टैरिफ में राहत की कीमत: ट्रंप की ट्रेड डील में निवेश की बड़ी शर्त, जापान से अरबों डॉलर का समझौता
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump की नई ट्रेड डील रणनीति के असर अब साफ दिखाई देने लगे हैं. टैरिफ में राहत देने के बदले अमेरिका अपने साझेदार देशों से भारी निवेश की शर्त रख रहा है.

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump की नई ट्रेड डील रणनीति के असर अब साफ दिखाई देने लगे हैं. टैरिफ में राहत देने के बदले अमेरिका अपने साझेदार देशों से भारी निवेश की शर्त रख रहा है. इस नीति का पहला बड़ा उदाहरण जापान के साथ हुई हालिया डील में देखने को मिला है.
टैरिफ में राहत, बदले में अरबों डॉलर का निवेश
जापान के साथ समझौते के तहत अमेरिकी बाजार में जापानी उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 15% कर दिया गया है. लेकिन इसके बदले जापान को अमेरिका में करीब 550 अरब डॉलर के निवेश का वादा करना पड़ा. अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, जापान शुरुआती चरण में 36 अरब डॉलर तीन बड़े प्रोजेक्ट्स में लगाएगा. ये प्रोजेक्ट टेक्सस, जॉर्जिया और ओहियो राज्यों में विकसित किए जाएंगे.
ओहियो में बनेगा विशाल गैस पावर प्लांट
ओहियो में बनने वाले नेचुरल गैस आधारित पावर प्लांट की अनुमानित लागत 33 अरब डॉलर बताई गई है. दावा किया जा रहा है कि यह अमेरिका का सबसे बड़ा गैस पावर प्लांट होगा, जो सालाना 9.2 गीगावॉट बिजली पैदा करेगा. इस परियोजना का संचालन जापान की प्रमुख निवेश कंपनी SoftBank Group की सहायक कंपनी SB Energy करेगी. जापान टेक्सस के तट पर स्थित Texas GulfLink डीपवॉटर क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट प्रोजेक्ट में 2.1 अरब डॉलर का निवेश करेगा. इस प्रोजेक्ट से हर साल 20 से 30 अरब डॉलर तक के कच्चे तेल के निर्यात की संभावना जताई जा रही है.
चीन पर निर्भरता घटाने की कोशिश
जॉर्जिया में एक सिंथेटिक इंडस्ट्रियल डायमंड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी स्थापित किया जाएगा. यह प्लांट अमेरिका की सिंथेटिक डायमंड ग्रिट की 100% मांग को पूरा करने में सक्षम होगा. फिलहाल अमेरिका इस सप्लाई के लिए काफी हद तक चीन पर निर्भर है. यह प्लांट लगभग 600 मिलियन डॉलर की लागत से बनेगा और इसका संचालन Element Six करेगी, जो De Beers Group का हिस्सा है.
क्या है ट्रंप की रणनीति?
ट्रंप प्रशासन की यह रणनीति साफ संकेत देती है कि अमेरिका केवल टैरिफ में राहत नहीं दे रहा, बल्कि इसके बदले अपने देश में बड़े पैमाने पर निवेश और औद्योगिक विकास सुनिश्चित कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति अमेरिका में रोजगार, ऊर्जा उत्पादन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती दे सकती है, लेकिन इसके साथ ही साझेदार देशों पर वित्तीय दबाव भी बढ़ा सकती है. कुल मिलाकर, यह ट्रेड डील सिर्फ टैरिफ में कटौती नहीं बल्कि निवेश आधारित सौदा साबित हो रही है, जिसके दूरगामी आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं.

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