जिस NCPI में शामिल होने जा रहे हैं TMC के बागी सांसद, आखिर इस पार्टी का क्या है बंगाल कनेक्शन?
भारतीय राजनीति में अक्सर बड़े दलों के बीच गठबंधन, टूट और विलय की खबरें सुर्खियां बनती हैं, लेकिन इस बार चर्चा एक ऐसी पार्टी को लेकर है जिसका नाम अधिकांश लोगों ने शायद पहली बार सुना होगा.

West Bengal: भारतीय राजनीति में अक्सर बड़े दलों के बीच गठबंधन, टूट और विलय की खबरें सुर्खियां बनती हैं, लेकिन इस बार चर्चा एक ऐसी पार्टी को लेकर है जिसका नाम अधिकांश लोगों ने शायद पहली बार सुना होगा. नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) अचानक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है. इसकी वजह है तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों का इस पार्टी में विलय का दावा. यदि यह विलय आधिकारिक रूप से मान्य हो जाता है, तो NCPI लोकसभा में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत बन सकती है. दिलचस्प बात यह है कि पश्चिम बंगाल के हावड़ा में पंजीकृत यह पार्टी अब तक राष्ट्रीय स्तर पर लगभग अज्ञात रही है और मुख्य रूप से त्रिपुरा में अपनी राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश करती रही है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर NCPI क्या है, इसकी स्थापना किसने की, इसका बंगाल से क्या संबंध है और TMC के बागी सांसदों के लिए यह पार्टी इतनी अहम क्यों बन गई है.
TMC के बागी सांसदों ने क्यों चुनी NCPI?
तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों द्वारा NCPI में विलय का दावा भारतीय राजनीति की सबसे चौंकाने वाली घटनाओं में गिना जा रहा है. सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर बताया है कि उनका समूह अब NCPI का हिस्सा बन चुका है और वह NDA का समर्थन करेगा. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों को ध्यान में रखकर उठाया गया है. संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत किसी दल के दो-तिहाई सदस्य यदि किसी दूसरी पार्टी में विलय करते हैं, तो उन्हें अयोग्यता से छूट मिल सकती है. लोकसभा में TMC के 28 सांसद हैं और 20 सांसदों का आंकड़ा इस आवश्यक संख्या से अधिक है. यही कारण है कि बागी सांसदों ने किसी नए दल का गठन करने के बजाय NCPI जैसी पहले से पंजीकृत पार्टी को चुना. इस कदम के दूरगामी राजनीतिक प्रभाव पड़ सकते हैं और बंगाल की राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
क्या है NCPI और कब हुई थी इसकी स्थापना?
नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है. इसे जनवरी 2023 में भारत निर्वाचन आयोग के साथ आधिकारिक तौर पर पंजीकृत किया गया था. यह उन हजारों राजनीतिक दलों में शामिल है जो चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज तो हैं, लेकिन अभी तक किसी राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नहीं कर सके हैं. पार्टी का मुख्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में दर्ज है. हालांकि, इसके राजनीतिक प्रयास मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत, खासकर त्रिपुरा में देखने को मिले हैं. पार्टी का चुनाव चिन्ह सात किरणों वाली पेन की निब है, जो उसकी पहचान का प्रमुख प्रतीक है. स्थापना के बाद से NCPI ने खुद को एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की, लेकिन उसे अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिल पाया. अब TMC सांसदों के संभावित विलय के बाद यह पार्टी अचानक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है.
कौन हैं NCPI की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्वेली कुंडू?
