'जंतर-मंतर में देशद्रोही तत्व थे'... BJP विधायक के बयान से गरमाया पहला दिन, मंत्री बोले- पेपर लीक किसी सरकार का नहीं, माफियाओं का खेल
झारखंड विधानसभा के पहले दिन JPSC पर खूब बवाल हुआ. किसी ने छात्र आंदोलन पर 'देशद्रोही तत्व' की बात कही तो किसी ने पेपर लीक को परीक्षा माफियाओं का खेल बताया. CBI जांच, इस्तीफे की मांग, छात्रों से वार्ता और सरकार के बचाव—मानसून सत्र की शुरुआत बयानों की जबरदस्त जंग के साथ हुई.

Ranchi: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन शोक प्रस्ताव के नाम रहा, लेकिन विधानसभा परिसर के बाहर सियासत अपने पूरे उफान पर दिखी. जेपीएससी विवाद, छात्रों का आंदोलन और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने नजर आए. सबसे ज्यादा चर्चा बीजेपी विधायक रौशन लाल चौधरी के उस बयान की रही, जिसमें उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर में हुए छात्र आंदोलन को लेकर कहा कि "वहां अराजक और देशद्रोही तत्व के लोग थे." दूसरी ओर कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने पेपर लीक को किसी एक सरकार की नहीं, बल्कि पूरे देश में सक्रिय परीक्षा माफियाओं की समस्या बताया. इसी बीच बीजेपी ने सीबीआई जांच और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई, जबकि सरकार ने छात्रों से बातचीत और समाधान का भरोसा दिया. पहले ही दिन साफ हो गया कि मानसून सत्र में सबसे बड़ा राजनीतिक संघर्ष युवाओं, भर्ती परीक्षाओं और जेपीएससी को लेकर होने वाला है.
'रौशन लाल चौधरी के बयान पर सियासी हलचल
मानसून सत्र के पहले दिन सबसे विवादित बयान बीजेपी विधायक रौशन लाल चौधरी का रहा. विधानसभा पहुंचने के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर में हुए छात्र आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वहां "अराजक और देशद्रोही तत्व के लोग थे." उनके इस बयान ने पहले ही दिन राजनीतिक बहस को नई दिशा दे दी. विपक्ष और सत्ता के बीच पहले से चल रही तल्खी के बीच यह बयान चर्चा का केंद्र बन गया.
'पेपर लीक किसी सरकार का नहीं, परीक्षा माफियाओं का खेल है' : चमरा लिंडा
कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने पेपर लीक को राष्ट्रीय स्तर की समस्या बताते हुए कहा कि यह किसी एक सरकार या राजनीतिक दल की विफलता नहीं है. उनके मुताबिक, जिस तरह भू-माफिया और शिक्षा माफिया होते हैं, उसी तरह अब परीक्षा माफिया पूरे देश में सक्रिय हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं को निशाना बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि सत्ता और विपक्ष को आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर ऐसा फूलप्रूफ सिस्टम तैयार करना होगा, जिसे कोई माफिया भेद न सके. मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार छात्रों की मांगों के प्रति संवेदनशील है और जल्द ही वार्ता कर उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश करेगी.
नवीन जायसवाल बोले- CBI जांच नहीं तो मुख्यमंत्री दें इस्तीफा
बीजेपी के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने कहा कि यदि सरकार की नाक के नीचे भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियां होती रहीं तो यह सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है. उन्होंने कहा कि छात्रों की जो मांग है, वही एनडीए की भी मांग है. उन्होंने मुख्यमंत्री से अपने कार्यकाल की सभी नियुक्तियों की सीबीआई जांच कराने की सिफारिश करने की मांग की. साथ ही कहा कि यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो मुख्यमंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए. उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए छात्र आंदोलन को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया.
नीरा यादव का हमला- 'सरकार की नीयत ही खराब है'
पूर्व शिक्षा मंत्री और बीजेपी विधायक नीरा यादव ने कहा कि पिछले सात वर्षों में हुई लगभग हर भर्ती विवादों में रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना भ्रष्टाचार के काम करने की सोच ही नहीं सकती. नीरा यादव ने जेपीएससी से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करने, शेष सदस्यों पर कार्रवाई करने और पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई का सवाल उठाया. साथ ही आरोप लगाया कि सरकारी नौकरियों के लिए कथित तौर पर रेट तय किए गए थे.
सुदिव्य सोनू का पलटवार- BJP पहले अपने लोगों से जवाब मांगे
सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने बीजेपी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि बीजेपी को आक्रामक होने का नैतिक अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि पहले और दूसरे जेपीएससी की नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठे थे और उस दौर में किन लोगों के रिश्तेदारों को नौकरी मिली, यह सार्वजनिक चर्चा का विषय रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार छात्र आंदोलन को गंभीरता से ले रही है. मुख्यमंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि जांच एजेंसियां बिना किसी दबाव के काम करेंगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी. सरकार ने छात्रों से बातचीत के लिए मंत्रियों की कमेटी भी गठित कर दी है.
वार्ता पर अटकी सहमति, कैमरे के सामने बातचीत पर अड़े छात्र
इधर, जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरना और अनशन पर बैठे छात्रों और सरकार के बीच बातचीत अभी शुरू नहीं हो सकी है. छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि बातचीत मीडिया की मौजूदगी में हो या कम से कम उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए. सरकार की ओर से मंत्रियों की कमेटी गठित कर दी गई है, लेकिन समय और स्थान को लेकर अंतिम सहमति नहीं बन पाई है. ऐसे में सड़क पर आंदोलन और विधानसभा के बाहर सियासी टकराव—दोनों फिलहाल जारी हैं.

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