रांची : कैबिनेट के फैसले पर बवाल, सचिवालय सेवा संघ ने कार्मिक सचिव के खिलाफ किया प्रदर्शन
झारखंड में कैबिनेट के फैसले के खिलाफ सचिवालय सेवा संघ के अधिकारियों ने प्रोजेक्ट भवन परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. संघ का आरोप है कि प्रोन्नति नियमों में संशोधन कर समयसीमा 8 वर्ष से बढ़ाकर 16 वर्ष कर दी गई है, जिससे उनके करियर पर प्रतिकूल असर पड़ेगा.

Ranchi: झारखंड सरकार के कैबिनेट द्वारा सचिवालय सेवा अधिकारियों की प्रोन्नति नियमावली में किए गए संशोधन के खिलाफ राजधानी रांची में बड़ा विरोध देखने को मिला. प्रोजेक्ट भवन परिसर में सचिवालय सेवा संघ के सैकड़ों अधिकारियों ने प्रदर्शन करते हुए कार्मिक सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नए संशोधन से उनकी प्रोन्नति अवधि 8 वर्ष से बढ़ाकर 16 वर्ष कर दी गई है, जिससे उनके करियर पर गंभीर असर पड़ेगा. अधिकारियों ने सरकार से कैबिनेट के फैसले को वापस लेने और पूर्व व्यवस्था बहाल करने की मांग की है.
प्रोजेक्ट भवन में सचिवालय सेवा संघ का जोरदार प्रदर्शन
झारखंड सचिवालय सेवा संघ के आह्वान पर शुक्रवार को प्रोजेक्ट भवन परिसर में सैकड़ों की संख्या में सचिवालय कर्मी एकजुट हुए और कैबिनेट के फैसले के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने कार्मिक सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो के खिलाफ नारेबाजी करते हुए “दादागीरी नहीं चलेगी” जैसे नारे लगाए. इस दौरान पूरे परिसर में दिनभर गहमागहमी का माहौल बना रहा और प्रशासनिक गतिविधियां प्रभावित होती दिखीं.
संघ का आरोप है कि राज्य सरकार ने हाल ही में कैबिनेट के माध्यम से कार्मिक विभाग के पुराने संकल्प संख्या-3286 में संशोधन कर सचिवालय सेवा को उसके दायरे से बाहर कर दिया है. उनका कहना है कि पहले निर्धारित नियमों के तहत प्रोन्नति की समयसीमा 8 वर्ष थी, जिसे अब बढ़ाकर 16 वर्ष कर दिया गया है. प्रदर्शनकारियों ने इसे कर्मचारी विरोधी और भेदभावपूर्ण निर्णय बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है.
प्रोन्नति नियम में बदलाव से बढ़ा विवाद, संघ ने लगाए गंभीर आरोप
सचिवालय सेवा संघ का कहना है कि नए संशोधन के बाद सचिवालय सेवा के अधिकारियों को लेवल-7 से लेवल-8 तक प्रोन्नति के लिए दोगुना समय यानी 16 वर्ष का इंतजार करना होगा, जबकि अन्य सेवाओं के अधिकारी कम समय में ही पदोन्नति प्राप्त कर सकते हैं. संघ ने इसे असमान अवसर और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताया है. उनका दावा है कि इससे सचिवालय सेवा के अधिकारियों के करियर विकास पर नकारात्मक असर पड़ेगा.
संघ के अनुसार, राज्य में अवर सचिव के 225 से अधिक पद रिक्त हैं, बावजूद इसके प्रोन्नति प्रक्रिया को आसान बनाने के बजाय और कठिन कर दिया गया है. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. साथ ही यह भी कहा गया है कि इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और कार्मिक विभाग की होगी.

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