परीक्षा रद्द होने के बाद भी सड़क पर छात्र, देवेंद्र नाथ महतो बोले- अब सरकार की कार्रवाई देखेंगे
JSSC-CGL रद्द होने के बाद 24 दिन से जारी छात्र आंदोलन खत्म हो गया और देवेंद्र नाथ महतो समेत अनशन पर बैठे छात्रों ने भूख हड़ताल समाप्त कर दी. हालांकि, CBI जांच, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई की मांग अब भी बनी हुई है.

Ranchi: झारखंड में JSSC-CGL और भर्ती परीक्षाओं को लेकर चला 24 दिन लंबा छात्र आंदोलन सरकार के बड़े फैसले के बाद निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा के साथ 2014 से TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं, उनके परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का ऐलान किया है. इसके बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत अनशन पर बैठे छात्रों ने भूख हड़ताल खत्म कर दी. हालांकि, आंदोलन से जुड़े सभी सवाल अभी खत्म नहीं हुए हैं. छात्रों की सबसे बड़ी मांगों में कथित अनियमितताओं की CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता शामिल है. देवेंद्र नाथ महतो का कहना है कि परीक्षा रद्द करना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन आगे की व्यवस्था भी भरोसेमंद और पारदर्शी होनी चाहिए. सरकार की ओर से बातचीत की पहल और कई मांगों पर सकारात्मक रुख के बावजूद अब नजर इस बात पर है कि आश्वासन कितनी जल्दी ठोस कार्रवाई में बदलते हैं.
परीक्षा रद्द होने के बाद बदली आंदोलन की दिशा
JSSC-CGL समेत भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आंदोलन जुलाई के आखिरी सप्ताह में शुरू हुआ था. रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे बड़ा होता गया. छात्रों ने JSSC-CGL, JPSC की परीक्षाओं और TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाई. आंदोलन के दौरान भूख हड़ताल भी शुरू हुई. देवेंद्र नाथ महतो समेत तीन छात्र नेताओं की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. इसी बीच सरकार ने 17 अगस्त को JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस फैसले का ऐलान किया. फैसले के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने अनशन खत्म करने की घोषणा की.
सरकार की बातचीत की पहल, लेकिन छात्रों को अब कार्रवाई चाहिए
आंदोलन के बीच सरकार की ओर से छात्रों से बातचीत की पहल की गई थी. 17 अगस्त से पहले की रिपोर्टों में छात्रों और सरकार के बीच बातचीत शुरू होने की बात सामने आई थी, लेकिन उस समय तक सीधी वार्ता नहीं हुई थी. छात्रों ने कहा था कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी मांगों पर ठोस फैसला जरूरी है. परीक्षा रद्द होने के बाद सरकार और आंदोलनकारियों के बीच टकराव की स्थिति जरूर नरम हुई है. मंगलवार को मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी रांची सदर अस्पताल पहुंचे और अनशनकारियों से मुलाकात की. दीपिका पांडेय सिंह ने देवेंद्र नाथ महतो समेत अन्य आंदोलनकारियों को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया. लेकिन छात्रों का फोकस अब परीक्षा रद्द होने से आगे की कार्रवाई पर है. उनका कहना है कि कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच हो और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए भर्ती व्यवस्था में ठोस सुधार किया जाए.
CBI जांच की मांग पर अब भी नजर
परीक्षा रद्द होने के बाद आंदोलन को बड़ी सफलता जरूर मिली है, लेकिन CBI जांच की मांग अभी भी इस पूरे विवाद का अहम मुद्दा बनी हुई है. देवेंद्र नाथ महतो ने परीक्षा रद्द करने के फैसले का स्वागत करते हुए आगे की भर्ती व्यवस्था को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की जरूरत बताई है. सरकार ने 2014 के बाद TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं, परिणामों और चयन प्रक्रियाओं की जांच का रास्ता खोल दिया है. अब असली सवाल यह है कि जांच कितनी व्यापक होती है और कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी किस स्तर तक तय की जाती है. फिलहाल 24 दिन के आंदोलन के बाद सरकार ने छात्रों की सबसे बड़ी मांग—JSSC-CGL रद्द करने—पर फैसला ले लिया है. अनशन खत्म हो चुका है, लेकिन भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और जांच को लेकर बहस अभी बाकी है. आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई ही तय करेगी कि यह आंदोलन वास्तव में खत्म हुआ है या इसकी अगली लड़ाई अब जांच और जवाबदेही के मोर्चे पर होगी.

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