TRAI का सख्त नियम: 5 Spam Calls के बाद होगा एक्शन, 1 साल तक नहीं मिलेगा SIM
“TRAI ने स्पैम और फर्जी कॉल्स पर लगाम लगाने के लिए नए सख्त नियम लागू किए हैं. अब AI सिस्टम संदिग्ध कॉलर्स की पहचान करेगा और यूजर की शिकायत के बिना भी टेलीकॉम कंपनियां कार्रवाई कर सकेंगी. बार-बार नियम तोड़ने वालों का SIM और अन्य टेलीकॉम संसाधन एक साल तक बंद किए जा सकते हैं.”

TRAI New Rule: स्पैम और फर्जी कॉल्स से परेशान मोबाइल यूजर्स के लिए टेलीकॉम रेगुलेटर TRAI ने नियमों को और सख्त किया है. नए प्रावधानों के तहत अब टेलीकॉम कंपनियों को सिर्फ यूजर की शिकायत का इंतजार नहीं करना होगा, बल्कि उनके AI और मशीन लर्निंग सिस्टम से संदिग्ध कॉल की पहचान होने पर खुद कार्रवाई करनी होगी. Jio, Airtel और Vodafone Idea (Vi) जैसे ऑपरेटर्स को संदिग्ध स्पैमर्स की पहचान, KYC डिटेल्स की जांच और उनसे जुड़े दूसरे कनेक्शनों की निगरानी करनी होगी. नियमों का उल्लंघन करने वालों के टेलीकॉम संसाधनों को कुछ समय के लिए बंद करने के साथ गंभीर या दोबारा उल्लंघन की स्थिति में लंबे समय तक डिस्कनेक्शन और ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई भी की जा सकती है.
AI सिस्टम खुद करेगा संदिग्ध कॉल की पहचान
नए नियमों में सबसे अहम बदलाव यह है कि स्पैम या फर्जी कॉल्स की पहचान के लिए टेलीकॉम कंपनियां AI और मशीन लर्निंग आधारित सिस्टम का इस्तेमाल करेंगी. अगर किसी नंबर से की गई कॉल को सिस्टम संदिग्ध स्पैम के तौर पर पहचानता है, तो कार्रवाई के लिए यूजर की शिकायत का इंतजार जरूरी नहीं होगा. यानी टेलीकॉम ऑपरेटर अपने नेटवर्क पर मौजूद डेटा और तकनीकी सिस्टम के आधार पर संदिग्ध कॉलर्स की पहचान कर सकेंगे. इसका उद्देश्य ऐसे कॉलर्स पर तेजी से कार्रवाई करना है, जो बड़ी संख्या में अनचाही या परेशान करने वाली कॉल कर रहे हैं. नए प्रावधानों के तहत संदिग्ध कॉल की जानकारी उस टेलीकॉम ऑपरेटर के साथ साझा करनी होगी, जिसके नेटवर्क से कॉल शुरू हुई थी. इससे अलग-अलग नेटवर्क पर मौजूद संदिग्ध गतिविधियों को आपस में जोड़कर कार्रवाई करना आसान हो सकेगा.
दो घंटे के अंदर शेयर करनी होगी जानकारी
TRAI के नए प्रावधानों के मुताबिक, किसी कॉल को AI या मशीन लर्निंग सिस्टम द्वारा संदिग्ध स्पैम के रूप में पहचानने के बाद उसकी जानकारी तेजी से संबंधित टेलीकॉम ऑपरेटर तक पहुंचानी होगी. नियमों के अनुसार, यह जानकारी कॉल की पहचान होने के दो घंटे के भीतर उस एक्सेस प्रोवाइडर के साथ साझा करनी होगी, जिसके नेटवर्क से कॉल शुरू हुई थी. इसके बाद ओरिजिनेटिंग एक्सेस प्रोवाइडर (OAP) की जिम्मेदारी होगी कि वह संदिग्ध कॉल करने वाले की पहचान से जुड़ी जानकारी जुटाए. इसका उद्देश्य अलग-अलग टेलीकॉम नेटवर्क के बीच जानकारी साझा करने की प्रक्रिया को तेज करना है. इससे किसी एक नेटवर्क पर संदिग्ध गतिविधि सामने आने के बाद दूसरे नेटवर्क पर भी उससे जुड़े कनेक्शनों की जांच की जा सकेगी. इस व्यवस्था के जरिए स्पैम और फर्जी कॉल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई को अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश की गई है.
