिंदुओं पर उठाए गए सवालों के जवाब संबंधित विभागों और आधिकारिक दस्तावेजों के जरिए सामने आने चाहिए.
अपनी जमीन पर निर्माण का अधिकार, लेकिन क्या आसपास के लोगों की परेशानी मायने नहीं रखती?
चेशायर होम रोड और रानी बागान इलाके में रहने वाले लोगों के लिए पंचमुखी हाइट्स का विवाद कई बुनियादी सवाल खड़े करता है. अगर कोई व्यक्ति अपनी जमीन पर घर बनाता है, तो वह वर्षों तक धूप, हवा और पानी के साथ उस जगह पर जीवन बिताता है. लेकिन बाद में उसी के आसपास बहुमंजिली इमारत खड़ी होने लगे, तो उसके जीवन पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है. मनोज जायसवाल का घर प्रोजेक्ट से सटा हुआ है, इसलिए उनकी आपत्ति सीधे उनके निजी जीवन और आवास से जुड़ी है. हालांकि, इस मामले में अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले निर्माण की स्वीकृतियों, नक्शे और लागू नियमों की जांच जरूरी है. अब सवाल नगर निगम और संबंधित विभागों से भी है कि पंचमुखी हाइट्स को किन शर्तों पर मंजूरी दी गई और मौके पर निर्माण उन शर्तों के अनुरूप है या नहीं. इस पूरे मामले में बिल्डर का पक्ष सामने आना भी जरूरी है. 20 फीट सड़क, नक्शे की मंजूरी, RERA के फ्लैट और बिल्डिंग बायलॉज से जुड़े सवालों की पड़ताल अब आगे बढ़ेगी. पंचमुखी हाइट्स की कहानी में अभी कई परतें खुलनी बाकी हैं.


