कल वोटिंग…आज मंदिर! हेमंत सोरेन vs हिमंता सरमा | किसको मिलेगा आशीर्वाद?
कल यानी 9 अप्रैल को असम विधानसभा चुनाव में वोटिंग होने जा रही है. लेकिन उससे ठीक पहले दोनों राज्य के मुख्यमंत्रियों ने मंदिरों का रुख किया, जो केवल धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि चुनावी रणनीति का हिस्सा लग रही है.

Ranchi: कल यानी 9 अप्रैल को असम विधानसभा चुनाव में वोटिंग होने जा रही है. लेकिन उससे ठीक पहले दोनों राज्य के मुख्यमंत्रियों ने मंदिरों का रुख किया, जो केवल धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि चुनावी रणनीति का हिस्सा लग रही है. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन असम के गुवाहाटी स्थित मां कामाख्या मंदिर पहुंचे, जबकि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचे.
हेमंत सोरेन का कामाख्या मां मंदिर दौरा
7 अप्रैल को हेमंत सोरेन गुवाहाटी पहुंचे और मां कामाख्या के दरबार में विधि-विधान से पूजा की. वेद मंत्रों के साथ उन्होंने मां के चरणों में झुककर झारखंड की तरक्की और चुनाव में सफलता का आशीर्वाद मांगा. यह यात्रा महज धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि असम चुनाव में विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है.
हिमंता सरमा का बाबा बैद्यनाथ धाम दौरा
वहीं, बुधवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा देवघर पहुंचे. भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया. उन्होंने सत्संग आश्रम में पूजा-अर्चना के बाद सीधे बाबा बैद्यनाथ धाम में माथा टेका. मंदिर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. उनके साथ भाजपा के वरिष्ठ सांसद निशिकांत दुबे और उनकी पत्नी भी मौजूद रही. पूजा के बाद हिमंता ने मीडिया से कोई सवाल-जवाब नहीं किया और कहा – “अभी चुनाव है, आचार संहिता का पालन कर रहा हूं. जीत के बाद खुलकर बात करेंगे.”
चुनावी रणनीति या आशीर्वाद की दौड़?
दोनों मुख्यमंत्री अलग-अलग मंदिरों में गए, लेकिन मकसद एक ही प्रतीत हो रहा है – चुनाव में जीत का आशीर्वाद. हिमंता सरमा असम में भाजपा की वापसी के लिए जोर लगा रहे हैं, जबकि हेमंत सोरेन विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने के लिए रणनीतिक रूप से मंदिर पहुंचे. दोनों नेताओं की यह यात्रा यह दर्शाती है कि राजनीतिक रणनीति अब केवल सभाओं और प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक स्थानों पर आशीर्वाद लेने तक पहुंच गई है.
जनता का फैसला तय करेगा परिणाम
अब सवाल यह है कि भगवान का आशीर्वाद किसे मिलेगा – हेमंत सोरेन को या हिमंता सरमा को? 9 अप्रैल को असम की जनता मतदान करेगी और वही तय करेगा कि मां कामाख्या और बाबा बैद्यनाथ का आशीर्वाद किसकी झोली में भरा जाएगा. यह चुनाव केवल राजनीतिक जीत-हार का नहीं, बल्कि रणनीति और विश्वास का भी परिणाम साबित होगा.

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