Purulia Kurmi Mahajutan: करम परब के मंच से शुभेंदु अधिकारी की बड़ी घोषणाएं
“पुरुलिया में करम परब के अवसर पर कुड़मी समाज का बड़ा महाजुटान हुआ. कड़ाडी मैदान में आयोजित कार्यक्रम में शुभेंदु अधिकारी समेत कई प्रमुख लोग शामिल हुए. मंच से कुड़मी समाज के विकास, भाषा-संस्कृति और आंदोलन से जुड़े मामलों को लेकर कई घोषणाएं सामने आईं.”

Puruliya: पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में करम परब के अवसर पर रविवार को कुड़मी समाज का बड़ा सामाजिक-सांस्कृतिक महाजुटान आयोजित हुआ. टामना थाना क्षेत्र के कड़ाडी मैदान में हुए ‘करम परबतिया महा जुड़ुआहि’ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कुड़मी समाज के लोग शामिल हुए. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे. झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो समेत कई प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी रही. आयोजन में करम परब की परंपरा, कुड़मी समाज की भाषा-संस्कृति और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा हुई. मंच से शुभेंदु अधिकारी ने समाज से जुड़े विकास, संस्कृति और अधिकारों को लेकर सरकार के रुख और कई प्रस्तावों की जानकारी दी.
करम परब के मंच से कुड़मी समाज के लिए कई बातें सामने आईं
पुरुलिया के कड़ाडी मैदान में आयोजित करम परब कार्यक्रम इस बार सामाजिक और सांस्कृतिक जुटान के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण घोषणाओं के लिए भी चर्चा में रहा. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपने संबोधन में आदिवासी समाज की भाषा, संस्कृति, परंपरा और अधिकारों के संरक्षण की बात कही. उन्होंने कुड़मी समाज को लेकर भी सरकार की ओर से कई मुद्दों पर काम करने की बात रखी. रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान दर्ज कुड़मी आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने की घोषणा की. इसके अलावा कुड़मी विकास बोर्ड के लिए 50 करोड़ रुपये के प्रावधान की जानकारी भी सामने आई. सरकार की ओर से जरूरत के मुताबिक इस राशि को बढ़ाने की बात भी कही गई है. इन घोषणाओं के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच कुड़मी समाज से जुड़े विकास और सामाजिक मुद्दों को लेकर चर्चा तेज रही.
कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की बात
करम परब के मंच से कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के प्रयास का मुद्दा भी सामने आया. शुभेंदु अधिकारी ने भाषा और संस्कृति के संरक्षण को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता जताई. कुड़माली को आठवीं अनुसूची में शामिल करना कुड़मी समाज की लंबे समय से चली आ रही प्रमुख मांगों में शामिल है. हाल के महीनों में इस मांग को लेकर समाज के प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार के नेताओं से भी मुलाकात की है. अगस्त 2026 में कुड़मी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर कुड़माली को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग रखी थी. पुरुलिया का करम महाजुटान इसी व्यापक सामाजिक और भाषाई मुद्दे को सामने रखने का एक बड़ा मंच बना. कार्यक्रम में भाषा, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक अधिकारों से जुड़े विषयों पर भी जोर दिया गया.
झारखंड समेत कई इलाकों से पहुंचे कुड़मी समाज के लोग
करम परब के इस महाजुटान में पश्चिम बंगाल के अलावा झारखंड और आसपास के क्षेत्रों से भी कुड़मी समाज के लोगों के पहुंचने की जानकारी सामने आई. आयोजन से पहले प्रकाशित रिपोर्टों में झारखंड, ओडिशा और बिहार समेत पड़ोसी राज्यों से बड़ी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद जताई गई थी. कार्यक्रम में पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं. आयोजकों की ओर से इसे कुड़मी समाज की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकजुटता को प्रदर्शित करने वाला बड़ा आयोजन बताया गया. कार्यक्रम में झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो समेत कई सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी रही. इससे आयोजन का दायरा केवल स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा. महाजुटान में शामिल लोगों के बीच करम परब की परंपराओं के साथ समाज की भाषा, संस्कृति और लंबे समय से उठते आ रहे अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई.
करम परब के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान पर जोर
पुरुलिया का करम परब कुड़मी समाज के लिए सांस्कृतिक महत्व रखने वाला पर्व है. इस बार आयोजित महाजुटान में पारंपरिक कार्यक्रमों के साथ समाज की पहचान और उससे जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता मिली. मंच पर भाषा, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण की बात कही गई. शुभेंदु अधिकारी ने आदिवासी समाज की भाषा, संस्कृति, परंपरा और अधिकारों की रक्षा करने की बात दोहराई. उन्होंने जंगली इलाकों और पश्चिमांचल के विकास को लेकर भी सरकार की योजनाओं का उल्लेख किया. रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने पश्चिमांचल के विकास के लिए 1,600 करोड़ रुपये के प्रावधान की जानकारी भी दी. इस पूरे आयोजन में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी लोगों का ध्यान खींचा. करम नृत्य और अन्य पारंपरिक कार्यक्रमों के जरिए समाज की सांस्कृतिक विरासत को मंच मिला. महाजुटान के जरिए सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े संदेश भी सामने आए.
घोषणाओं के बाद अब अमल पर रहेगी नजर
कुड़मी समाज के महाजुटान में सामने आई घोषणाओं के बाद अब इन पर सरकार की ओर से आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी. कुड़मी विकास बोर्ड के लिए 50 करोड़ रुपये के प्रावधान, आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने और कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के प्रयास जैसे मुद्दे समाज के लिए महत्वपूर्ण बताए जा रहे हैं. वहीं, कुड़मी समाज की ओर से लंबे समय से एसटी दर्जे की मांग भी उठाई जाती रही है. हालिया रिपोर्टों में इस मांग को लेकर झारखंड और पश्चिम बंगाल के कुड़मी नेताओं की सक्रियता का उल्लेख किया गया है. ऐसे में पुरुलिया का यह महाजुटान केवल एक सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भाषा, सामाजिक अधिकार और विकास से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा का मंच बना. अब सरकार की घोषणाओं के क्रियान्वयन और आगे की नीतिगत पहल पर कुड़मी समाज और अन्य संबंधित पक्षों की नजर रहेगी.


