नेताजी पर बयान से मचा बवाल, BJP सांसद अनंत महाराज से छिना ‘बंग विभूषण’; शुभेंदु ने दिए थे एक्शन के आदेश
“नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार ने भाजपा सांसद अनंत महाराज से ‘बंग विभूषण’ सम्मान वापस ले लिया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सख्त रुख के बाद यह कार्रवाई हुई है.”

Kolkata: नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर पश्चिम बंगाल में विवाद गहराता जा रहा है। मामले में राज्य सरकार ने भाजपा के राज्यसभा सांसद नागेंद्र राय उर्फ अनंत महाराज को बड़ा झटका दिया है। सरकार ने उन्हें इसी साल दिया गया ‘बंग विभूषण’ सम्मान वापस लेते हुए निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक दिन पहले ही नेताजी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। अनंत महाराज पर नेताजी को लेकर विवादित बयान देने का आरोप है, जिसके बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया। राज्य के सूचना एवं संस्कृति विभाग ने आदेश जारी कर कहा कि सम्मान दिए जाने के बाद सामने आई परिस्थितियों को देखते हुए इसे उनके पास बनाए रखना उचित नहीं है। फरवरी में मिला यह सम्मान अब विवाद के बीच वापस ले लिया गया है।
विवादित बयान के बाद सरकार का बड़ा एक्शन
राज्य सरकार ने 13 अगस्त को जारी आदेश में अनंत महाराज को दिया गया ‘बंग विभूषण’ सम्मान वापस लेने की जानकारी दी। आदेश के मुताबिक, सम्मान दिए जाने के बाद सामने आए तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। सरकार ने सम्मान को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।
शुभेंदु अधिकारी ने पहले ही दिए थे गिरफ्तारी के निर्देश
सम्मान वापसी से एक दिन पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस को नेताजी के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि राजनीतिक पद या प्रभाव के आधार पर किसी को छूट नहीं दी जाएगी। नेताजी के सम्मान से जुड़े मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई करने की बात कही गई थी।
फरवरी में मिला था ‘बंग विभूषण’, अब वापस
अनंत महाराज को 21 फरवरी 2026 को तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार ने ‘बंग विभूषण’ से सम्मानित किया था। वह भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं और कूचबिहार क्षेत्र में राजवंशी समुदाय के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। कुछ ही महीनों बाद विवादित टिप्पणी के चलते उनसे यह सम्मान वापस लिया गया है। अब इस फैसले पर अनंत महाराज और भाजपा की प्रतिक्रिया का इंतजार है।



