मोरहाबादी मैदान में बाजार हटाने से नाराज दुकानदार, बैठक कर तैयार कर रहे आंदोलन की रणनीति
रांची के मोरहाबादी मैदान में लगने वाले अर्द्धसाप्ताहिक बाजार को हटाए जाने के बाद दुकानदारों का विरोध तेज हो गया है. वर्षों से कारोबार कर रहे सब्जी विक्रेताओं ने नगर निगम की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए बैठक शुरू कर दी है और आगे की रणनीति तैयार करने में जुटे हैं.

रांची: राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में वर्षों से लगने वाले अर्द्धसाप्ताहिक बाजार को हटाए जाने के बाद दुकानदारों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है. रांची नगर निगम की कार्रवाई के बाद बुधवार और शनिवार को लगने वाले इस बाजार में अब दुकानदारों को दुकान लगाने की अनुमति नहीं मिल रही है. इससे सैकड़ों छोटे व्यापारियों और सब्जी विक्रेताओं के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. कार्रवाई के विरोध में प्रभावित दुकानदार लगातार बैठकें कर रहे हैं और आगे की रणनीति तैयार करने में जुटे हैं. उनका कहना है कि प्रशासन ने पर्याप्त समय दिए बिना अचानक कार्रवाई की, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. दूसरी ओर, नगर निगम का उद्देश्य सड़क किनारे अतिक्रमण हटाकर यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाना बताया जा रहा है. हालांकि दुकानदारों का आरोप है कि उन्हें जारी नोटिस में दिए गए समय से पहले ही दुकानें हटा दी गईं और कई लोगों का सामान भी जब्त कर लिया गया. अब व्यापारी संगठन इस पूरे मामले में सामूहिक निर्णय लेने की तैयारी कर रहे हैं. आने वाले दिनों में आंदोलन, ज्ञापन या प्रशासन से वार्ता जैसे विकल्पों पर फैसला लिया जा सकता है.
वर्षों से लग रहा था अर्द्धसाप्ताहिक बाजार
मोरहाबादी मैदान स्थित बिरसा मुंडा स्टेडियम के समीप हर बुधवार और शनिवार को अर्द्धसाप्ताहिक बाजार लगता था. इस बाजार में आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में सब्जी विक्रेता, फल विक्रेता और अन्य छोटे कारोबारी अपनी दुकानें लगाकर कारोबार करते थे. यह बाजार स्थानीय लोगों के लिए भी खरीदारी का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है.
नगर निगम की कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद
हाल ही में रांची नगर निगम ने सड़क किनारे लगने वाली दुकानों को हटाने की कार्रवाई की. इस दौरान कई अस्थायी दुकानों को हटाया गया और कुछ दुकानदारों का सामान भी जब्त कर लिया गया. इसके बाद से बाजार नहीं लग पा रहा है, जिससे प्रभावित व्यापारियों में नाराजगी बढ़ गई है.
दुकानदारों ने लगाए जल्दबाजी के आरोप
प्रभावित दुकानदारों का कहना है कि वे पिछले 25 से 30 वर्षों से इसी स्थान पर व्यवसाय कर रहे हैं. उनका आरोप है कि नगर निगम ने नोटिस तो जारी किया था, लेकिन उसमें दिए गए 30 दिनों की अवधि पूरी होने से पहले ही कार्रवाई कर दी गई. इससे उन्हें अपना सामान हटाने और वैकल्पिक व्यवस्था करने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका.
बैठक कर बनाई जा रही आगे की रणनीति
कार्रवाई से नाराज दुकानदार लगातार बैठकें कर रहे हैं. व्यापारियों का कहना है कि वे सामूहिक रूप से आगे की रणनीति तय करेंगे. इसमें प्रशासन से वार्ता, ज्ञापन सौंपना या शांतिपूर्ण आंदोलन जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है. उनका कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे.
रोजी-रोटी पर संकट, समाधान की मांग
दुकानदारों का कहना है कि बाजार बंद होने से उनकी आय पूरी तरह प्रभावित हो गई है. कई परिवारों की आजीविका इसी बाजार पर निर्भर है. ऐसे में वे प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि या तो उन्हें पहले की तरह बाजार लगाने की अनुमति दी जाए या फिर कारोबार के लिए कोई वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए. फिलहाल सभी की नजर प्रशासन और दुकानदारों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी हुई है.

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