20 साल बाद साथ आए ठाकरे ब्रदर्स, ‘चंदू मामा’ बने मिलन के सूत्रधार
20 साल बाद उद्धव और राज ठाकरे फिर एक मंच पर आए. इस ऐतिहासिक सियासी मिलन के पीछे ‘चंदू मामा’ की अहम भूमिका सामने आई है, जिसने महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा बदल दी.

मुंबई की राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ आ गया. महाराष्ट्र की राजनीति में बुधवार को वह दृश्य देखने को मिला, जिसका इंतजार दो दशकों से किया जा रहा था. 20 साल बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक बार फिर सियासी मंच पर साथ नजर आए. शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने आगामी बीएमसी और स्थानीय निकाय चुनावों के लिए गठबंधन का औपचारिक ऐलान कर दिया. इस ऐलान के साथ ही ठाकरे परिवार में राजनीतिक ही नहीं, पारिवारिक स्तर पर भी नई शुरुआत होती दिखी.
कौन हैं ‘चंदू मामा’, जिनसे जुड़ा ठाकरे मिलन का राज
इस ऐतिहासिक मिलन के पीछे जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह हैं चंदू मामा. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लाल कुर्ते में मंच पर पहुंचे चंदू मामा को दोनों ठाकरे भाइयों ने गर्मजोशी से गले लगाया. चंदू मामा का पूरा नाम चंद्रकांत वैद्य है. वे राज ठाकरे की मां कुंडा ठाकरे के भाई हैं और ठाकरे परिवार के सबसे भरोसेमंद बुजुर्गों में गिने जाते हैं. राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि वर्षों से टूटे रिश्तों को जोड़ने में चंद्रकांत वैद्य सबसे मजबूत कड़ी साबित हुए.
20 साल पुराना टूटाव, अब नया अध्याय
राज ठाकरे ने 27 नवंबर 2005 को शिवसेना से इस्तीफा देकर अलग राह चुनी थी. इसके बाद ठाकरे परिवार दो राजनीतिक धड़ों में बंट गया. बीते 20 वर्षों में कई मौके आए, लेकिन दोनों भाई साथ नहीं आ सके. इस बार हालात बदले. विधानसभा चुनावों के बाद मराठी मुद्दों, भाषा विवाद और मुंबई की राजनीति को लेकर दोनों के बीच बातचीत तेज हुई, जिसमें चंदू मामा की मध्यस्थता निर्णायक साबित हुई.
दिल्ली बनाम मुंबई का नैरेटिव
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्धव ठाकरे ने सीधे केंद्र सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि “दिल्ली में बैठे लोग मुंबई और महाराष्ट्र को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.” उद्धव ने मराठी अस्मिता, महाराष्ट्र आंदोलन और 107 शहीदों का जिक्र करते हुए कहा कि ठाकरे परिवार का संघर्ष सत्ता के लिए नहीं, बल्कि मराठी मानुष के अधिकारों के लिए रहा है. राज ठाकरे ने भी साफ कहा कि “महाराष्ट्र और मुंबई किसी भी राजनीतिक झगड़े से बड़े हैं. इस बार मेयर मराठी ही होगा.”
बीएमसी चुनाव बना गठबंधन की धुरी
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, बीएमसी चुनाव इस गठबंधन की असली परीक्षा होंगे. 2017 के बीएमसी चुनाव में बीजेपी को 82, शिवसेना को 84 और मनसे को 7 सीटें मिली थीं. इससे पहले मनसे 27 सीटें जीत चुकी थी. अब दोनों दलों के साथ आने से मराठी वोट बैंक के एकजुट होने की संभावना मजबूत मानी जा रही है, जिससे मुंबई की सत्ता की तस्वीर बदल सकती है.
तुलजा भवानी का आशीर्वाद और भावुक पल
चंद्रकांत वैद्य ने इस मौके पर कहा कि “हम कई सालों से कोशिश कर रहे थे. आज हमारी मेहनत सफल हुई. हमारे पूर्वजों और देवी तुलजा भवानी का आशीर्वाद रहा.” यह बयान ठाकरे परिवार के भावनात्मक जुड़ाव को भी दर्शाता है.

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