एक वर्किंग डे में होगी KYC पहचान
संदिग्ध स्पैम कॉल की जानकारी मिलने के बाद ओरिजिनेटिंग एक्सेस प्रोवाइडर को तय समयसीमा में कॉल करने वाले की पहचान करनी होगी. नियमों के अनुसार, OAP को संदिग्ध कॉल मिलने के एक वर्किंग डे के भीतर संबंधित सेंडर के यूनिक KYC आइडेंटिफायर की पहचान करनी होगी. इसके बाद जरूरी जानकारी दूसरे टेलीकॉम ऑपरेटर्स के साथ साझा की जाएगी. सभी टेलीकॉम कंपनियों को भी अपने नेटवर्क पर यह जांच करनी होगी कि संदिग्ध स्पैमर से जुड़े कोई अन्य टेलीकॉम कनेक्शन मौजूद हैं या नहीं. इस जांच में पिछले 10 दिनों में इस्तेमाल किए गए कनेक्शनों को भी देखा जाएगा. इसका मकसद यह पता लगाना है कि कोई व्यक्ति अलग-अलग मोबाइल नंबर या कनेक्शन का इस्तेमाल करके लगातार स्पैम कॉल तो नहीं कर रहा. इस प्रक्रिया से एक ही व्यक्ति से जुड़े कई कनेक्शनों की पहचान कर उन पर एक साथ कार्रवाई करना संभव होगा.
10 दिनों में 5 कॉल मिलने पर होगी कार्रवाई
नए नियमों में कार्रवाई के लिए एक खास सीमा भी निर्धारित की गई है. अगर जांच के दौरान यह पाया जाता है कि पिछले 10 दिनों में किसी सेंडर की पांच या उससे अधिक कॉल्स को निर्धारित AI सिस्टम ने संदिग्ध स्पैम के रूप में पहचान लिया है, तो संबंधित ओरिजिनेटिंग एक्सेस प्रोवाइडर्स को उसके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी. पहली बार इस तरह की घटना सामने आने पर सेंडर को उपलब्ध कराए गए टेलीकॉम संसाधनों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है. इसमें आउटगोइंग सेवाएं भी शामिल हैं. इस व्यवस्था का उद्देश्य उन नंबरों पर कार्रवाई करना है, जिनसे लगातार संदिग्ध कॉल गतिविधि सामने आ रही है. नियमों के तहत कार्रवाई केवल एक नंबर तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि जांच में सामने आए संबंधित टेलीकॉम संसाधनों और कनेक्शनों को भी देखा जा सकता है.
पहली बार उल्लंघन पर 15 दिन तक बंद रहेंगे संसाधन
AI आधारित सिस्टम के जरिए पहली बार नियमों का उल्लंघन सामने आने पर सेंडर के टेलीकॉम संसाधनों को 15 दिनों के लिए बंद किया जा सकता है. इसमें आउटगोइंग सर्विस के साथ अन्य संबंधित टेलीकॉम संसाधन भी शामिल हो सकते हैं. इस कार्रवाई का उद्देश्य संदिग्ध स्पैम गतिविधि को तुरंत रोकना है. यानी अगर किसी सेंडर की कॉल गतिविधि निर्धारित मानकों के तहत स्पैम के रूप में सामने आती है, तो संबंधित टेलीकॉम कंपनियां उसके कनेक्शन पर प्रतिबंध लगा सकती हैं. कार्रवाई के दौरान संबंधित नंबर से सामान्य आउटगोइंग कॉलिंग प्रभावित होगी. यह प्रावधान खास तौर पर उन मामलों में लागू होगा, जहां AI और मशीन लर्निंग आधारित सिस्टम से लगातार संदिग्ध कॉल गतिविधि की पहचान होती है. इसके जरिए टेलीकॉम कंपनियों को यूजर शिकायतों के अलावा तकनीकी संकेतों के आधार पर भी कार्रवाई करने की व्यवस्था दी गई है.