NCPI की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्वेली कुंडू हैं, जिनके नेतृत्व में पार्टी ने अपने शुरुआती राजनीतिक अभियान शुरू किए थे. हालांकि राष्ट्रीय राजनीति में उनका नाम अभी तक बहुत चर्चित नहीं रहा है, लेकिन पार्टी संगठन के विस्तार और चुनावी गतिविधियों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है. पार्टी के आधिकारिक ढांचे में श्वेली कुंडू को शीर्ष नेतृत्व की जिम्मेदारी दी गई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TMC के बागी सांसदों के पार्टी में शामिल होने की स्थिति में उनके सामने संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ी चुनौती होगी. अब तक सीमित राजनीतिक प्रभाव रखने वाली NCPI को अचानक राष्ट्रीय मीडिया और संसद के केंद्र में आने का अवसर मिल सकता है. ऐसे में पार्टी नेतृत्व को नए सांसदों और उनके राजनीतिक प्रभाव को संतुलित करते हुए संगठन की दिशा तय करनी होगी. आने वाले समय में श्वेली कुंडू की भूमिका पार्टी के भविष्य को निर्धारित करने में बेहद अहम मानी जाएगी.
हावड़ा से त्रिपुरा तक कैसे फैला पार्टी का नेटवर्क?
हालांकि NCPI का पंजीकरण पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में हुआ है, लेकिन इसकी शुरुआती राजनीतिक गतिविधियां मुख्य रूप से त्रिपुरा में देखने को मिलीं. पार्टी ने वहां स्थानीय स्तर पर संगठन खड़ा करने और चुनावी राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश की. त्रिपुरा में शांतनु साहा पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं, जबकि हावड़ा के तरुण कुमार रॉय को संगठन के संचालन से जुड़ा महत्वपूर्ण चेहरा माना जाता है. पार्टी ने खुद को क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय दलों के विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया, लेकिन उसे सीमित सफलता मिली. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल में पंजीकरण और पूर्वोत्तर में सक्रियता का यह मॉडल पार्टी को व्यापक पहचान दिलाने की रणनीति का हिस्सा था. अब TMC के बागी सांसदों के संभावित प्रवेश से पार्टी का बंगाल कनेक्शन और अधिक मजबूत होता दिखाई दे रहा है.
त्रिपुरा चुनाव में कैसा रहा था NCPI का प्रदर्शन?
2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव NCPI के लिए पहला बड़ा चुनावी परीक्षण थे. पार्टी ने तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें कैलाशहर से जहांगीर अली, चावमानु से बरजेदा त्रिपुरा और अंबासा से कृष्ण कुमार देबबर्मा शामिल थे. हालांकि चुनावी मैदान में उतरने के बावजूद पार्टी को बहुत कम वोट मिले और वह किसी भी सीट पर प्रभावी प्रदर्शन नहीं कर सकी. न तो पार्टी कोई सीट जीत सकी और न ही राज्य की राजनीति में कोई उल्लेखनीय प्रभाव छोड़ पाई. यही कारण है कि राष्ट्रीय स्तर पर NCPI का नाम लगभग अज्ञात रहा. लेकिन वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम ने इस पार्टी की स्थिति पूरी तरह बदल दी है. यदि TMC के 20 सांसदों का विलय मान्य हो जाता है, तो यही पार्टी लोकसभा में दर्जनों सांसदों का प्रतिनिधित्व करती नजर आएगी, जो भारतीय राजनीति के लिए एक असाधारण बदलाव माना जाएगा.
NDA की राजनीति में कितना बड़ा बदलाव ला सकता है यह विलय?
यदि लोकसभा अध्यक्ष द्वारा TMC सांसदों और NCPI के विलय को मान्यता मिल जाती है, तो संसद में राजनीतिक समीकरण काफी बदल सकते हैं. 20 सांसदों के साथ NCPI लोकसभा के प्रमुख दलों में शामिल हो जाएगी और NDA को अतिरिक्त मजबूती मिलेगी. इससे सत्तारूढ़ गठबंधन की संख्या और बढ़ सकती है, जिससे सरकार को महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में सहायता मिल सकती है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा लंबे समय से संसद में अपने समर्थन आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है और यह घटनाक्रम उसी दिशा में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है. दूसरी ओर, TMC के लिए यह बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा. यदि बागी सांसद चुनाव आयोग में असली TMC होने का दावा भी पेश करते हैं, तो मामला और जटिल हो सकता है. आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल बंगाल ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है.

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