1.58 लाख करोड़ का बजट केवल आंकड़ों का खेल, आदित्य साहू ने सरकार पर विजनहीनता का लगाया आरोप
झारखंड बजट 2026-27 को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने 1.58 लाख करोड़ रुपये के इस बजट को “दिशाहीन, तथ्यहीन और रंगहीन” बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. पार्टी ने वित्तीय कुप्रबंधन और केंद्र की मदद को नजरअंदाज करने का मुद्दा उठाया है.

Ranchi: झारखंड विधानसभा में पेश हुए 2026-27 के राज्य बजट पर अब सियासी घमासान तेज हो गया है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और सांसद आदित्य साहू ने इस बजट को “दिशाहीन, तथ्यहीन और रंगहीन” बताते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. बीजेपी ने कहा कि 1.58 लाख करोड़ रुपये का यह बजट केवल गोलमटोल आंकड़ों का पुलिंदा है, जिसमें न स्पष्ट विजन है और न ही जनता की समस्याओं का ठोस समाधान. साथ ही सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन, योजनाओं के अधूरे क्रियान्वयन और केंद्र सरकार के सहयोग को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया गया. बीजेपी का कहना है कि यह बजट “अबुआ दिसुम लूट बजट” है, जो विकास के बजाय केवल दिखावे और राजनीतिक संदेश के लिए लाया गया है. साथ ही निकाय चुनाव की मतगणना को लेकर भी पार्टी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं.
विजन और पारदर्शिता पर सवाल
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने प्रेसवार्ता में कहा कि यह बजट रंगहीन और खुशबू विहीन है, जिसमें राज्य के विकास की कोई स्पष्ट दिशा दिखाई नहीं देती. उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर का भाषण भी आत्मविश्वास से भरा नहीं था और सरकार के भीतर ही समन्वय की कमी नजर आई. बीजेपी ने यह भी कहा कि सरकार 1.36 लाख करोड़ रुपये के कथित बकाये का बार-बार जिक्र करती है, लेकिन उसका स्पष्ट ब्यौरा आज तक नहीं दिया गया. पार्टी का आरोप है कि सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए केंद्र पर दोष मढ़ रही है.
वित्तीय प्रबंधन और योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल
बीजेपी ने दावा किया कि पिछले बजट की लगभग 50 प्रतिशत राशि ही खर्च हो पाई है, जिससे नए बजट की गंभीरता पर सवाल उठते हैं. विभिन्न विभागों में खर्च की कम दरों का हवाला देते हुए कहा गया कि कृषि, भवन निर्माण, स्वास्थ्य, पेयजल, शिक्षा और उद्योग जैसे क्षेत्रों में निर्धारित राशि का बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं हुआ. पार्टी ने किसानों को धान का उचित मूल्य नहीं मिलने, छात्रवृत्ति, पेंशन और अन्य योजनाओं के भुगतान लंबित रहने तथा महिलाओं को घोषित लाभ नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया. इसके साथ ही डीएमएफटी फंड के कथित दुरुपयोग और जांच की मांग को लेकर भी सरकार को घेरा गया.
सामाजिक योजनाएं और निकाय चुनाव पर आरोप
बीजेपी ने कहा कि केंद्र सरकार ने झारखंड को पर्याप्त आर्थिक सहायता दी है और विभिन्न केंद्रीय योजनाओं—जनधन, बीमा, पेंशन, किसान सम्मान निधि, खाद्यान्न योजना—के जरिए लाखों लोगों को लाभ मिला है. इसके बावजूद राज्य सरकार केंद्र पर आरोप लगाकर भ्रम फैला रही है. इसके साथ ही पार्टी ने निकाय चुनाव की मतगणना प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि रात में मतगणना रोकने की योजना सही नहीं है. बीजेपी ने निर्वाचन आयोग से अपील की है कि मतगणना प्रक्रिया लगातार और पारदर्शी तरीके से पूरी कराई जाए.

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