दोबारा उल्लंघन पर एक साल तक डिस्कनेक्शन
अगर कोई सेंडर पहली कार्रवाई के बाद दोबारा इसी तरह का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ ज्यादा सख्त कदम उठाया जा सकता है. नए प्रावधानों के अनुसार, दोबारा नियम तोड़ने की घटनाओं में संबंधित सेंडर के सभी टेलीकॉम संसाधनों को एक साल तक डिस्कनेक्ट किया जा सकता है. इसमें SIM के साथ PRI/SIP ट्रंक जैसे संसाधन भी शामिल हो सकते हैं. इसका मतलब है कि कार्रवाई केवल उस एक मोबाइल नंबर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जांच में संबंधित सेंडर से जुड़े दूसरे टेलीकॉम संसाधनों पर भी असर पड़ सकता है. इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य बार-बार स्पैम या संदिग्ध कॉल करने वाले सेंडर्स को टेलीकॉम नेटवर्क का इस्तेमाल करने से रोकना है. गंभीर मामलों में संबंधित टेलीकॉम कंपनियां पुलिस या अन्य कानूनी एजेंसियों के साथ भी मामला साझा कर सकती हैं.
एक साल तक नया SIM या कनेक्शन नहीं मिलेगा
नियमों के तहत बार-बार स्पैम या फर्जी कॉल से जुड़े पाए जाने वाले सेंडर्स को ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान भी है. ब्लैकलिस्ट किए गए व्यक्ति को तय अवधि के दौरान किसी भी टेलीकॉम कंपनी से नया SIM या टेलीकॉम कनेक्शन नहीं दिया जाएगा. नियमों के मुताबिक यह अवधि एक साल तक हो सकती है. कार्रवाई के दौरान संबंधित व्यक्ति का मौजूदा कोई नंबर सीमित रूप से उपलब्ध रह सकता है, लेकिन उससे आउटगोइंग कॉलिंग की सुविधा बंद की जा सकती है. ऐसी स्थिति में नंबर का इस्तेमाल मुख्य रूप से आपातकालीन सेवाओं तक पहुंचने के लिए किया जा सकता है. इस प्रावधान का उद्देश्य यह रोकना है कि कोई व्यक्ति पुराने नंबर या कनेक्शन पर कार्रवाई होने के बाद तुरंत नया SIM लेकर स्पैम कॉलिंग फिर से शुरू कर दे.
Truecaller जैसे ऐप आधिकारिक नंबर को अपने आप स्पैम नहीं बताएंगे
नए प्रावधानों में आधिकारिक और व्यावसायिक कॉल्स की पहचान को लेकर भी स्पष्टता दी गई है. केंद्र सरकार या संबंधित अथॉरिटी द्वारा निर्धारित आधिकारिक नंबर सीरीज से आने वाली कॉल्स को Truecaller जैसे कॉलर आईडी ऐप्स अपने स्तर पर सिर्फ सीरीज के आधार पर स्पैम या ब्लॉक टैग नहीं कर सकेंगे. इनमें 160 से शुरू होने वाली आधिकारिक नंबर सीरीज भी शामिल है, जिसका इस्तेमाल निर्धारित आधिकारिक और व्यावसायिक कॉल्स के लिए किया जाता है. हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि यूजर अपने फोन पर ऐसे नंबरों को ब्लॉक नहीं कर सकता. ग्राहकों को अपनी जरूरत और पसंद के अनुसार किसी भी नंबर या कॉल को ब्लॉक अथवा फिल्टर करने का विकल्प मिलता रहेगा. यानी आधिकारिक नंबरों की पहचान और यूजर के निजी कॉल-फिल्टरिंग विकल्प अलग-अलग रहेंगे.

