झारखंड में नए सिंथेटिक ड्रग का खतरा, ATS ने SSP-SP को किया अलर्ट
झारखंड में सिंथेटिक ओपिओइड ‘साइक्लोर्फिन’ के संभावित खतरे को देखते हुए ATS ने सभी जिलों को विशेष अलर्ट जारी किया है. INCB के स्पेशल अलर्ट के आधार पर जारी निर्देश में पुलिस अधीक्षकों को खुफिया तंत्र सक्रिय रखने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने को कहा गया है.

Ranchi: झारखंड में मादक पदार्थों से जुड़ी संभावित नई चुनौती के मद्देनजर एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने राज्य के सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को विशेष ड्रग अलर्ट जारी किया है. यह कदम इंटरनेशनल नारकोटिक्स कंट्रोल बोर्ड (INCB) द्वारा जारी स्पेशल अलर्ट नंबर-1 के आधार पर उठाया गया है, जिसमें सिंथेटिक ओपिओइड साइक्लोर्फिन (Cyclorphine) के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई गई है. अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के मुताबिक यह नशीला पदार्थ तेजी से फैलते “New Psychoactive Substances” की श्रेणी में आता है, जो पारंपरिक औषधियों से अलग और अधिक खतरनाक हो सकता है. इस तरह के सिंथेटिक ड्रग्स को पहचानने और उनके प्रभाव को समझने में वैश्विक सुरक्षा तंत्र एवं Early Warning सिस्टम्स की कमी चिंता का कारण बनी हुई है.
खुफिया सतर्कता और NCB-ATS समन्वय
जारी निर्देश में ATS ने सभी SSP और SP को कहा है कि वे अपने क्षेत्रों में सक्रिय खुफिया नेटवर्क को अलर्ट रखें और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखें. चूंकि साइक्लोर्फिन अभी तक NDPS एक्ट के तहत नियंत्रित पदार्थ के रूप में आधिकारिक रूप से शामिल नहीं है, इसलिए इसकी संभावित तस्करी पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है. राज्य पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वे संभावित दुरुपयोग या तस्करी की सूचना तुरंत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को भेजें, ताकि संबद्ध एजेंसियां समय रहते कार्रवाई कर सकें.
विशेषज्ञ मानते हैं कि जैसे-जैसे सिंथेटिक ड्रग्स की सूची बढ़ रही है, वैसे-वैसे इनके बारे में जागरूकता, प्रारंभिक चेतावनी तंत्र और कानूनी नियंत्रण प्रक्रियाएं भी जरूरी हैं. दुनिया भर में नयी क्लासीफिकेशन्स और New Psychoactive Substances का चलन बढ़ रहा है, जिससे पारंपरिक नशा नियंत्रण ढांचे पर दबाव बढ़ता जा रहा है. ऐसे में ATS जैसे इकाइयों के सतर्क रहने से संभावित आपूर्ति नेटवर्क को पहले ही तोड़ा जा सकता है.
राज्य पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए न सिर्फ सूचना साझा करने, बल्कि महत्वपूर्ण स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी, आवश्यक एहतियाती उपाय और ड्रग विरोधी जागरूकता अभियानों की जरूरत पर भी ज़ोर दे रही है. ऐसा मानना है कि समय रहते सतर्कता दिखाने से सिंथेटिक ड्रग तस्करी नेटवर्कों को कुचलने में मदद मिलेगी.

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